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12 दिन में ही बुझने लगीं तिरंगा लाइटें
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तेहगढ़ में पोल पर लगी बंद तिरंगा लाइट। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत शहर में करीब 125 स्ट्रीट लाइटों के पोलों पर लगाई जा चुकीं तिरंगा लाइटें 12 दिन में ही बुझने लगीं हैं। इस एक लाइट की कीमत 2600 रुपये बताई जा रही है, जबकि बाजार में इसकी कीमत दो सौ से छह सौ रुपये के बीच है। छह सौ रुपये कीमत वाली लाइट पर दो साल की गारंटी और इसकी लंबाई पांच मीटर है। इससे लाइट लगाने के इस काम में भी खेल की आशंका जताई जा रही है।
मुख्य सचिव ने आजादी के अमृत महोत्सव के तहत 11 से 17 जून के बीच हर घर तिरंगा कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए थे। इसी के अनुपालन में डीएम ने 13 जून को प्रतिष्ठानों पर तिरंगा फहराने और लाइटिंग करने के निर्देश दिए थे। इसी को आधार बनाकर एक चहेती कंपनी से बंडल मंगवाकर तीन दिन में ही स्ट्रीट लाइटों के करीब 125 पोलों पर तिरंगा लाइटें लगा दी गईं, मगर लगते ही लाइटें बुझने लगीं।
स्थिति यह है कि करीब 50 फीसदी लाइटों में एक-एक रंग बंद हो गया है। कुछ पोल पर तो पूरी तरह लाइट बंद हो गई है। इससे शासन की मंशा पर पानी फिरता दिख रहा है। पालिका के बिजली पटल पर तिरंगा लाइट संबंधी कोई रिकार्ड मौजूद नहीं है। संबंधित कर्मचारी लाइटों को सैंपल के रूप में लगाने की बात कह रहे हैं। 125 पोलों पर लाइटें सैंपल के तौर पर लगाना गले नहीं उतर रहा है।
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बड़े खेल की आशंका
नगर पालिका में बिजली पटल संबंधित कर्मचारी कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि एक तिरंगा लाइट की की कीमत 2600 रुपये है। हालांकि अभी लिखा-पढ़ी में कुछ भी नहीं है। तिरंगा लाइटों में बड़ा खेल की आशंका है।
साहब की खास फर्म से ले ली सप्लाई
पालिका के एक साहब की लखनऊ में खास फर्म है। उसी फर्म से आनन-फानन में तिरंगा लाइटें मंगवा ली गईं। पालिका के बिजली विभाग में स्टिक के बंडलों को काट कर लगाने का काम पालिका के कर्मचारी ही रहे हैं।
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मुख्य सचिव ने आजादी के अमृत महोत्सव के तहत 11 से 17 जून के बीच हर घर तिरंगा कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए थे। इसी के अनुपालन में डीएम ने 13 जून को प्रतिष्ठानों पर तिरंगा फहराने और लाइटिंग करने के निर्देश दिए थे। इसी को आधार बनाकर एक चहेती कंपनी से बंडल मंगवाकर तीन दिन में ही स्ट्रीट लाइटों के करीब 125 पोलों पर तिरंगा लाइटें लगा दी गईं, मगर लगते ही लाइटें बुझने लगीं।
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स्थिति यह है कि करीब 50 फीसदी लाइटों में एक-एक रंग बंद हो गया है। कुछ पोल पर तो पूरी तरह लाइट बंद हो गई है। इससे शासन की मंशा पर पानी फिरता दिख रहा है। पालिका के बिजली पटल पर तिरंगा लाइट संबंधी कोई रिकार्ड मौजूद नहीं है। संबंधित कर्मचारी लाइटों को सैंपल के रूप में लगाने की बात कह रहे हैं। 125 पोलों पर लाइटें सैंपल के तौर पर लगाना गले नहीं उतर रहा है।
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बड़े खेल की आशंका
नगर पालिका में बिजली पटल संबंधित कर्मचारी कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि एक तिरंगा लाइट की की कीमत 2600 रुपये है। हालांकि अभी लिखा-पढ़ी में कुछ भी नहीं है। तिरंगा लाइटों में बड़ा खेल की आशंका है।
साहब की खास फर्म से ले ली सप्लाई
पालिका के एक साहब की लखनऊ में खास फर्म है। उसी फर्म से आनन-फानन में तिरंगा लाइटें मंगवा ली गईं। पालिका के बिजली विभाग में स्टिक के बंडलों को काट कर लगाने का काम पालिका के कर्मचारी ही रहे हैं।