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प्राचीन मूर्तियों के स्थान परिवर्तन पर झगड़ा
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Tue, 05 May 2015 11:32 PM IST
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कायमगंज में जैन मंदिर में दो सौ साल पुरानी मूर्तियों की जगह बदलने को
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लेकर जैन समाज के लोग आपस में बी लड़ पड़े। मारपीट की नौबत पर पुलिस को
सूचना दी गई तो एसडीएम और प्रभारी निरीक्षक पहुंच गए। इन्होंने दोनों
पक्षों को शांत कराया। तनाव को देखते हुए मंदिर पर पुलिस तैनात कर दी गई।
पुलिस ने दोनों ओर से 21 लोगों के खिलाफ शांतिभंग के आरोप में कार्रवाई की
है।
जैन मंदिर में 2 से 4 मई तक श्री दिगंबर जैन महावीर महिला परिषद के तत्वावधान में वेदी प्रतिष्ठा एवं कलशारोहण महोत्सव का आयोजन किया गया था। यहां पार्श्वनाथ की मूर्ति और नई वेदी की स्थापना की गई थी। इसमें जैन समुदाय के कुछ परिवार शामिल नहीं हुए थे। सोमवार को समारोह के अंतिम दिन शोभायात्रा के बाद पार्श्वनाथ की मूर्ति स्थापना कार्यक्रम संपन्न हुआ था। इसी दौरान आयोजकों ने मंदिर में दो सौ साल पहले स्थापित संभवनाथ की मूर्ति को मूल स्थान
से हटाकर मंदिर की मुख्य वेदी (जहां भगवान महावीर की मूर्ति लगी थी) पर स्थापित करा दिया। महावीर की मूर्ति को संभवनाथ के स्थान पर लगवा दिया। सुबह इसका पता चलने पर समाज के लोग मंदिर पहुंच गए। इन्होंने मूर्ति का स्थान बदलने का विरोध किया। मूर्ति का स्थान बदलवाने वाले हर्षवर्धन जैन, राजकपूर जैन, नरेश चंद्र जैन आदि तथा दूसरे पक्ष की ओर से अशोक जैन, विपिन जैन, अभय जैन, कमलेश जैन, कपिल जैन के बीच विवाद शुरू हो गया। बात मारपीट तक
पहुंच गई। सूचना पाकर एसडीएम बीडी वर्मा मौके पर पहुंचे । इनके सामने भी दोनों पक्ष झगड़े पर उतारू हो गए। एसडीएम की सूचना पर प्रभारी निरीक्षक रूम सिंह यादव दलबल सहित पहुंच गए। एसडीएम ने दोनों पक्षों को तहसील बुलाया। मंदिर पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
दोनों पक्षों का ये है कहना
मंदिर कमेटी का कहना था कि मंदिर में सोमवार को हुई मूर्ति स्थापना राजकपूर व इनके समर्थकों का व्यक्तिगत कार्यक्रम था। इसमें कई परिवार शामिल नहीं हुए थे। उन्हें सिर्फ पार्श्वनाथ की मूर्ति की स्थापना करनी थी। उन्होंने बिना किसी सूचना के प्राचीन मूर्ति का स्थान बदल दिया। वहीं राजकपूर और हर्षवर्धन आदि कहना है कि मूर्ति का स्थान बदलने की जानकारी एक साल पहले ही समाज के सभी लोगों को दे दी गई थी। कार्यक्रम में भी सभी को आमंत्रित किया गया था। बताया कि
गुरुजी के कहने पर ही संभवनाथ की मूर्ति का स्थान बदला गया है। जैन समाज के अधिकांश लोग मूर्तियों के स्थान परिवर्तन के खिलाफ नजर आए। कई लोगों ने विवाद निपटाने का प्रयास किया लेकिन समझौते की स्थिति न बन सकी। इस पर पुलिस ने दोनों पक्षों की ओर से 21 लोगों को शांतिभग की धारा में पाबंद कर दिया।
जैन मंदिर में 2 से 4 मई तक श्री दिगंबर जैन महावीर महिला परिषद के तत्वावधान में वेदी प्रतिष्ठा एवं कलशारोहण महोत्सव का आयोजन किया गया था। यहां पार्श्वनाथ की मूर्ति और नई वेदी की स्थापना की गई थी। इसमें जैन समुदाय के कुछ परिवार शामिल नहीं हुए थे। सोमवार को समारोह के अंतिम दिन शोभायात्रा के बाद पार्श्वनाथ की मूर्ति स्थापना कार्यक्रम संपन्न हुआ था। इसी दौरान आयोजकों ने मंदिर में दो सौ साल पहले स्थापित संभवनाथ की मूर्ति को मूल स्थान
से हटाकर मंदिर की मुख्य वेदी (जहां भगवान महावीर की मूर्ति लगी थी) पर स्थापित करा दिया। महावीर की मूर्ति को संभवनाथ के स्थान पर लगवा दिया। सुबह इसका पता चलने पर समाज के लोग मंदिर पहुंच गए। इन्होंने मूर्ति का स्थान बदलने का विरोध किया। मूर्ति का स्थान बदलवाने वाले हर्षवर्धन जैन, राजकपूर जैन, नरेश चंद्र जैन आदि तथा दूसरे पक्ष की ओर से अशोक जैन, विपिन जैन, अभय जैन, कमलेश जैन, कपिल जैन के बीच विवाद शुरू हो गया। बात मारपीट तक
पहुंच गई। सूचना पाकर एसडीएम बीडी वर्मा मौके पर पहुंचे । इनके सामने भी दोनों पक्ष झगड़े पर उतारू हो गए। एसडीएम की सूचना पर प्रभारी निरीक्षक रूम सिंह यादव दलबल सहित पहुंच गए। एसडीएम ने दोनों पक्षों को तहसील बुलाया। मंदिर पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
दोनों पक्षों का ये है कहना
मंदिर कमेटी का कहना था कि मंदिर में सोमवार को हुई मूर्ति स्थापना राजकपूर व इनके समर्थकों का व्यक्तिगत कार्यक्रम था। इसमें कई परिवार शामिल नहीं हुए थे। उन्हें सिर्फ पार्श्वनाथ की मूर्ति की स्थापना करनी थी। उन्होंने बिना किसी सूचना के प्राचीन मूर्ति का स्थान बदल दिया। वहीं राजकपूर और हर्षवर्धन आदि कहना है कि मूर्ति का स्थान बदलने की जानकारी एक साल पहले ही समाज के सभी लोगों को दे दी गई थी। कार्यक्रम में भी सभी को आमंत्रित किया गया था। बताया कि
गुरुजी के कहने पर ही संभवनाथ की मूर्ति का स्थान बदला गया है। जैन समाज के अधिकांश लोग मूर्तियों के स्थान परिवर्तन के खिलाफ नजर आए। कई लोगों ने विवाद निपटाने का प्रयास किया लेकिन समझौते की स्थिति न बन सकी। इस पर पुलिस ने दोनों पक्षों की ओर से 21 लोगों को शांतिभग की धारा में पाबंद कर दिया।