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हड़ताल पर कर्मचारी, एंबुलेंस के थमे पहिए
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लोहिया अस्पताल में धरना प्रदर्शन करते एंबुलेंस कर्मचारी। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। स्वास्थ्य विभाग के 108, 102 एंबुलेंस कर्मचारी संघ के आह्वान पर जिले भर के एंबुलेंस कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। गाड़ियों को लोहिया अस्पताल परिसर में खड़ा कर धरना देकर प्रदर्शन किया। कहा कि जब तक उनकी छह सूत्रीय मांगों को पूरा नहीं किया जाता, काम पर नहीं लौटेंगे।
विभिन्न मांगों को लेकर कर्मचारी संघ के आह्वान पर सांकेतिक विरोध 23 जुलाई से चल रहा था। वार्ता के बावजूद सरकार और ठेकेदार कंपनी से समझौता न होने पर रविवार रात 12 बजे से जिले भर के एंबुलेंस कर्मियों ने काम बंद कर दिया। गाड़ियों को लोहिया अस्पताल परिसर में खड़ी कर सोमवार सुबह ही सैकड़ों कर्मचारी धरना देकर बैठ गए। उन्होंने नारेबाजी कर मांगों के समर्थन में आरपार की लड़ाई का ऐलान कर दिया।
जिलाध्यक्ष कश्मीर कनौजिया ने कहा कि एएलएस संचालक कंपनी बदली तो नई कंपनी पुराने कर्मियों को हटा रही है। यह कतई ठीक नहीं है। कर्मचारियों ने ठेकेदारी व्यवस्था खत्म करने की मांग की। कहा कि कोरोना काल में दिवंगत हुए कर्मचारी के परिजनों को 50 लाख रुपये की सहायता मिले। कर्मचारियों के वेतन में कोई कटौती न की जाए। कर्मचारी हित में कोई समझौता न करने का ऐलान किया। हड़ताली कर्मियों ने सरकार और कंपनी के खिलाफ नारेबाजी भी की। प्रदर्शन की अगुवाई करने वालों में उपाध्यक्ष अजीत यादव, मीडिया प्रभारी शिशिर कुमार, नवीन आदि थे।
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निजी एंबुलेंस संचालकों की लाटरी खुली
सरकारी एंबुलेंस की हड़ताल होते ही निजी एंबुलेंस संचालकों की लाटरी खुल गई। दिन भर लोहिया अस्पताल में मरीजों को लाने और ले जाने में निजी एंबुलेंस का प्रयोग किया गया। इस दौरान मरीजों से मनमाने दाम भी वसूल किेए
46 एंबुलेंस हैं, रोजाना औसतन आती हैं 250 कॉल
जिले में 108 की 22, 102 की 21 और 3 एएलएस एंबुलेंस हैं। इन पर रोजाना औसतन 250 कॉल आती हैं। सबसे ज्यादा 102 गाड़ियां मरीजों को अस्पताल पहुंचाती हैं। गाड़ियां बंद होने से तमाम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
इमरजेंसी मरीजों को पहुंचाने के लिए तीन एंबुलेंस उपलब्ध
प्रदेश संगठन के निर्देश पर जिलाध्यक्ष कश्मीर कनौजिया ने सीएमओ को एक पत्र देकर पुलिस लाइन, पीएचसी जहानगंज और सीएचसी कायमगंज के लिए एक-एक एंबुलेंस स्टाफ के साथ दे दी। यह तीन गाड़ियां हड़ताल के दौरान भी इमरजेंसी मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाएंगी। हालांकि सीएमओ डॉ. सतीश चंद्रा ने संगठन जिलाध्यक्ष से हर ब्लाक पर एक और जिला मुख्यालय पर दो एंबुलेंस कर्मचारी सहित देने की बात कही। इस पर जिलाध्यक्ष ने असहमति जताई। कहा कि जैसा प्रदेश संगठन से निर्देश मिला है, वैसा ही किया जाएगा।
तैनाती 300 की, धरने पर सौ कर्मी
एंबुलेंस कर्मियों की संख्या 300 से अधिक है। बावजूद इसके धरने पर मात्र 100 कर्मी ही पहुंच सके। इससे साफ है कि बड़ी संख्या में कर्मचारी अपने घरों को चले गए और वह धरने में शामिल नहीं हुए। इससे संगठन कमजोर दिखाई दे रहा है।
एक घंटे इंतजार के बाद ई-रिक्शा से पहुंचा घायल
बरेली-इटावा राजमार्ग स्थित बढ़ेली मुरहास निवासी हरीराम दोपहर कादरीगेट के पास जा रहे थे तभी वाहन ने टक्कर मार दी। इससे वह घायल हो गए। आसपास के लोगों ने 108 पर कॉल करके एंबुलेंस बुलाने का प्रयास किया, लेकिन गाड़ी एक घंटे तक नहीं पहुंची। घायल मौके पर ही तड़पता रहा। इसके बाद कादरीगेट के निवास रामप्रसाद ई-रिक्शा से घायल को लेकर लोहिया अस्पताल पहुंचे। तब उसका इलाज शुरू किया जा सका।
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विभिन्न मांगों को लेकर कर्मचारी संघ के आह्वान पर सांकेतिक विरोध 23 जुलाई से चल रहा था। वार्ता के बावजूद सरकार और ठेकेदार कंपनी से समझौता न होने पर रविवार रात 12 बजे से जिले भर के एंबुलेंस कर्मियों ने काम बंद कर दिया। गाड़ियों को लोहिया अस्पताल परिसर में खड़ी कर सोमवार सुबह ही सैकड़ों कर्मचारी धरना देकर बैठ गए। उन्होंने नारेबाजी कर मांगों के समर्थन में आरपार की लड़ाई का ऐलान कर दिया।
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जिलाध्यक्ष कश्मीर कनौजिया ने कहा कि एएलएस संचालक कंपनी बदली तो नई कंपनी पुराने कर्मियों को हटा रही है। यह कतई ठीक नहीं है। कर्मचारियों ने ठेकेदारी व्यवस्था खत्म करने की मांग की। कहा कि कोरोना काल में दिवंगत हुए कर्मचारी के परिजनों को 50 लाख रुपये की सहायता मिले। कर्मचारियों के वेतन में कोई कटौती न की जाए। कर्मचारी हित में कोई समझौता न करने का ऐलान किया। हड़ताली कर्मियों ने सरकार और कंपनी के खिलाफ नारेबाजी भी की। प्रदर्शन की अगुवाई करने वालों में उपाध्यक्ष अजीत यादव, मीडिया प्रभारी शिशिर कुमार, नवीन आदि थे।
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निजी एंबुलेंस संचालकों की लाटरी खुली
सरकारी एंबुलेंस की हड़ताल होते ही निजी एंबुलेंस संचालकों की लाटरी खुल गई। दिन भर लोहिया अस्पताल में मरीजों को लाने और ले जाने में निजी एंबुलेंस का प्रयोग किया गया। इस दौरान मरीजों से मनमाने दाम भी वसूल किेए
46 एंबुलेंस हैं, रोजाना औसतन आती हैं 250 कॉल
जिले में 108 की 22, 102 की 21 और 3 एएलएस एंबुलेंस हैं। इन पर रोजाना औसतन 250 कॉल आती हैं। सबसे ज्यादा 102 गाड़ियां मरीजों को अस्पताल पहुंचाती हैं। गाड़ियां बंद होने से तमाम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
इमरजेंसी मरीजों को पहुंचाने के लिए तीन एंबुलेंस उपलब्ध
प्रदेश संगठन के निर्देश पर जिलाध्यक्ष कश्मीर कनौजिया ने सीएमओ को एक पत्र देकर पुलिस लाइन, पीएचसी जहानगंज और सीएचसी कायमगंज के लिए एक-एक एंबुलेंस स्टाफ के साथ दे दी। यह तीन गाड़ियां हड़ताल के दौरान भी इमरजेंसी मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाएंगी। हालांकि सीएमओ डॉ. सतीश चंद्रा ने संगठन जिलाध्यक्ष से हर ब्लाक पर एक और जिला मुख्यालय पर दो एंबुलेंस कर्मचारी सहित देने की बात कही। इस पर जिलाध्यक्ष ने असहमति जताई। कहा कि जैसा प्रदेश संगठन से निर्देश मिला है, वैसा ही किया जाएगा।
तैनाती 300 की, धरने पर सौ कर्मी
एंबुलेंस कर्मियों की संख्या 300 से अधिक है। बावजूद इसके धरने पर मात्र 100 कर्मी ही पहुंच सके। इससे साफ है कि बड़ी संख्या में कर्मचारी अपने घरों को चले गए और वह धरने में शामिल नहीं हुए। इससे संगठन कमजोर दिखाई दे रहा है।
एक घंटे इंतजार के बाद ई-रिक्शा से पहुंचा घायल
बरेली-इटावा राजमार्ग स्थित बढ़ेली मुरहास निवासी हरीराम दोपहर कादरीगेट के पास जा रहे थे तभी वाहन ने टक्कर मार दी। इससे वह घायल हो गए। आसपास के लोगों ने 108 पर कॉल करके एंबुलेंस बुलाने का प्रयास किया, लेकिन गाड़ी एक घंटे तक नहीं पहुंची। घायल मौके पर ही तड़पता रहा। इसके बाद कादरीगेट के निवास रामप्रसाद ई-रिक्शा से घायल को लेकर लोहिया अस्पताल पहुंचे। तब उसका इलाज शुरू किया जा सका।