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चुनाव खर्च बचाने के लिए बाइकें बनीं हथियार
अमर उजाला/फर्रुखाबाद
Updated Mon, 13 Feb 2017 11:02 PM IST
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जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे चुनाव प्रचार की सरगर्मियां बढ़ती जा रही हैं। विभिन्न दलों के उम्मीदवार, उनके समर्थक व कार्यकर्ता चुनाव आयोग व जिला प्रशासन की आंख में धूल झोंककर चुनाव प्रचार करने के नए-नए तौरतरीके ईजाद कर रहे हैं।
चुनाव खर्च बचाने के लिए प्रत्याशी बाइकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
पुलिस के बैरियर, सर्विलांस व स्टेटिक मजिस्ट्रेट, सेक्टर मजिस्ट्रेट समेत अन्य निगरानी टीमों से बचने के लिए प्रत्याशियों ने चुनाव प्रचार में लगी टोलियों को बाइकों से क्षेत्र भ्रमण के लिए लगाया है। वहीं यदि चार पहिया का इस्तेमाल करते हैं तो उसमें झंडा, बैनर आदि नहीं लगाते हैं।
झंडा व पंपलेट बाइकों के जरिए गांव तक अपने चहेते के घर तक पहुंचाते हैं। इसके बाद वहां से उठाकर पूरे गांव में घूम-घूमकर बांटते व वोट मांगते हैं। इससे प्रत्याशी चुनाव खर्च बचा रहे हैं।
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फर्रुखाबाद सदर के साथ ही कमालगंज, मोहम्मदाबाद, अमृतपुर, कायमगंज, शमशाबाद, जहानगंज, मेरापुर आदि क्षेत्रों में बाइकों से प्रचार करने वाले गांवों में पहुंचकर सार्वजनिक स्थलों पर बाइकें खड़ी करने के बजाय अपने पहचान वाले के घर के अंदर बाइकें छिपा देते हैं।
इसके बाद पैदल ही पूरे गांव में घूमते हैं।अगले गांव के लिए रवाना होते समय फिर अंदर से बाइक बाहर निकालकर एक-एक करके आगे-पीछे जाते हैं। इससे वे प्रशासन की नजरों से बच जाने में कामयाब हैं।
चुनाव खर्च बचाने के लिए प्रत्याशी बाइकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
पुलिस के बैरियर, सर्विलांस व स्टेटिक मजिस्ट्रेट, सेक्टर मजिस्ट्रेट समेत अन्य निगरानी टीमों से बचने के लिए प्रत्याशियों ने चुनाव प्रचार में लगी टोलियों को बाइकों से क्षेत्र भ्रमण के लिए लगाया है। वहीं यदि चार पहिया का इस्तेमाल करते हैं तो उसमें झंडा, बैनर आदि नहीं लगाते हैं।
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झंडा व पंपलेट बाइकों के जरिए गांव तक अपने चहेते के घर तक पहुंचाते हैं। इसके बाद वहां से उठाकर पूरे गांव में घूम-घूमकर बांटते व वोट मांगते हैं। इससे प्रत्याशी चुनाव खर्च बचा रहे हैं।
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फर्रुखाबाद सदर के साथ ही कमालगंज, मोहम्मदाबाद, अमृतपुर, कायमगंज, शमशाबाद, जहानगंज, मेरापुर आदि क्षेत्रों में बाइकों से प्रचार करने वाले गांवों में पहुंचकर सार्वजनिक स्थलों पर बाइकें खड़ी करने के बजाय अपने पहचान वाले के घर के अंदर बाइकें छिपा देते हैं।
इसके बाद पैदल ही पूरे गांव में घूमते हैं।अगले गांव के लिए रवाना होते समय फिर अंदर से बाइक बाहर निकालकर एक-एक करके आगे-पीछे जाते हैं। इससे वे प्रशासन की नजरों से बच जाने में कामयाब हैं।