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Farrukhabad News: डॉक्टर व स्टाफ नर्स मिलीं, फिर भी गंभीर बच्चों को इलाज का इंतजार

Mon, 11 Nov 2024 11:53 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 11 Nov 2024 11:53 PM IST
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Doctors and staff nurses were found, yet serious children were waiting for treatment.
फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल में एक माह से ऊपर के बच्चों को उपचार देने के लिए आधुनिक मशीनों से सुसज्जित 42 बेड का वार्ड बनकर तैयार है। अस्पताल को जल्द में कुछ डॉक्टर और स्टाफ भी मिले, मगर अभी भी वार्ड में ताले पड़े होने से गंभीर बच्चों को अच्छे इलाज का इंतजार है। इमरजेंसी के पीडियाट्रिक वार्ड में सिर्फ सात बेड हैं। गंभीर बच्चे को रेफर कर दिया जाता है।
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इसी प्रकार अस्पताल में पानी की टंकी के पास कर्मचारी आवासों के किनारे 10 बेड के आईसीयू सुविधा के साथ अन्य आधुनिक मशीनों से लैस वार्ड बनकर तैयार है। इसमें मशीनें और बेड भी लगा दिए गए हैं। अक्तूबर की शुरुआत में काम शुरू होने से गंभीर बच्चों को अच्छा इलाज मिलने की उम्मीद बंधी, मगर इसके बाद फिर ताले डाल दिए गए। अक्तूबर के अंतिम सप्ताह में लोहिया अस्पताल में विभिन्न योजनाओं के तहत तीन-तीन डॉक्टर, स्टाफ नर्स व डाटा इंट्री ऑपरेटरों की तैनाती की गई। इसके बावजूद इस वार्ड को शुरू करने की जरूरत नहीं समझी गई।
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इमरजेंसी में खुले सात बेड के पीडियाट्रिक वार्ड में बच्चों के लिए ऑक्सीजन के अलावा मॉनीटर तक की सुविधा नहीं है। ऐसे में गंभीर बच्चों को ईएमओ और बालरोग विशेषज्ञ सबसे पहले रेफर कर देते हैं। लिहाजा दूरदराज से आए गरीबों को निजी अस्पतालों में मोटी रकम खर्च करके इलाज करवाना पड़ रहा है।
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लोहिया के संविदा डॉक्टर निजी अस्पतालों में करते इलाज
लोहिया अस्पताल में संविदा पर तैनात बालरोग विशेषज्ञ निजी अस्पतालों में भर्ती बच्चों का इलाज करने जाते हैं। इसका राउंडवार भुगतान लेते हैं। जबकि यदि यहीं मशीन युक्त वार्ड खुल जाए, तो गरीबों का निशुल्क अच्छा इलाज हो सके।

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-वार्ड चालू करने के लिए आठ स्टाफ, आठ वार्ड बॉय और इतने ही स्वीपर चाहिए। अस्पताल में तैनात बालरोग विशेषज्ञों से काम चल जाएगा। वह कई बार स्टाफ की मांग कर चुके हैं। जब तक मैन पावर नहीं मिलेगा, वार्ड का संचालन नहीं हो सकता। संविदा डॉक्टर अस्पताल में ड्यूटी खत्म कर प्रैक्टिस कर सकते हैं।
-डॉ. अशोक प्रियदर्शी, सीएमएस, लोहिया पुरुष अस्पताल
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