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सबलपुर में 68 फर्जी पट्टे निरस्त, जिम्मेदारों को नोटिस
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फर्रुखाबाद। राजेपुर ब्लाक के गांव कंचनपुर सबलपुर में 68 फर्जी पट्टे निरस्त कर दिए गए। मामले में ग्रामीणों की शिकायत पर डीएम ने एडीएम से जांच कराई। इसमें फर्जीवाड़ा सामने आया है। एडीएम ने मामले में तत्कालीन तहसीलदार, एसडीएम सहित पांच लोगों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
ग्राम पंचायत कंचनपुर सबलपुर के मजरा आशा की मड़ैया निवासी पूर्व प्रधान रामवरन वर्मा ने 15 सितंबर को ग्रामीणों के साथ डीएम से फर्जी तरीके से पट्टा करने की शिकायत कर अधिकारियों पर आरोप लगाये थे। डीएम ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए एडीएम विवेक श्रीवास्तव से जांच कराई। जांच में 68 ग्रामीणों के नाम की फर्जी प्रविष्टियां मिलने पर उन्होंने पट्टे खारिज करा दिए। इनके नाम पर फर्जी तरीके से करीब 128 एकड़ भूमि दर्ज थी। शिकायत में यह भी कहा गया कि 21 मई 2014 को पट्टे स्वीकृत होने के बाद 26 जून 2016 को अमल दरामद कर पट्टाधारकों को रिसीविंग दी गई। काफी समय तक खतौनी न मिलने पर शक हुआ। इस पर ग्रामीणों ने खतौनी में इंद्राज करने के लिए कई प्रार्थना पत्र दिए, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इसके लिए अधिकारियों ने नौ लाख रुपये भी लिए।
एडीएम ने बताया कि फर्जी प्रविष्टियां दर्ज कराने और रिश्वत लेने के मामले में की जांच कर रहे हैं। उन्होंने अमृतपुर में तत्कालीन एसडीएम रहे बृजेंद्र कुमार व नरेंद्र, तहसीलदार संतोष कुमार कुशवाहा, रजिस्ट्रार कानूनगो कन्हैयालाल व एसडीएम के पेशकार को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। वर्ष 2014 से अब तक के अभिलेखों व आर-6 रजिस्टर की भी जांच की जा रही है। जांच में दोषी पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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ग्राम पंचायत कंचनपुर सबलपुर के मजरा आशा की मड़ैया निवासी पूर्व प्रधान रामवरन वर्मा ने 15 सितंबर को ग्रामीणों के साथ डीएम से फर्जी तरीके से पट्टा करने की शिकायत कर अधिकारियों पर आरोप लगाये थे। डीएम ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए एडीएम विवेक श्रीवास्तव से जांच कराई। जांच में 68 ग्रामीणों के नाम की फर्जी प्रविष्टियां मिलने पर उन्होंने पट्टे खारिज करा दिए। इनके नाम पर फर्जी तरीके से करीब 128 एकड़ भूमि दर्ज थी। शिकायत में यह भी कहा गया कि 21 मई 2014 को पट्टे स्वीकृत होने के बाद 26 जून 2016 को अमल दरामद कर पट्टाधारकों को रिसीविंग दी गई। काफी समय तक खतौनी न मिलने पर शक हुआ। इस पर ग्रामीणों ने खतौनी में इंद्राज करने के लिए कई प्रार्थना पत्र दिए, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इसके लिए अधिकारियों ने नौ लाख रुपये भी लिए।
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एडीएम ने बताया कि फर्जी प्रविष्टियां दर्ज कराने और रिश्वत लेने के मामले में की जांच कर रहे हैं। उन्होंने अमृतपुर में तत्कालीन एसडीएम रहे बृजेंद्र कुमार व नरेंद्र, तहसीलदार संतोष कुमार कुशवाहा, रजिस्ट्रार कानूनगो कन्हैयालाल व एसडीएम के पेशकार को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। वर्ष 2014 से अब तक के अभिलेखों व आर-6 रजिस्टर की भी जांच की जा रही है। जांच में दोषी पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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