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गंगा का जलस्तर स्थिर, रामगंगा ने भरा उफान
farrukhabad
Updated Thu, 10 Aug 2017 12:20 AM IST
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कासिमपुर तराई गांव में झोपड़ों में भरा पानी।
- फोटो : अमर उजाला
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फर्रुखाबाद। खतरे के निशान के नजदीक पहुंचने के बाद गंगा का जलस्तर बुधवार को स्थिर रहा। अब रामगंगा ने उफान भरना शुरू किया है। बुधवार को रामगंगा के जलस्तर में 40 सेंटीमीटर बढ़ोतरी हुई। इसे 134.50 मीटर पर दर्ज किया गया।
बुधवार को गंगा में नरौरा से 177272 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इसका असर बाद में दिखेगा। वहीं बुधवार को गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु 136.60 से 20 सेंटीमीटर ऊपर 136.80 मीटर पर पहुंचने के बाद स्थिर हो गया है। गांवों में पानी भरने का लगातार सिलसिला जारी है। रामगंगा में खो हरेली रामनगर से 12506 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
इस कारण बुधवार की सुबह तक रामगंगा के जलस्तर में तीस सेंटीमीटर की बढ़ोत्तरी होने पर 134.40 मीटर पर पानी पहुंचा था। शाम चार बजे के बाद आई रिपोर्ट में दिन भर में 10 सेंटीमीटर पानी और बढ़ने से जलस्तर 134.50 मीटर पर पहुंच गया है।
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कासिमपुर तराई और साधौ सराय में भरने लगा पानी
शमसाबाद। गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से ऊपर पहुंचने से गांवों में तेजी से पानी भरना शुरू हो गया है। गांव कासिमपुर तराई में जागेश्वर, राजवीर, रामऔतार, आशाराम, वेदराम, जनक सिंह, किशोरी लाल, राधेश्याम के झोपड़ा में पानी भर गया। इस कारण वह अपना आशियाना छोड़कर सड़क किनारे ऊचे स्थान पर ढाईघाट रोड पर पहुंच कर पालीथीन तान कर आशियाना बना लिया है। गांव साधौ सराय में पानी भरने के कारण प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय बंद हो गए है। ग्रामीण रामबाबू, सुरेश चंद्र, सियाराम, रतीराम, राजेंद्र के झोपड़ों में पानी भर गया। इससे उनका घरेलू सामान भींग कर खराब हो गया है। इन लोगों ने भी सुरक्षित स्थान पर डेरा जमाने के लिए आशियाना छोड़ दिया है। गांव कटरी तौफीक में प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय पानी भरने के कारण बंद हो गए है।
गांव छोड़ने को तैयार नहीं ग्रामीण
अमृतपुर। एसडीएम वसंत कुमार गुप्ता ने बुधवार को बाढ़ प्रभावित गांवों का निरीक्षण किया। उन्होंने तहसीलदार को जिन गांवों में आवागमन बंद हो गया है। उन गांवों में नावों को चलवाने के निर्देश दिए। आशा की मढैया, कंचनपुर, सबलपुर, जोगराजपुर, लायकपुर, कुसुमापुर गांव गंगा में आई बाढ़ के कारण पानी से घिरे हुए है। इन गांवों में जाने का रास्ता बंद हो गया है। एसडीएम अमृतपुर ने इन गांवों की स्थिति का निरीक्षण कर तहसीलदार को प्रत्येक गांव में नाव चलवाने को कहा है। एसडीएम ने बताया कि तीसराम की मढैया में पानी भरा हुआ है। गांव के लोग वहां से सुरक्षित स्थानों परजाने को तैयार नहीं है। अगर वह बाढ़ शरणालय में जाते है तो उनको वहां पर भोजन भी उपलब्ध कराया जाएगा।
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बुधवार को गंगा में नरौरा से 177272 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इसका असर बाद में दिखेगा। वहीं बुधवार को गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु 136.60 से 20 सेंटीमीटर ऊपर 136.80 मीटर पर पहुंचने के बाद स्थिर हो गया है। गांवों में पानी भरने का लगातार सिलसिला जारी है। रामगंगा में खो हरेली रामनगर से 12506 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
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इस कारण बुधवार की सुबह तक रामगंगा के जलस्तर में तीस सेंटीमीटर की बढ़ोत्तरी होने पर 134.40 मीटर पर पानी पहुंचा था। शाम चार बजे के बाद आई रिपोर्ट में दिन भर में 10 सेंटीमीटर पानी और बढ़ने से जलस्तर 134.50 मीटर पर पहुंच गया है।
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कासिमपुर तराई और साधौ सराय में भरने लगा पानी
शमसाबाद। गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से ऊपर पहुंचने से गांवों में तेजी से पानी भरना शुरू हो गया है। गांव कासिमपुर तराई में जागेश्वर, राजवीर, रामऔतार, आशाराम, वेदराम, जनक सिंह, किशोरी लाल, राधेश्याम के झोपड़ा में पानी भर गया। इस कारण वह अपना आशियाना छोड़कर सड़क किनारे ऊचे स्थान पर ढाईघाट रोड पर पहुंच कर पालीथीन तान कर आशियाना बना लिया है। गांव साधौ सराय में पानी भरने के कारण प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय बंद हो गए है। ग्रामीण रामबाबू, सुरेश चंद्र, सियाराम, रतीराम, राजेंद्र के झोपड़ों में पानी भर गया। इससे उनका घरेलू सामान भींग कर खराब हो गया है। इन लोगों ने भी सुरक्षित स्थान पर डेरा जमाने के लिए आशियाना छोड़ दिया है। गांव कटरी तौफीक में प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय पानी भरने के कारण बंद हो गए है।
गांव छोड़ने को तैयार नहीं ग्रामीण
अमृतपुर। एसडीएम वसंत कुमार गुप्ता ने बुधवार को बाढ़ प्रभावित गांवों का निरीक्षण किया। उन्होंने तहसीलदार को जिन गांवों में आवागमन बंद हो गया है। उन गांवों में नावों को चलवाने के निर्देश दिए। आशा की मढैया, कंचनपुर, सबलपुर, जोगराजपुर, लायकपुर, कुसुमापुर गांव गंगा में आई बाढ़ के कारण पानी से घिरे हुए है। इन गांवों में जाने का रास्ता बंद हो गया है। एसडीएम अमृतपुर ने इन गांवों की स्थिति का निरीक्षण कर तहसीलदार को प्रत्येक गांव में नाव चलवाने को कहा है। एसडीएम ने बताया कि तीसराम की मढैया में पानी भरा हुआ है। गांव के लोग वहां से सुरक्षित स्थानों परजाने को तैयार नहीं है। अगर वह बाढ़ शरणालय में जाते है तो उनको वहां पर भोजन भी उपलब्ध कराया जाएगा।