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Farrukhabad News: गंगा मचा रहीं तबाही, पानी में मिल गई साल भर की कमाई

Sat, 30 Aug 2025 12:14 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 30 Aug 2025 12:14 AM IST
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Ganga is wreaking havoc, whole year's earnings got wasted in water
फर्रुखाबाद। गंगा इस बार बेहिसाब कटान कर रही हैं। पंखियन की मड़ैया में सात मकान कट गए। ठटा और प्यारे की मड़ैया में गंगा ने गुरुवार रात 12 घंटे में 15 मीटर कटान की। ठटा की मड़ैया का सरकारी स्कूल गंगा में समा गया। दोनों गांवों में करीब 110 मकानों में रह रहे लोग दहशत में हैं। ग्रामीणों ने घरों को खाली करना शुरू कर दिया है। मोटरवोट से ग्रामीण घरों का सामान धारा नगरी में सड़क किनारे लाकर रखने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का मानना है कि आज की रात भारी साबित होगी।
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गंगा की बाढ़ से पंखियन की मड़ैया में अभी तक कच्चे-पक्के 25 मकान कट चुके हैं। गुरुवार रात गुलफाम, सलमान, ईमान खां, इब्बन, सलमान (द्वितीय) और अकील के पक्के मकान और जुलफान की झोपड़ी नदी में समा गई। तेज धार के चलते करीब 15 मीटर अंदर रह रहे लोगों ने घरों को खाली करना शुरू कर दिया है। ठटा की मड़ैया में गुरुवार रात 12 घंटे में गंगा ने 15 मीटर कटान की। सरकारी स्कूल पानी में समा गया।
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मुंहाने पर मकान आने से मचले, गौतम, जितेंद्र, होतेलाल, महेंद्र समेत 25 लोगों ने मकान खाली करना शुरू कर दिए हैं। इस गांव में करीब 60 मकान हैं। पास में ही बसे प्यारे की मड़ैया में 50 मकान भी लोग खाली करने को विवश हैं। कटान बंद न होने पर गंगा एक दो दिन में इस गांव को भी काटने लगेंगी।
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ठटा की मड़ैया निवासी मचले राजपूत ने गंगा के मुंहाने पर खड़े मकान को खाली कर दिया। वह गेहूं, मूंगफली अन्य घरेलू सामान मोटरवोट से धारा नगरी में सड़क किनारे लाए। मचले ने बताया कि गुरुवार को कुछ लोग गांव में मोटरवोट से खाना बांटने गए थे तभी परिवार ने खाना खाया था। तब से शुक्रवार को दोपहर के एक बज चुके हैं। किसी ने कुछ नहीं खाया। चार भाई भी मकान खाली करने में लगे हैं। चार साल पहले हम लोगों ने मुख्यमंत्री आवास योजना से बनवाए थे। कुछ पैसे अपने पास से लगाकर आशियाना बनाया था। अब फिर पन्नी के नीचे रातें काटनी पड़ेंगी। दो बेटियां हैं।



ठटा की मड़ैया के ग्रामीणों को शुद्ध जल उपलब्ध कराने की मंशा से सात माह पहले पानी की टंकी का निर्माण कराया था। अब पानी की टंकी गंगा की धार से कुछ दूरी पर है। यदि इसी तरह कटान हुआ, तो टंकी का बचना नामुमकिन है। लिहाजा ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल का सपना खत्म हो जाएगा।
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