{"_id":"5c894adebdec22144f416b58","slug":"the-district-jail-captive-keeper-was-found-hanging-body-in-farrukhabad","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिला जेल के बंदी रक्षक का फंदे पर लटका मिला शव","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
जिला जेल के बंदी रक्षक का फंदे पर लटका मिला शव
Wed, 13 Mar 2019 11:54 PM IST
मनोज कुमार
farrukhabad
farrukhabad
Published by: मनोज कुमार
Updated Wed, 13 Mar 2019 11:54 PM IST
विज्ञापन
hang
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिला जेल के बंदी रक्षक का शव सरकारी आवास के किचन में बुधवार सुबह फंदे पर लटकता मिला। आवास का दरवाजा खुला था। ड्यूटी से लौटे साथी ने शव देखकर जेलर को सूचना दी। बंदी रक्षक चार माह से अनुपस्थित चल रहा था। मंगलवार को ही घर से लौटा था। वहीं, परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया है।
फतेहगढ़ की जिला जेल में तैनात बंदीरक्षक जनपद हाथरस थाना सहपऊ तहसील सादाबाद क्षेत्र के गांव राजनगर कला निवासी रीतिराम सिंह (49) पिछले चार माह से अनुपस्थित चल रहे थे। मंगलवार शाम वह घर से जेल गेट के निकट अपने आवास संख्या 37/टी1 में पहुंचे। पास में ही 39 नंबर के आवास में रह रहे साथी बंदी रक्षक झांसी निवासी अभिषेक के साथ रात करीब 9.30 बजे खाना खाया। इसके बाद अभिषेक रात 12 से चार बजे की ड्यूटी करने चले गए। पड़ोसी आवास संख्या 38 निवासी बंदीरक्षक महेश सिंह प्रात: चार से सुबह आठ बजे की ड्यूटी करने के बाद 8.30 बजे आवास पर पहुंचे। उन्हें रीतिराम के आवास का दरवाजा खुला मिला, अंदर देखा तो किचन में उनका शव छत के कुंडे में मफलर से लटका था। दोनों पैर फर्श पर और घुटने मुड़े थे। पास में ही चप्पल भी रखी थी।
महेश सिंह ने बंदी रक्षक अभिषेक को आवाज देकर जगाने के साथ तत्काल जेल पहुंचकर जेलर जीएस यादव को घटना की जानकारी दी। जेलर की सूचना पर करीब आधा घंटे बाद फतेहगढ़ कोतवाली के दरोगा नरेंद्र सिंह फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। पड़ोसी बंदी रक्षकों से पूछताछ की। मफलर काटकर शव उतारा गया। फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए। तलाशी में रीतिराम की शर्ट की जेब से सुसाइड नोट मिला। इसमें अपनी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया। पर, उसमें तारीख सही और सन 2018 लिखा है।
विज्ञापन
रीतिराम का परिवार जनपद मथुरा थाना मिर्जापुर क्षेत्र की शाकुंज कालोनी में रहता है। फोन पर रीतिराम के पुत्र अजीत ने बताया कि उनके पिता सुसाइड नहीं कर सकते। वहीं, पत्नी संगीता ने तीन लोगों का नाम लेते हुए उत्पीड़न व हत्या किए जाने का भी आरोप लगाया है। कहा कि उन लोगों ने पति को जुआ खेलने व शराब पीने के लिए 10 प्रतिशत मासिक ब्याज पर उधार रुपये दिए थे। तगादा करने के साथ सूदखोर ड्यूटी भी नहीं करने देते थे। सुबह सात बजे उनकी रीतिराम से फोन पर बात हुई थी। इसके बाद उन्होंने आठ बजे फोन किया तो काल रिसीव नहीं हुई।
विज्ञापन
फतेहगढ़ की जिला जेल में तैनात बंदीरक्षक जनपद हाथरस थाना सहपऊ तहसील सादाबाद क्षेत्र के गांव राजनगर कला निवासी रीतिराम सिंह (49) पिछले चार माह से अनुपस्थित चल रहे थे। मंगलवार शाम वह घर से जेल गेट के निकट अपने आवास संख्या 37/टी1 में पहुंचे। पास में ही 39 नंबर के आवास में रह रहे साथी बंदी रक्षक झांसी निवासी अभिषेक के साथ रात करीब 9.30 बजे खाना खाया। इसके बाद अभिषेक रात 12 से चार बजे की ड्यूटी करने चले गए। पड़ोसी आवास संख्या 38 निवासी बंदीरक्षक महेश सिंह प्रात: चार से सुबह आठ बजे की ड्यूटी करने के बाद 8.30 बजे आवास पर पहुंचे। उन्हें रीतिराम के आवास का दरवाजा खुला मिला, अंदर देखा तो किचन में उनका शव छत के कुंडे में मफलर से लटका था। दोनों पैर फर्श पर और घुटने मुड़े थे। पास में ही चप्पल भी रखी थी।
विज्ञापन
महेश सिंह ने बंदी रक्षक अभिषेक को आवाज देकर जगाने के साथ तत्काल जेल पहुंचकर जेलर जीएस यादव को घटना की जानकारी दी। जेलर की सूचना पर करीब आधा घंटे बाद फतेहगढ़ कोतवाली के दरोगा नरेंद्र सिंह फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। पड़ोसी बंदी रक्षकों से पूछताछ की। मफलर काटकर शव उतारा गया। फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए। तलाशी में रीतिराम की शर्ट की जेब से सुसाइड नोट मिला। इसमें अपनी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया। पर, उसमें तारीख सही और सन 2018 लिखा है।
विज्ञापन
रीतिराम का परिवार जनपद मथुरा थाना मिर्जापुर क्षेत्र की शाकुंज कालोनी में रहता है। फोन पर रीतिराम के पुत्र अजीत ने बताया कि उनके पिता सुसाइड नहीं कर सकते। वहीं, पत्नी संगीता ने तीन लोगों का नाम लेते हुए उत्पीड़न व हत्या किए जाने का भी आरोप लगाया है। कहा कि उन लोगों ने पति को जुआ खेलने व शराब पीने के लिए 10 प्रतिशत मासिक ब्याज पर उधार रुपये दिए थे। तगादा करने के साथ सूदखोर ड्यूटी भी नहीं करने देते थे। सुबह सात बजे उनकी रीतिराम से फोन पर बात हुई थी। इसके बाद उन्होंने आठ बजे फोन किया तो काल रिसीव नहीं हुई।