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Farrukhabad News: गैर इरादतन हत्या में पिता और पुत्रों को 10 साल कारावास
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फर्रुखाबाद। गैर इरादतन हत्या में कोर्ट ने पिता और दो पुत्रों को 10 साल कारावास की सजा सुनाई। तीनों दोषियों पर 17 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न देने पर एक वर्ष की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया।
थाना जहानगंज क्षेत्र के दालमंडी निवासी रामबरन पुत्र रामफेरे ने गांव के ही पिता समेत दो पुत्रों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा, 23 जुलाई 2014 को सुबह करीब आठ बजे खेत की मेड़ काटने को लेकर गांव के मुन्नू पुत्र नत्थीलाल, पुत्र सोबरन और हंसना उर्फ कमलेश से कहासुनी हो गई।
सभी ने लाठियों से उसे और उसके पिता व मां को पीटकर घायल कर दिया। पिता के सिर पर आई चोट लगने से चार अगस्त को राममनोहर लोहिया अस्पताल में मौत हो गई। पुलिस ने एनसीआर को गैर इरादतन हत्या में दर्ज कर लिया।
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विवेचक ने विवेचना कर तीनों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या के अपराध में न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। अभियोजन पक्ष की ओर से श्रवण कुमार ने दलीलें दीं। मुकदमे की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट तरुण कुमार सिंह ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं।
गवाह और साक्ष्य के आधार पर मुन्नू, सोबरन व हंसना को दोषी ठहराया। सभी को 10 साल कारावास की सजा सुनाई। 17 हजार रुपये जुर्माना लगाया। जुर्माना न देने पर एक वर्ष की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया।
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थाना जहानगंज क्षेत्र के दालमंडी निवासी रामबरन पुत्र रामफेरे ने गांव के ही पिता समेत दो पुत्रों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा, 23 जुलाई 2014 को सुबह करीब आठ बजे खेत की मेड़ काटने को लेकर गांव के मुन्नू पुत्र नत्थीलाल, पुत्र सोबरन और हंसना उर्फ कमलेश से कहासुनी हो गई।
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सभी ने लाठियों से उसे और उसके पिता व मां को पीटकर घायल कर दिया। पिता के सिर पर आई चोट लगने से चार अगस्त को राममनोहर लोहिया अस्पताल में मौत हो गई। पुलिस ने एनसीआर को गैर इरादतन हत्या में दर्ज कर लिया।
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विवेचक ने विवेचना कर तीनों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या के अपराध में न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। अभियोजन पक्ष की ओर से श्रवण कुमार ने दलीलें दीं। मुकदमे की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट तरुण कुमार सिंह ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं।
गवाह और साक्ष्य के आधार पर मुन्नू, सोबरन व हंसना को दोषी ठहराया। सभी को 10 साल कारावास की सजा सुनाई। 17 हजार रुपये जुर्माना लगाया। जुर्माना न देने पर एक वर्ष की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया।