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पिंक बसें चलाने को बेटियां लेंगी प्रशिक्षण
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बेटियां चलाएंगी पिंक बसें
फर्रुखाबाद। प्रदेश सरकार शहरों में पिंक बस सेवा शुरू करने जा रही है। इसमें चालक के रूप में बेटियों को रखा जाएगा। जो बेटियां बसें चलाना चाहेंगी, उनको सात माह तक कानपुर स्थित प्रशिक्षण संस्थान में आवासीय ट्रेनिंग दी जाएगी। बाद में डिपो में तैनाती दी जाएगी।
उप्र कौशल विकास विभाग ने नई पहल शुरू की है। आने वाले दिनों में शहरों में चलने वाली पिंक बस सेवा बेटियों के हवाले होगी। इसके लिए उप्र परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक ने स्थानीय डिपो में निर्देश भेजे हैं। इसमें कहा कि कौशल विकास विभाग कानपुर स्थित प्रशिक्षण संस्थान में ट्रेनिंग शुरू करेगा।
इसमें आने वाले महीनों में शहरों में चलने वाली पिंक बसों को बेटियां चलाएंगी। सात महीने की ट्रेनिंग आवासीय होगी। इसमें इच्छुक बेटियों का रहना-खाना कौशल विकास विभाग की ओर से होगा।
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पत्र में कहा गया कि सात माह की ट्रेनिंग लेने के बाद डिपो में तैनाती कर दी जाएगी। इसके बदले उन्हें मानदेय भी दिया जाएगा। 17 महीने लगातार सही तरीके से संचालन करने वालों को संविदा चालक के रूप में नौकरी दे दी जाएगी।
सरकार के इस कदम से बेटियों को रोजगार के साथ अपने हुनर को प्रदर्शित करने का भी मौका मिलेगा। क्षेत्रीय प्रबंधक दीपक चौधरी ने बताया कि सभी डिपो को आदेश दे दिए गए हैं। वह पात्र बेटियों से आवेदन लेकर क्षेत्रीय कार्यालय भिजवाएंगे। बेटियों को भी हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए सरकार की एक अच्छी पहल है।
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फर्रुखाबाद। प्रदेश सरकार शहरों में पिंक बस सेवा शुरू करने जा रही है। इसमें चालक के रूप में बेटियों को रखा जाएगा। जो बेटियां बसें चलाना चाहेंगी, उनको सात माह तक कानपुर स्थित प्रशिक्षण संस्थान में आवासीय ट्रेनिंग दी जाएगी। बाद में डिपो में तैनाती दी जाएगी।
उप्र कौशल विकास विभाग ने नई पहल शुरू की है। आने वाले दिनों में शहरों में चलने वाली पिंक बस सेवा बेटियों के हवाले होगी। इसके लिए उप्र परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक ने स्थानीय डिपो में निर्देश भेजे हैं। इसमें कहा कि कौशल विकास विभाग कानपुर स्थित प्रशिक्षण संस्थान में ट्रेनिंग शुरू करेगा।
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इसमें आने वाले महीनों में शहरों में चलने वाली पिंक बसों को बेटियां चलाएंगी। सात महीने की ट्रेनिंग आवासीय होगी। इसमें इच्छुक बेटियों का रहना-खाना कौशल विकास विभाग की ओर से होगा।
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पत्र में कहा गया कि सात माह की ट्रेनिंग लेने के बाद डिपो में तैनाती कर दी जाएगी। इसके बदले उन्हें मानदेय भी दिया जाएगा। 17 महीने लगातार सही तरीके से संचालन करने वालों को संविदा चालक के रूप में नौकरी दे दी जाएगी।
सरकार के इस कदम से बेटियों को रोजगार के साथ अपने हुनर को प्रदर्शित करने का भी मौका मिलेगा। क्षेत्रीय प्रबंधक दीपक चौधरी ने बताया कि सभी डिपो को आदेश दे दिए गए हैं। वह पात्र बेटियों से आवेदन लेकर क्षेत्रीय कार्यालय भिजवाएंगे। बेटियों को भी हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए सरकार की एक अच्छी पहल है।