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हैंडपंप रिबोर और मरम्मत में घोटाले की आशंका
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फर्रुखाबाद। ब्लाक मोहम्मदाबाद क्षेत्र की ग्राम पंचायत पिपरगांव में हैंडपंप रिबोर व मरम्मत पर 32 लाख रुपये खर्च करने की जांच अभिलेख न मिलने से लटक गई है। सचिव की ओर से अभिलेख न दिए जाने से घोटाले की आशंका बढ़ गई है और उन्हें एडीपीआरओ की ओर से दोबारा नोटिस जारी की गई है।
ग्राम पंचायत पिपरगांव में पानी की टंकी से जलापूर्ति होने के बावजूद वर्ष 2020-21 में हैंडपंप मरम्मत व रिबोर पर 32 लाख रुपये खर्च कर दिए गए। 25 दिसंबर 2020 से प्रधान का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नियुक्त प्रशासक के कार्यकाल में सर्वाधिक धन हैंडपंपों पर खर्च किया गया।
वित्तीय वर्ष 2019-20 में हैंडपंप की मरम्मत पर पांच लाख व 2021-22 में सात लाख रुपये खर्च हुए थे। प्रशासक के दौरान हैंडपंपों पर 32 लाख रुपये खर्च होना घपले का संकेत दे रहा है। खास बात यह है पूरी ग्राम पंचायत में लगे करीब 250 हैंडपंपों में अभी भी आधे खराब हैं।
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बताया जा रहा है कि मिलीभगत के चलते चहेती फर्मों के खातों में धनराशि हस्तांतरित कर बंदरबांट किया गया है। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद डीपीआरओ ने संज्ञान लेते हुए एडीपीआरओ राजेश चौरसिया को जांच सौंपी थी। करीब तीन माह बीत चुके हैं, जांच के लिए सचिव ने अभिलेख ही उपलब्ध नहीं कराए। इससे जांच लटकी है।
जांच कर रहे एडीपीआरओ राजेश चौरसिया ने बताया कि उन्होंने सचिव अरविंद कुमार से खर्च का विवरण व अभिलेख मांगे थे। उपलब्ध न कराने पर 19 मई को दूसरा नोटिस जारी किया है। यदि सचिव ने अभिलेख नहीं दिए तो वह अपनी जांच रिपोर्ट में घोटाले की आशंका जताते हुए कमेटी से जांच कराने की संस्तुति करेंगे।
दूसरी ओर वर्तमान प्रधान कुंतेश यादव ने बताया कि हैंडपंप मरम्मत पर 32 लाख रुपये उनके कार्यकाल से पहले खर्च हुए होंगे, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। ग्राम पंचायत में आधे हैंडपंप खराब हैं।
रिबोर कराने के लिए पर्याप्त धन नहीं है। हैंडपंपों की मरम्मत करवा रहे हैं। टंकी से जलापूर्ति की जा रही है। डीपीआरओ विनय कुमार सिंह ने बताया कि एडीपीआरओ की जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
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ग्राम पंचायत पिपरगांव में पानी की टंकी से जलापूर्ति होने के बावजूद वर्ष 2020-21 में हैंडपंप मरम्मत व रिबोर पर 32 लाख रुपये खर्च कर दिए गए। 25 दिसंबर 2020 से प्रधान का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नियुक्त प्रशासक के कार्यकाल में सर्वाधिक धन हैंडपंपों पर खर्च किया गया।
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वित्तीय वर्ष 2019-20 में हैंडपंप की मरम्मत पर पांच लाख व 2021-22 में सात लाख रुपये खर्च हुए थे। प्रशासक के दौरान हैंडपंपों पर 32 लाख रुपये खर्च होना घपले का संकेत दे रहा है। खास बात यह है पूरी ग्राम पंचायत में लगे करीब 250 हैंडपंपों में अभी भी आधे खराब हैं।
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बताया जा रहा है कि मिलीभगत के चलते चहेती फर्मों के खातों में धनराशि हस्तांतरित कर बंदरबांट किया गया है। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद डीपीआरओ ने संज्ञान लेते हुए एडीपीआरओ राजेश चौरसिया को जांच सौंपी थी। करीब तीन माह बीत चुके हैं, जांच के लिए सचिव ने अभिलेख ही उपलब्ध नहीं कराए। इससे जांच लटकी है।
जांच कर रहे एडीपीआरओ राजेश चौरसिया ने बताया कि उन्होंने सचिव अरविंद कुमार से खर्च का विवरण व अभिलेख मांगे थे। उपलब्ध न कराने पर 19 मई को दूसरा नोटिस जारी किया है। यदि सचिव ने अभिलेख नहीं दिए तो वह अपनी जांच रिपोर्ट में घोटाले की आशंका जताते हुए कमेटी से जांच कराने की संस्तुति करेंगे।
दूसरी ओर वर्तमान प्रधान कुंतेश यादव ने बताया कि हैंडपंप मरम्मत पर 32 लाख रुपये उनके कार्यकाल से पहले खर्च हुए होंगे, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। ग्राम पंचायत में आधे हैंडपंप खराब हैं।
रिबोर कराने के लिए पर्याप्त धन नहीं है। हैंडपंपों की मरम्मत करवा रहे हैं। टंकी से जलापूर्ति की जा रही है। डीपीआरओ विनय कुमार सिंह ने बताया कि एडीपीआरओ की जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।