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जिले में कोरोना संक्रमण से 28 मौतों पर एडी गंभीर
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corona
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। कोरोना से जिले में 27 मौतें हो गईं, अगर इनको समय से इलाज मिल जाता तो जान बच जाती। निजी अस्पतालों ने भी कोरोना की रोकथाम के लिए सहयोग नहीं किया। यह बात अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा कानपुर मंडल (एडी)डॉ. आरपी यादव ने कही।
एडी गुरुवार दोपहर सीएमओ कार्यालय पहुंचे। उन्होंने सीएमओ डॉ. वंदना सिंह, डिप्टी सीएमओ डा. राजीव शाक्य, एसीएमओ डा. दलवीर सिंह व अन्य डाक्टरों के साथ कोविड-19 में स्वास्थ्य सेवा की समीक्षा की। एडी ने कोरोना से जिले में हुई मौतों पर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि लक्ष्य के सापेक्ष जो प्रतिदिन 1000 जांचें की जा रही हैं, उनमें सुधार की जरूरत है। जांच ऐसे लोगों की हो, जिनके संक्रमित होने की अधिक आशंका हो। जिससे उन्हें समय से इलाज मिले और अनहोनी रोकी जा सके।
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मार्च से चल रही तैयारियों के बावजूद अब तक जिले में एल-2 अस्पताल चालू नहीं हो सका। इस सवाल के जवाब में एडी ने कहा कि तैयारी पूरी की जा रही है। पांच वेंटीलेटर का आईसीयू होगा। निजी डाक्टरों से सहयोग लिया जा सकता है।
अपर निदेशक ने कहा कि जिले में निजी अस्पतालों की संख्या अधिक है, लेकिन कोविड-19 में शासन के निर्देश पर भी डाक्टर सहयोग को आगे नहीं आया। निजी अस्पताल संभावित संक्रमित मरीजों की रिपोर्टिंग भी नहीं कर रहे हैं।
जनप्रतिनिधियों की निधि से स्वास्थ्य विभाग में मनमानी कीमत पर खरीदे गए मास्क व सैनिटाइजर की जांच में लीपापोती कर क्लीनचिट दे दी गई थी। लखनऊ की कंपनी से मास्क की आपूर्ति से पहले बिल मंगा लिए गए।
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एडी गुरुवार दोपहर सीएमओ कार्यालय पहुंचे। उन्होंने सीएमओ डॉ. वंदना सिंह, डिप्टी सीएमओ डा. राजीव शाक्य, एसीएमओ डा. दलवीर सिंह व अन्य डाक्टरों के साथ कोविड-19 में स्वास्थ्य सेवा की समीक्षा की। एडी ने कोरोना से जिले में हुई मौतों पर चिंता जताई।
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उन्होंने कहा कि लक्ष्य के सापेक्ष जो प्रतिदिन 1000 जांचें की जा रही हैं, उनमें सुधार की जरूरत है। जांच ऐसे लोगों की हो, जिनके संक्रमित होने की अधिक आशंका हो। जिससे उन्हें समय से इलाज मिले और अनहोनी रोकी जा सके।
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मार्च से चल रही तैयारियों के बावजूद अब तक जिले में एल-2 अस्पताल चालू नहीं हो सका। इस सवाल के जवाब में एडी ने कहा कि तैयारी पूरी की जा रही है। पांच वेंटीलेटर का आईसीयू होगा। निजी डाक्टरों से सहयोग लिया जा सकता है।
अपर निदेशक ने कहा कि जिले में निजी अस्पतालों की संख्या अधिक है, लेकिन कोविड-19 में शासन के निर्देश पर भी डाक्टर सहयोग को आगे नहीं आया। निजी अस्पताल संभावित संक्रमित मरीजों की रिपोर्टिंग भी नहीं कर रहे हैं।
जनप्रतिनिधियों की निधि से स्वास्थ्य विभाग में मनमानी कीमत पर खरीदे गए मास्क व सैनिटाइजर की जांच में लीपापोती कर क्लीनचिट दे दी गई थी। लखनऊ की कंपनी से मास्क की आपूर्ति से पहले बिल मंगा लिए गए।