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आलू के रुपये न मिलने पर दिव्यांग किसान फांसी पर झूला
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मोहम्मदाबाद। सात सौ पैकेट आलू का भुगतान न होने से परेशान दिव्यांग किसान फांसी के फंदे पर झूल गया। भाई की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस को अभी तहरीर नहीं मिली है।
कोतवाली क्षेत्र के गांव ऊगरपुर सुल्तानपट्टी निवासी राजेश सिंह (52) एक पैर से दिव्यांग थे और खेती करते थे। राजेश सिंह ने दो माह पहले क्षेत्र के एक फौजी को सात सौ पैकेट आलू बेचा था। फौजी ने शीघ्र भुगतान का वादा किया था। राजेश सिंह ने फौजी से संपर्क करने का प्रयास किया तो उसका मोबाइल बंद बताने लगा। फौजी के बारे मेें उसको कोई जानकारी नहीं मिल रही थी।
इस कारण राजेश सिंह मानसिक रूप से परेशान रहने लगे। बुधवार सुबह करीब छह बजे भतीजा माधव घर के बाहर आया तो उसने ताऊ राजेश सिंह को शहतूत के पेड़ से फंदे पर लटका देखा। माधव के चीखने पर परिवार के लोग बाहर निकल आए।
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भाई बृजेश सिंह ने कोतवाली पुलिस को सूचना दी। बृजेश ने पुलिस को बताया कि 700 पैकेट आलू के रुपये नहीं मिलने से भाई राजेश मानसिक रूप से परेशान थे। उन्होंने आलू किस भाव में बेचे थे इसकी जानकारी नहीं है। भुगतान न होने के कारण सुबह उन्होंने फांसी लगा ली। वह चार भाइयों में सबसे बड़े थे।
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कोतवाली क्षेत्र के गांव ऊगरपुर सुल्तानपट्टी निवासी राजेश सिंह (52) एक पैर से दिव्यांग थे और खेती करते थे। राजेश सिंह ने दो माह पहले क्षेत्र के एक फौजी को सात सौ पैकेट आलू बेचा था। फौजी ने शीघ्र भुगतान का वादा किया था। राजेश सिंह ने फौजी से संपर्क करने का प्रयास किया तो उसका मोबाइल बंद बताने लगा। फौजी के बारे मेें उसको कोई जानकारी नहीं मिल रही थी।
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इस कारण राजेश सिंह मानसिक रूप से परेशान रहने लगे। बुधवार सुबह करीब छह बजे भतीजा माधव घर के बाहर आया तो उसने ताऊ राजेश सिंह को शहतूत के पेड़ से फंदे पर लटका देखा। माधव के चीखने पर परिवार के लोग बाहर निकल आए।
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भाई बृजेश सिंह ने कोतवाली पुलिस को सूचना दी। बृजेश ने पुलिस को बताया कि 700 पैकेट आलू के रुपये नहीं मिलने से भाई राजेश मानसिक रूप से परेशान थे। उन्होंने आलू किस भाव में बेचे थे इसकी जानकारी नहीं है। भुगतान न होने के कारण सुबह उन्होंने फांसी लगा ली। वह चार भाइयों में सबसे बड़े थे।