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कमेटी में गुटबाजी से जुलूस-ए-मोहम्मदी पर संकट
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फर्रुखाबाद। सीरत कमेटी में आपसी गुटबाजी के चलते जुलूस-ए-मोहम्मदी पर संकट गहरा गया है। एक माह पहले शुरू होने वाली तैयारियां भी ठप पड़ी हैं। इससे मुस्लिम समाज के लोगों में असमंजस है। हालांकि कोरोना के समय दो साल तक जुलूस नहीं निकल सका था।
बारावफात के मौके पर हर साल सीरत कमेटी शान-ओ-शौकत से जुलूस-ए-मोहम्मदी निकालती रही है। तीन साल से कमेटी में आपसी गुटबाजी के चलते खींचतान बनी हुई है। दो साल पहले मौलाना शमशाद अहमद चतुर्वेदी ने कमेटी को एकजुट किया था।
सहमति से कमेटी का सदर सलीम हैदर और सेक्रेटरी कारी मुख्तार अहमद को बना दिया था, लेकिन कुछ दिन बाद ही दूसरे गुट ने इन पदाधिकारियों को नकार दिया। कमेटी के सदर और सेक्रेटरी के चुनाव को लेकर ही सबसे बड़ा विवाद है।
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पुरानी कमेटी के सेक्रेटरी कारी मुख्तार अहमद ने बताया कि लोगों से बात करेंगे। जुलूस-ए-मोहम्मदी तो निकाला जाएगा। नई कमेटी को तैयार करने की बात चल रही है।
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बारावफात के मौके पर हर साल सीरत कमेटी शान-ओ-शौकत से जुलूस-ए-मोहम्मदी निकालती रही है। तीन साल से कमेटी में आपसी गुटबाजी के चलते खींचतान बनी हुई है। दो साल पहले मौलाना शमशाद अहमद चतुर्वेदी ने कमेटी को एकजुट किया था।
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सहमति से कमेटी का सदर सलीम हैदर और सेक्रेटरी कारी मुख्तार अहमद को बना दिया था, लेकिन कुछ दिन बाद ही दूसरे गुट ने इन पदाधिकारियों को नकार दिया। कमेटी के सदर और सेक्रेटरी के चुनाव को लेकर ही सबसे बड़ा विवाद है।
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पुरानी कमेटी के सेक्रेटरी कारी मुख्तार अहमद ने बताया कि लोगों से बात करेंगे। जुलूस-ए-मोहम्मदी तो निकाला जाएगा। नई कमेटी को तैयार करने की बात चल रही है।