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Farrukhabad News: गंगा की कटान में समा गए चार मकान, दो आधे लटके
Mon, 22 Sep 2025 12:06 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Mon, 22 Sep 2025 12:06 AM IST
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फोटो-08, दिलीप की मड़ैया के राममूर्ति का गंगा में गिरता मकान।संवाद
- फोटो : वॉलीबॉल चैंपियनशिप में प्रतिभाग करते खिलाड़ी।
फर्रुखाबाद। सदर तहसील के दिलीप की मड़ैया में आधा गांव गंगा में समा चुका है। रविवार सुबह से चार मकान गिर गए और दो आधे लटक हैं।
शेष बचे करीब 25 मकानों को खाली कराने के लिए चार मोटर बोट लगाई गईं। ग्रामीणों को आशंका है कि पानी कम होते ही कटान बढ़ेगा। पांच दिन में पूरा गांव खत्म हो जाएगा।
सदर तहसील के पृथ्वीपुर, ठटा की मड़ैया, दौली की मड़ैया का नामोनिशान खत्म हो चुका है। अब दिलीप की मड़ैया पर संकट है। गांव में बने करीब 50 पक्के मकानों में से 25 मकान पांच-छह दिन के कटान में गिर गए। रविवार को राममूर्ति, जबरसिंह, बबलू और बाबूराम के मकान खत्म हो गए। नरेश चंद्र और गिरीश चंद्र के आधे मकान लटके हैं। देर रात तक इनका भी गिरना तय माना जा रहा है।
स्थिति यह है कि गंगा का रौद्र रूप से ग्रामीणों में दहशत है। चंद परिवार ही अब गांव में बचे हैं। रविवार सुबह ग्राम प्रधान रामौतार पाल गांव में चार बोट लेकर पहुंचे। उन्होंने देर शाम तक मकानों में बचे सामान को सुरक्षित स्थान तक पहुंचवाया।
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गांव के अखिलेश राजपूत ने बताया कि पांच-छह दिन में आधा गांव खत्म हो गया। गंगा का जलस्तर कम हुआ तो कटान तेजी पकड़ेगा। इससे अब शेष बचे मकानों के कटने में बमुश्किल पांच दिन ही लगेंगे।
रिश्तेदारों के यहां रुके महिलाएं-बच्चे
गांव के मचले राजपूत का कहना है कि बाढ़ के कारण लोगों का परिवार कई हिस्सों में बंट गया है। युवा दिल्ली समेत बड़े शहरों में मजदूरी करने भेज दिए। बच्चे और पत्नियां रिश्तेदारों के यहां वक्त काट रही हैं। परिवार के मुखिया कभी सड़कों के किनारे पन्नी में तो कभी नाव और मोटर बोट से गांव में पहुंचते हैं। समझ नहीं आ रहा वक्त कैसे कटेगा।
जमापूंजी खर्च कर बनाई पक्की छत, अब झोपड़ी का सहारा
कहने को भले ही दिलीप, ठटा और दौली की मड़ैया नाम हो, मगर सभी गांवों में 90 फीसदी लोगों के पक्के मकान बने थे। गांव के सुखपाल और रामतीर्थ बताते हैं कि गंगा में कट चुके गांव के लोगों ने जीवन की जमापूंजी खर्च कर पक्की छत बनाई। मगर उन्हें क्या पता था कि बच्चों के नसीब में झोपड़ी ही लिखी है। अब फिर इधर-उधर पन्नी डालकर वक्त गुजारने को मजबूर हैं।
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शेष बचे करीब 25 मकानों को खाली कराने के लिए चार मोटर बोट लगाई गईं। ग्रामीणों को आशंका है कि पानी कम होते ही कटान बढ़ेगा। पांच दिन में पूरा गांव खत्म हो जाएगा।
सदर तहसील के पृथ्वीपुर, ठटा की मड़ैया, दौली की मड़ैया का नामोनिशान खत्म हो चुका है। अब दिलीप की मड़ैया पर संकट है। गांव में बने करीब 50 पक्के मकानों में से 25 मकान पांच-छह दिन के कटान में गिर गए। रविवार को राममूर्ति, जबरसिंह, बबलू और बाबूराम के मकान खत्म हो गए। नरेश चंद्र और गिरीश चंद्र के आधे मकान लटके हैं। देर रात तक इनका भी गिरना तय माना जा रहा है।
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स्थिति यह है कि गंगा का रौद्र रूप से ग्रामीणों में दहशत है। चंद परिवार ही अब गांव में बचे हैं। रविवार सुबह ग्राम प्रधान रामौतार पाल गांव में चार बोट लेकर पहुंचे। उन्होंने देर शाम तक मकानों में बचे सामान को सुरक्षित स्थान तक पहुंचवाया।
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गांव के अखिलेश राजपूत ने बताया कि पांच-छह दिन में आधा गांव खत्म हो गया। गंगा का जलस्तर कम हुआ तो कटान तेजी पकड़ेगा। इससे अब शेष बचे मकानों के कटने में बमुश्किल पांच दिन ही लगेंगे।
रिश्तेदारों के यहां रुके महिलाएं-बच्चे
गांव के मचले राजपूत का कहना है कि बाढ़ के कारण लोगों का परिवार कई हिस्सों में बंट गया है। युवा दिल्ली समेत बड़े शहरों में मजदूरी करने भेज दिए। बच्चे और पत्नियां रिश्तेदारों के यहां वक्त काट रही हैं। परिवार के मुखिया कभी सड़कों के किनारे पन्नी में तो कभी नाव और मोटर बोट से गांव में पहुंचते हैं। समझ नहीं आ रहा वक्त कैसे कटेगा।
जमापूंजी खर्च कर बनाई पक्की छत, अब झोपड़ी का सहारा
कहने को भले ही दिलीप, ठटा और दौली की मड़ैया नाम हो, मगर सभी गांवों में 90 फीसदी लोगों के पक्के मकान बने थे। गांव के सुखपाल और रामतीर्थ बताते हैं कि गंगा में कट चुके गांव के लोगों ने जीवन की जमापूंजी खर्च कर पक्की छत बनाई। मगर उन्हें क्या पता था कि बच्चों के नसीब में झोपड़ी ही लिखी है। अब फिर इधर-उधर पन्नी डालकर वक्त गुजारने को मजबूर हैं।

फोटो-08, दिलीप की मड़ैया के राममूर्ति का गंगा में गिरता मकान।संवाद- फोटो : वॉलीबॉल चैंपियनशिप में प्रतिभाग करते खिलाड़ी।