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Farrukhabad News: पहले पोस्टमार्टम में चार गंभीर चोट, पैनल में एक भी चोट नहीं मिली
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फर्रुखाबाद। व्यापारी के पोस्टमार्टम में डॉक्टर ने चार गंभीर चोटें आने से मौत की पुष्टि कर दी थी। रिपोर्ट देखकर एसपी के आदेश पर पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट को चैलेंज किया। पुलिस ने शव यात्रा रोककर पैनल से देर रात पोस्टमार्टम कराया। इसमें एक भी चोट की पुष्टि नहीं की गई। व्यापारी के परिजनों ने नौ लोगों पर हत्या करने का आरोप लगाया था।
कायमगंज कोतवाली क्षेत्र के गांव शिवरई बरियार निवासी व्यापारी राधेश्याम उर्फ रामदास व रामफल सक्सेना का मकान आमने-सामने है। तीन अक्तूबर की रात को राधेश्याम परिवार की एक बच्ची ने छत से रात आठ बजे उल्टी कर दी। उल्टी रामफल सक्सेना की पत्नी के ऊपर गिर पड़ी। इसी बात पर दोनों परिवारों में विवाद हो गया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची वहां किसी प्रकार का झगड़ा नहीं होने की बात पाई गई। रात में राधेश्याम के सीने में दर्द हुए। परिजन उसको सीएचसी लेकर गए। वहां डॉक्टर ने राधेश्याम को मृत घोषित कर दिया।
परिजनों ने रामफल सक्सेना सहित उनके नौ परिजनों पर पथराव करने से घायल राधेश्याम की हार्टअटैक से मौत होने का आरोप लगाकर तहरीर दी। पुलिस ने मौके पर जांच की, लेकिन राधेश्याम के शरीर पर एक भी जाहिरा चोट नहीं पाई गई। पुलिस ने शव का बुधवार की दोपहर पोस्टमार्टम कराया।
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डॉ. सुमित शाक्य ने शव का पोस्टमार्टम किया। उन्होंने राधेश्याम के सिर, छाती सहित चार गंभीर चोटों से मौत होने की पुष्टि की। इंस्पेक्टर कायमगंज जेपी पाल व सीओ सोहराब आलम ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखकर एसपी विकास कुमार को मामले की जानकारी दी। एसपी के आदेश पर पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट को चैलेंज किया। डीएम के आदेश पर सीएमओ अवनींद्र कुमार ने डॉ. मान सिंह व शोभित कुमार सिंह का पैनल गठित कर दिया। शमसाबाद एसओ ने अंतिम यात्रा को रास्ते में रोक कर शव को फिर से पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पैनल से हुए पोस्टमार्टम में राधेश्याम के शरीर पर एक भी चोट नहीं पाई गई। मौत का कारण स्पष्ट नहीं होने पर विसरा सुरक्षित कर लिया गया।
एसपी विकास कुमार ने गुरुवार को पुलिस लाइन के सभागार में बताया कि पुलिस की सक्रियता से नौ लोग हत्या के मामले में जेल जाने से बच गए। पूरे मामले में कार्रवाई के लिए पत्राचार किया जा रहा है। पंचायतनामे में एक भी चोट नहीं पाई गई। फिर पोस्टमार्टम में डॉक्टर को चार गंभीर चोटें कैसे मिल गई। इसके चलते ही पोस्टमार्टम को चैलेंज किया।
पोस्टमार्टम की वीडियो व फोटोग्राफी कराई गई
पैनल से हुए पोस्टमार्टम में स्वास्थ्य विभाग की ओर से वीडियो व फोटोग्राफी करवाई गई। एसपी के आदेश पर फोरेंसिक टीम ने भी वीडियो व फोटोग्राफी कर पूरे मामले पर नजर रखी। एक-एक तथ्य को इस दौरान कैमरे के सामने पैनल के डॉक्टरों ने रखा।
डॉ. सुमित की पोस्टमार्टम रिपोर्ट
डॉ. सुमित शाक्य ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में राधेश्याम के सिर की दोनों हड्डी टूटने, दिमाग की झिल्ली सिकुड़ने, छाती के दोनों ओर की पसली टूटने सहित चार चोटों का जिक्र किया था। चोटों के कारण व्यापारी की मौत होने की पुष्टि कर दी।
सीओ सोहराब आलम का तर्क
सीओ कायमगंज सोहराब आलम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया था। रामफल सक्सेना का मकान एक मंजिल का है। राधेश्याम का मकान दो मंजिला है। कोई भी नीचे से पथराव करेगा तो ऊपरी मंजिल पर खड़े व्यक्ति को इतनी गंभीर चोट नहीं लग सकती कि उसके गहरी और गुम चोट आ जाए। मौके पर आस पास के लोगों ने पथराव की पुष्टि नहीं की। पंचायतनामा भरते समय व्यापारी के पूरे शरीर को बारीकी से देखकर कार्रवाई की गई।
कई बार पोस्टमार्टम कर्मियों पर लग चुका रुपये मांगने का आरोप
पोस्टमार्टम हाउस में विसरा सुरक्षित रखने के लिए बैरल, लॉक, स्प्रिट, कपड़ा सहित अन्य सामान विभाग मुहैया नहीं कराता है। बैरल अक्सर पुलिस थानों से लेकर आती है। ऐसे में कर्मचारी मृतक के परिजनों से सामान लाने के लिए रुपये की मांग करते हैं। लोग रुपये देकर पोस्टमार्टम कराते हैं। कई बार लोगों ने इसको लेकर हंगामा भी किया। लेकिन व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ।
डॉक्टर की रिपोर्ट सही है या पैनल की, इसका निर्णय मैं नहीं कर सकता। न्यायालय में ही इसका फैसला हो सकता है। कार्रवाई के संबंध में डीएम व एसपी का आदेश मिलने के बाद तय किया जाएगा। पोस्टमार्टम के दौरान वह मौके पर नहीं थे। इस लिए रिपोर्ट में उनका हस्तक्षेप नहीं हो सकता है।
डॉ. अवनींद्र कुमार
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कायमगंज कोतवाली क्षेत्र के गांव शिवरई बरियार निवासी व्यापारी राधेश्याम उर्फ रामदास व रामफल सक्सेना का मकान आमने-सामने है। तीन अक्तूबर की रात को राधेश्याम परिवार की एक बच्ची ने छत से रात आठ बजे उल्टी कर दी। उल्टी रामफल सक्सेना की पत्नी के ऊपर गिर पड़ी। इसी बात पर दोनों परिवारों में विवाद हो गया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची वहां किसी प्रकार का झगड़ा नहीं होने की बात पाई गई। रात में राधेश्याम के सीने में दर्द हुए। परिजन उसको सीएचसी लेकर गए। वहां डॉक्टर ने राधेश्याम को मृत घोषित कर दिया।
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परिजनों ने रामफल सक्सेना सहित उनके नौ परिजनों पर पथराव करने से घायल राधेश्याम की हार्टअटैक से मौत होने का आरोप लगाकर तहरीर दी। पुलिस ने मौके पर जांच की, लेकिन राधेश्याम के शरीर पर एक भी जाहिरा चोट नहीं पाई गई। पुलिस ने शव का बुधवार की दोपहर पोस्टमार्टम कराया।
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डॉ. सुमित शाक्य ने शव का पोस्टमार्टम किया। उन्होंने राधेश्याम के सिर, छाती सहित चार गंभीर चोटों से मौत होने की पुष्टि की। इंस्पेक्टर कायमगंज जेपी पाल व सीओ सोहराब आलम ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखकर एसपी विकास कुमार को मामले की जानकारी दी। एसपी के आदेश पर पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट को चैलेंज किया। डीएम के आदेश पर सीएमओ अवनींद्र कुमार ने डॉ. मान सिंह व शोभित कुमार सिंह का पैनल गठित कर दिया। शमसाबाद एसओ ने अंतिम यात्रा को रास्ते में रोक कर शव को फिर से पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पैनल से हुए पोस्टमार्टम में राधेश्याम के शरीर पर एक भी चोट नहीं पाई गई। मौत का कारण स्पष्ट नहीं होने पर विसरा सुरक्षित कर लिया गया।
एसपी विकास कुमार ने गुरुवार को पुलिस लाइन के सभागार में बताया कि पुलिस की सक्रियता से नौ लोग हत्या के मामले में जेल जाने से बच गए। पूरे मामले में कार्रवाई के लिए पत्राचार किया जा रहा है। पंचायतनामे में एक भी चोट नहीं पाई गई। फिर पोस्टमार्टम में डॉक्टर को चार गंभीर चोटें कैसे मिल गई। इसके चलते ही पोस्टमार्टम को चैलेंज किया।
पोस्टमार्टम की वीडियो व फोटोग्राफी कराई गई
पैनल से हुए पोस्टमार्टम में स्वास्थ्य विभाग की ओर से वीडियो व फोटोग्राफी करवाई गई। एसपी के आदेश पर फोरेंसिक टीम ने भी वीडियो व फोटोग्राफी कर पूरे मामले पर नजर रखी। एक-एक तथ्य को इस दौरान कैमरे के सामने पैनल के डॉक्टरों ने रखा।
डॉ. सुमित की पोस्टमार्टम रिपोर्ट
डॉ. सुमित शाक्य ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में राधेश्याम के सिर की दोनों हड्डी टूटने, दिमाग की झिल्ली सिकुड़ने, छाती के दोनों ओर की पसली टूटने सहित चार चोटों का जिक्र किया था। चोटों के कारण व्यापारी की मौत होने की पुष्टि कर दी।
सीओ सोहराब आलम का तर्क
सीओ कायमगंज सोहराब आलम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया था। रामफल सक्सेना का मकान एक मंजिल का है। राधेश्याम का मकान दो मंजिला है। कोई भी नीचे से पथराव करेगा तो ऊपरी मंजिल पर खड़े व्यक्ति को इतनी गंभीर चोट नहीं लग सकती कि उसके गहरी और गुम चोट आ जाए। मौके पर आस पास के लोगों ने पथराव की पुष्टि नहीं की। पंचायतनामा भरते समय व्यापारी के पूरे शरीर को बारीकी से देखकर कार्रवाई की गई।
कई बार पोस्टमार्टम कर्मियों पर लग चुका रुपये मांगने का आरोप
पोस्टमार्टम हाउस में विसरा सुरक्षित रखने के लिए बैरल, लॉक, स्प्रिट, कपड़ा सहित अन्य सामान विभाग मुहैया नहीं कराता है। बैरल अक्सर पुलिस थानों से लेकर आती है। ऐसे में कर्मचारी मृतक के परिजनों से सामान लाने के लिए रुपये की मांग करते हैं। लोग रुपये देकर पोस्टमार्टम कराते हैं। कई बार लोगों ने इसको लेकर हंगामा भी किया। लेकिन व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ।
डॉक्टर की रिपोर्ट सही है या पैनल की, इसका निर्णय मैं नहीं कर सकता। न्यायालय में ही इसका फैसला हो सकता है। कार्रवाई के संबंध में डीएम व एसपी का आदेश मिलने के बाद तय किया जाएगा। पोस्टमार्टम के दौरान वह मौके पर नहीं थे। इस लिए रिपोर्ट में उनका हस्तक्षेप नहीं हो सकता है।
डॉ. अवनींद्र कुमार