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रोजगार में बैंकों का अड़ंगा
ब्यूरो/अमर उजाला,फर्रुखाबाद
Updated Wed, 03 Feb 2016 12:16 AM IST
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फर्रुखाबाद। बेरोजगारों की उम्मीदों पर बैंक शाखाओं ने अड़ंगा लगा दिया है। लोन के लिए 225 आवेदकाें की पत्रावलियां बैंक शाखाओं ने रोक ली हैं। इन आवेदकाें ने उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम लिमिटेड के तहत स्वत: रोजगार के लिए आवेदन किया था।
स्पेशल कंपोनेंट प्लान की स्वत: रोजगार योजना के तहत अनुसूचित जाति के बेरोजगारों को बैंकों के जरिए लोन दिलाया जाता है। लोन की सीमा 50 हजार से 10 लाख रुपये तक है। महकमा लोन पर एक बार में 10 हजार रुपये की सब्सिडी देता है। रोजगार की खातिर लोन पाने के लिए 801 बेरोजगारों ने नवंबर में वित्त विकास निगम को आवेदन किया था।
महकमे ने इन पत्रावलियों को स्वीकृत कर लोन के लिए जिले की 19 बैंक शाखाओं में भेज दिया। इनमें से 330 आवेदकों की पत्रावलियां ही बैंक ने स्वीकृत कीं। इनमें से 274 आवेदकों को निगम ने अनुदान भी जारी कर दिया। खामियों के चलते 246 पत्रावलियां बैंक शाखाआें ने वापस कर दीं। 225 आवेदकों की पत्रावलियाें पर बैंक शाखाएं लोन ही स्वीकृत नहीं कर रही हैं। 31 मार्च तक बैंक शाखाओं ने लोन स्वीकृत नहीं किया तो इनका दावा खारिज हो जाएगा। इससे आवेदक परेशान हैं।
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इनसेट
योजना के तहत 801 आवेदकों का चयन किया गया था। इनकी पत्रावलियां लोन की स्वीकृति के लिए बैंक शाखाआें को भेजी गई थीं। 225 पत्रावलियां बैंकों ने लटका रखी हैं। इसके लिए बैंक शाखाओं को लिखा गया है। - दीन दयाल व्यास, सहायक प्रबंधक, अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम
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स्पेशल कंपोनेंट प्लान की स्वत: रोजगार योजना के तहत अनुसूचित जाति के बेरोजगारों को बैंकों के जरिए लोन दिलाया जाता है। लोन की सीमा 50 हजार से 10 लाख रुपये तक है। महकमा लोन पर एक बार में 10 हजार रुपये की सब्सिडी देता है। रोजगार की खातिर लोन पाने के लिए 801 बेरोजगारों ने नवंबर में वित्त विकास निगम को आवेदन किया था।
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महकमे ने इन पत्रावलियों को स्वीकृत कर लोन के लिए जिले की 19 बैंक शाखाओं में भेज दिया। इनमें से 330 आवेदकों की पत्रावलियां ही बैंक ने स्वीकृत कीं। इनमें से 274 आवेदकों को निगम ने अनुदान भी जारी कर दिया। खामियों के चलते 246 पत्रावलियां बैंक शाखाआें ने वापस कर दीं। 225 आवेदकों की पत्रावलियाें पर बैंक शाखाएं लोन ही स्वीकृत नहीं कर रही हैं। 31 मार्च तक बैंक शाखाओं ने लोन स्वीकृत नहीं किया तो इनका दावा खारिज हो जाएगा। इससे आवेदक परेशान हैं।
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योजना के तहत 801 आवेदकों का चयन किया गया था। इनकी पत्रावलियां लोन की स्वीकृति के लिए बैंक शाखाआें को भेजी गई थीं। 225 पत्रावलियां बैंकों ने लटका रखी हैं। इसके लिए बैंक शाखाओं को लिखा गया है। - दीन दयाल व्यास, सहायक प्रबंधक, अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम