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स्ट्रीट वेंडर रजिस्ट्रेशन में दलाल कर रहे उगाही
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स्ट्रीट वेंडरों के रजिस्ट्रेशन में हो रही उगाही
फर्रुखाबाद। नगर पालिका परिषद में रजिस्ट्रेशन कराना स्ट्रीट वेंडरों के लिए मुसीबत वाला काम साबित हो रहा है। कई-कई दिन काम बंद करके भीड़ में लगकर आगे पहुंचने के बाद फिर फार्म में कमी बताकर वापस कर दिया जाता है। इसका लाभ कुछ सक्रिय दलाल उठा रहे हैं। कुछ वेंडरों से निर्धारित शुल्क से कई गुना ज्यादा पैसा ले लिया गया। बावजूद इसके अभी तक पात्र परेशान घूम रहे हैं।
सोशल डिस्टेंस का पालन नहीं
वेंडर रजिस्ट्रेशन में बेशुमार भीड़ उमड़ रही है। सैकड़ों लोग बिना किसी सोशल डिस्टेंस से एक दूसरे से सटकर खड़े हो रहे हैं। पालिका के अधिकारी भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
तीन हजार पंजीकरण, एक हजार लोन आवेदन
अभी तक तीन हजार वेंडरों का पंजीकरण कराया जा चुका है। इनमें से एक हजार फार्म लोन के लिए आए हैं। शीघ्र ही बैंक जांच के बाद लोन देना शुरू करेंगे। लक्ष्य आठ हजार से अधिक का है।
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सिर्फ 70 रुपये है सरकारी खर्च
ईओ रविंद्र कुमार ने बताया कि ऑनलाइन फीडिंग का सरकारी शुल्क 50 रुपये, 20 रुपये जीएसटी मिलाकर 70 रुपये निर्धारित है। इससे अधिक कोई ले रहा है, तो वह बाहरी व्यक्ति होगा। कई बार माइक से एनाउंस करवा चुके हैं। वह कर्मियों को लगाकर अधिक रुपये लेने वालों का पकड़ने की कोशिश करेंगे। पीड़ित पहचान ले, तो वह उस पर अपने स्तर से कार्रवाई कर देंगे।
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फर्रुखाबाद। नगर पालिका परिषद में रजिस्ट्रेशन कराना स्ट्रीट वेंडरों के लिए मुसीबत वाला काम साबित हो रहा है। कई-कई दिन काम बंद करके भीड़ में लगकर आगे पहुंचने के बाद फिर फार्म में कमी बताकर वापस कर दिया जाता है। इसका लाभ कुछ सक्रिय दलाल उठा रहे हैं। कुछ वेंडरों से निर्धारित शुल्क से कई गुना ज्यादा पैसा ले लिया गया। बावजूद इसके अभी तक पात्र परेशान घूम रहे हैं।
सोशल डिस्टेंस का पालन नहीं
वेंडर रजिस्ट्रेशन में बेशुमार भीड़ उमड़ रही है। सैकड़ों लोग बिना किसी सोशल डिस्टेंस से एक दूसरे से सटकर खड़े हो रहे हैं। पालिका के अधिकारी भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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तीन हजार पंजीकरण, एक हजार लोन आवेदन
अभी तक तीन हजार वेंडरों का पंजीकरण कराया जा चुका है। इनमें से एक हजार फार्म लोन के लिए आए हैं। शीघ्र ही बैंक जांच के बाद लोन देना शुरू करेंगे। लक्ष्य आठ हजार से अधिक का है।
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सिर्फ 70 रुपये है सरकारी खर्च
ईओ रविंद्र कुमार ने बताया कि ऑनलाइन फीडिंग का सरकारी शुल्क 50 रुपये, 20 रुपये जीएसटी मिलाकर 70 रुपये निर्धारित है। इससे अधिक कोई ले रहा है, तो वह बाहरी व्यक्ति होगा। कई बार माइक से एनाउंस करवा चुके हैं। वह कर्मियों को लगाकर अधिक रुपये लेने वालों का पकड़ने की कोशिश करेंगे। पीड़ित पहचान ले, तो वह उस पर अपने स्तर से कार्रवाई कर देंगे।