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दूसरे दिन भी शिक्षा मित्रों ने किया प्रदर्शन
farrukhabad
Updated Thu, 27 Jul 2017 11:23 PM IST
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प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी करते शिक्षामित्र।
- फोटो : अमर उजाला
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फर्रुखाबाद। सुप्रीम कोर्ट द्वारा समायोजन रद किए जाने के फैसले के खिलाफ शिक्षामित्र दूसरे दिन गुरुवार को भी आंदोलनरत रहे। बीएसए कार्यालय में एकत्र हुए शिक्षामित्रों ने सभा कर शासन-प्रशासन को चेतावनी दी कि कि यदि किसी शिक्षामित्र पर कार्रवाई की गई तो जिला प्रशासन को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष ऋषिपाल यादव ने कहा कि कुछ प्रशासनिक अधिकारियों ने एबीआरसी, एनपीआरसी को बुलाकर आंदोलन करने वाले शिक्षामित्रों को चिह्नित करने की बात कही है। यदि किसी शिक्षामित्र के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई की तो इससे हालात बिगड़ेंगे। उन्होंने बीएसए से खंड शिक्षाधिकारियों को जारी उपस्थिति व अनुपस्थिति की सूचना का आदेश वापस लेने को कहा।
शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अनुराग पांडेय ने कहा कि शिक्षामित्रों की भीड़ में कुछ अराजकतत्व भी माहौल बिगाड़ने के लिए शामिल हो गए। उन्होंने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। सरकार ने चुनावी संकल्प के समय जो बात कही थी, उस पर अमल करे। 3500 रुपये मिलते थे, तब शिक्षामित्र योग्य थे और जब 35000 मिलने लगे तो अयोग्य कैसे हो गए। सरकार ने विचार न किया तो शिक्षामित्रों के परिवार भी आंदोलन में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षामित्रों के मामले की सुनवाई के लिए शासन ने सचिव स्तर के अधिकारी को नियुक्त किया है, जो उन्हें मंजूर नहीं है। शिक्षामंत्री या मुख्यमंत्री स्वयं शिक्षामित्रों से वार्ता करें।
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इस तरह कम हुआ शिक्षामित्रों का गुबार
शिक्षामित्रों के आंदोलन को उग्र होता देख गुरुवार को 10 बजे ही पुलिस और पीएसी बल बीएसए दफ्तर में तैनात कर दिया गया। 10:30 बजे शिक्षामित्र भारी संख्या में एकत्र हो गए तो एसडीएम सदर अजीत सिंह, सीओ सिटी शरदचंद्र शर्मा और सिटी मजिस्ट्रेट रमेशचंद्र यादव भी मौके पर पहुंच गए। एसडीएम सदर ने शिक्षामित्रों को बताया कि जिलाधिकारी 10 शिक्षामित्रों के प्रतिनिधिमंडल से बात करना चाहते हैं। शिक्षामित्र वार्ता के लिए राजी हो गए। एसडीएम सदर के कहने पर उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष ऋषिपाल यादव और अनुराग पांडेय समेत दस शिक्षामित्रों का प्रतिनिधिमंडल डीएम रविंद्र कुमार से मिलने गया। इसके बाद उनका गुबार कम होता गया।
बीएसए को ज्ञापन सौंपा
डीएम से वार्ता के बाद शिक्षामित्रों ने बीएसए संदीप चौधरी को बुलाकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। इसमें शिक्षामित्रों ने कहा कि 1.72 लाख शिक्षामित्रों का रोजगार छिन गया है। उन्होंने भरोसा जताया कि सूबे की सरकार शिक्षामित्रों के हित में पुनर्विचार याचिका दायर करेगी। ज्ञापन में कहा गया कि समान कार्य समान वेतन लागू किया जाए। संविधान में संशोधित करके पदों को सुरक्षित रखा जाए। सरकार की ओर से कोई जवाब न आने तक शिक्षामित्र शांतिपूर्वक आंदोलन करते रहेंगे।
शिक्षण कार्य बंद रहने का दावा
शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष ऋषिपाल और अनुराग पांडेय ने दावा किया कि जिले के 400 स्कूलों में शिक्षण कार्य बंद रहा है। जबकि बीएसए ने कहा कि 170 स्कूलों में कार्य प्रभावित हुआ है। उन्हें खंड शिक्षाधिकारियों से रिपोर्ट प्राप्त हो गई है।
दलगंजन से शिक्षामित्रों की धक्का-मुक्की
शिक्षामित्रों के आंदोलन में पहुंचे पूर्व सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के रिश्तेदार दलगंजन सिंह यादव ने जैसे ही प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर आपत्तिजनक टिप्पणी की तो शिक्षामित्र उखड़ गए और उनसे सभास्थल से वापस चले जाने को कहा। दलगंजन सिंह के वापस न जाने पर शिक्षामित्रों से उनकी जमकर धक्का-मुक्की हुई। शिक्षामित्रों ने चेतावनी दी कि वे अपने आंदोलन में किसी राजनेता की सहभागिता नहीं चाहते हैं।
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प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष ऋषिपाल यादव ने कहा कि कुछ प्रशासनिक अधिकारियों ने एबीआरसी, एनपीआरसी को बुलाकर आंदोलन करने वाले शिक्षामित्रों को चिह्नित करने की बात कही है। यदि किसी शिक्षामित्र के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई की तो इससे हालात बिगड़ेंगे। उन्होंने बीएसए से खंड शिक्षाधिकारियों को जारी उपस्थिति व अनुपस्थिति की सूचना का आदेश वापस लेने को कहा।
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शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अनुराग पांडेय ने कहा कि शिक्षामित्रों की भीड़ में कुछ अराजकतत्व भी माहौल बिगाड़ने के लिए शामिल हो गए। उन्होंने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। सरकार ने चुनावी संकल्प के समय जो बात कही थी, उस पर अमल करे। 3500 रुपये मिलते थे, तब शिक्षामित्र योग्य थे और जब 35000 मिलने लगे तो अयोग्य कैसे हो गए। सरकार ने विचार न किया तो शिक्षामित्रों के परिवार भी आंदोलन में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षामित्रों के मामले की सुनवाई के लिए शासन ने सचिव स्तर के अधिकारी को नियुक्त किया है, जो उन्हें मंजूर नहीं है। शिक्षामंत्री या मुख्यमंत्री स्वयं शिक्षामित्रों से वार्ता करें।
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इस तरह कम हुआ शिक्षामित्रों का गुबार
शिक्षामित्रों के आंदोलन को उग्र होता देख गुरुवार को 10 बजे ही पुलिस और पीएसी बल बीएसए दफ्तर में तैनात कर दिया गया। 10:30 बजे शिक्षामित्र भारी संख्या में एकत्र हो गए तो एसडीएम सदर अजीत सिंह, सीओ सिटी शरदचंद्र शर्मा और सिटी मजिस्ट्रेट रमेशचंद्र यादव भी मौके पर पहुंच गए। एसडीएम सदर ने शिक्षामित्रों को बताया कि जिलाधिकारी 10 शिक्षामित्रों के प्रतिनिधिमंडल से बात करना चाहते हैं। शिक्षामित्र वार्ता के लिए राजी हो गए। एसडीएम सदर के कहने पर उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष ऋषिपाल यादव और अनुराग पांडेय समेत दस शिक्षामित्रों का प्रतिनिधिमंडल डीएम रविंद्र कुमार से मिलने गया। इसके बाद उनका गुबार कम होता गया।
बीएसए को ज्ञापन सौंपा
डीएम से वार्ता के बाद शिक्षामित्रों ने बीएसए संदीप चौधरी को बुलाकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। इसमें शिक्षामित्रों ने कहा कि 1.72 लाख शिक्षामित्रों का रोजगार छिन गया है। उन्होंने भरोसा जताया कि सूबे की सरकार शिक्षामित्रों के हित में पुनर्विचार याचिका दायर करेगी। ज्ञापन में कहा गया कि समान कार्य समान वेतन लागू किया जाए। संविधान में संशोधित करके पदों को सुरक्षित रखा जाए। सरकार की ओर से कोई जवाब न आने तक शिक्षामित्र शांतिपूर्वक आंदोलन करते रहेंगे।
शिक्षण कार्य बंद रहने का दावा
शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष ऋषिपाल और अनुराग पांडेय ने दावा किया कि जिले के 400 स्कूलों में शिक्षण कार्य बंद रहा है। जबकि बीएसए ने कहा कि 170 स्कूलों में कार्य प्रभावित हुआ है। उन्हें खंड शिक्षाधिकारियों से रिपोर्ट प्राप्त हो गई है।
दलगंजन से शिक्षामित्रों की धक्का-मुक्की
शिक्षामित्रों के आंदोलन में पहुंचे पूर्व सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के रिश्तेदार दलगंजन सिंह यादव ने जैसे ही प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर आपत्तिजनक टिप्पणी की तो शिक्षामित्र उखड़ गए और उनसे सभास्थल से वापस चले जाने को कहा। दलगंजन सिंह के वापस न जाने पर शिक्षामित्रों से उनकी जमकर धक्का-मुक्की हुई। शिक्षामित्रों ने चेतावनी दी कि वे अपने आंदोलन में किसी राजनेता की सहभागिता नहीं चाहते हैं।