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धधक रहीं मिलावटी खोया बनाने की भट्ठियां
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फर्रुखाबाद। होली को देखते हुए मिलावटी खोया की आपूर्ति बढ़ गई है। जिला खाद्य एवं सुरक्षा विभाग की छापेमारी के बावजूद मिलावटी खोया खूब आ रहा है। राजेपुर और शमसाबाद क्षेत्र में मिलावटी खोया बनाने की भट्ठियां धधक रही हैं।
होली पर हर घर में गुझिया बनाए जाने की परंपरा है और इस त्योहार में महज तीन दिन ही शेष रह गए हैं। इसको लेकर बाजार में खोया की मांग बढ़ने लगी है। इसका लाभ उठाकर व्यापारी मिलावटी खोया सप्लाई करने में लगे हैं। शहर क्षेत्र में त्रिपोलिया चौक खोया की मुख्य मंडी है। इसके अलावा कमालगंज में भी खोया की बड़ी मंडी है। इन दोनों मंडियों में मिलावटी खोया की खेप जारी है।
जिला खाद्य एवं सुरक्षा विभाग के अधिकारी छापेमारी तो कर रहे हैं लेकिन अभी तक मिलावटी खोया के किसी बड़े कारोबारी को नहीं पकड़ सकी है। मोटा मुनाफा कमाने के चक्कर में त्योहारों पर मिलावटी खोया की तेजी से आपूर्ति की जाती है। राजेपुर क्षेत्र और शमसाबाद क्षेत्र के कई गांवों में मिलावटी खोया बनाया जा रहा है और इसकी आपूर्ति खोया व्यापारियों को की जा रही है। हालांकि जिला खाद्य एवं सुरक्षा विभाग की टीम खोया मंडी में छापेमारी कर रही है लेकिन इसके बावजूद इसकी रोकथाम पूरी तरह से नहीं हो पा रही है। होली से तीन-चार दिन पहले क्विंटलों में इसकी खपत होती है। लोग सिंथेटिक और असली खोया की पहचान भी नहीं कर पाते हैं। इसके चलते मिलावटी खोया बड़ी ही आसानी से बिक जाता है।
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असली खोया की पहचान
सिंथेटिक खोया उंगलियों में रगड़ने पर सूख जाएगा, जबकि असली खोया चिकनाई छोड़ेगा। सिंथेटिक खोया में आयोडिन व टिंचर लगाने पर वह काला पड़ जाएगा, जबकि असली खोया में इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। सर्दियों में सिंथेटिक खोया बनाने में रिफाइंड और गर्मियों में डालडा का प्रयोग होता है। सिंथेटिक खोया से मिल्क केक नहीं बनता है।
ऐसे बनता है सिंथेटिक खोया
एक खोया व्यापारी ने बताया कि एक किलो सिंथेटिक खोया बनाने में आधा किलो दूध पाउडर, 100 ग्राम डालडा, मीठापन लाने के लिए करीब 20 से 30 ग्राम चीनी पड़ती है। इसके अलावा आलू, मैदा व शकरकंद का भी उपयोग होता है। एक किलो सिंथेटिक खोया बनाने में करीब 130 रुपये का खर्च आता है। होली पर नकली खोया 200 से 230 रुपये किलो तक बिकता है।
लगातार कर रहे छापेमारी
मिलावटी खोया पकड़ने के लिए छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है। रविवार को ही त्रिपोलिया चौक स्थित खोया मंडी में छापा मारकर करीब 60 किलो नकली मिलावटी खोया नष्ट कर दिया। चेकिंग अभियान लगातार जारी रहेगा। - सतीश कुमार (जिला अभिहित अधिकारी)
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होली पर हर घर में गुझिया बनाए जाने की परंपरा है और इस त्योहार में महज तीन दिन ही शेष रह गए हैं। इसको लेकर बाजार में खोया की मांग बढ़ने लगी है। इसका लाभ उठाकर व्यापारी मिलावटी खोया सप्लाई करने में लगे हैं। शहर क्षेत्र में त्रिपोलिया चौक खोया की मुख्य मंडी है। इसके अलावा कमालगंज में भी खोया की बड़ी मंडी है। इन दोनों मंडियों में मिलावटी खोया की खेप जारी है।
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जिला खाद्य एवं सुरक्षा विभाग के अधिकारी छापेमारी तो कर रहे हैं लेकिन अभी तक मिलावटी खोया के किसी बड़े कारोबारी को नहीं पकड़ सकी है। मोटा मुनाफा कमाने के चक्कर में त्योहारों पर मिलावटी खोया की तेजी से आपूर्ति की जाती है। राजेपुर क्षेत्र और शमसाबाद क्षेत्र के कई गांवों में मिलावटी खोया बनाया जा रहा है और इसकी आपूर्ति खोया व्यापारियों को की जा रही है। हालांकि जिला खाद्य एवं सुरक्षा विभाग की टीम खोया मंडी में छापेमारी कर रही है लेकिन इसके बावजूद इसकी रोकथाम पूरी तरह से नहीं हो पा रही है। होली से तीन-चार दिन पहले क्विंटलों में इसकी खपत होती है। लोग सिंथेटिक और असली खोया की पहचान भी नहीं कर पाते हैं। इसके चलते मिलावटी खोया बड़ी ही आसानी से बिक जाता है।
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असली खोया की पहचान
सिंथेटिक खोया उंगलियों में रगड़ने पर सूख जाएगा, जबकि असली खोया चिकनाई छोड़ेगा। सिंथेटिक खोया में आयोडिन व टिंचर लगाने पर वह काला पड़ जाएगा, जबकि असली खोया में इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। सर्दियों में सिंथेटिक खोया बनाने में रिफाइंड और गर्मियों में डालडा का प्रयोग होता है। सिंथेटिक खोया से मिल्क केक नहीं बनता है।
ऐसे बनता है सिंथेटिक खोया
एक खोया व्यापारी ने बताया कि एक किलो सिंथेटिक खोया बनाने में आधा किलो दूध पाउडर, 100 ग्राम डालडा, मीठापन लाने के लिए करीब 20 से 30 ग्राम चीनी पड़ती है। इसके अलावा आलू, मैदा व शकरकंद का भी उपयोग होता है। एक किलो सिंथेटिक खोया बनाने में करीब 130 रुपये का खर्च आता है। होली पर नकली खोया 200 से 230 रुपये किलो तक बिकता है।
लगातार कर रहे छापेमारी
मिलावटी खोया पकड़ने के लिए छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है। रविवार को ही त्रिपोलिया चौक स्थित खोया मंडी में छापा मारकर करीब 60 किलो नकली मिलावटी खोया नष्ट कर दिया। चेकिंग अभियान लगातार जारी रहेगा। - सतीश कुमार (जिला अभिहित अधिकारी)