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Farrukhabad News: ...चेतक योद्धा बन गया और मुगलों को घोड़ा बना दिया
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फोटो-37 भारतीय पाठशाला में कविता पाठ करते अजय अंजाम। संवाद
फर्रुखाबाद। स्वच्छ अभियान जागरूकता की मंशा से नगर पालिका परिषद के कवि सम्मेलन में कई जिलों से आए कवियों ने कभी गुदगुदाया तो कभी वीर रस से जोश भर दिया। औरैया से आए वीर रस के कवि अजय अंजाम ने सुनाया- मेवाड़ विजय के रास्ते में, खुद का तन रोड़ा बना दिया। चेतक योद्धा बन गया और मुगलों को घोड़ा बना दिया पर दर्शक खड़े होकर तालियां बजाने लगे।
पालिकाध्यक्ष वत्सला अग्रवाल, पूर्व एमएलसी मनोज अग्रवाल की देखरेख में शुक्रवार रात भारतीय पाठशाला में कवि सम्मेलन शुरू हुआ। अध्यक्षता और संचालन कर रहे राष्ट्रीय कवि डॉ. शिवओम अंबर ने सुनाया- लफ्जों में टंकार बिठा लहजे में खुद्दारी रख, जीने की ख्वाहिश है तो मरने की तैयारी रख, श्रीमद्भगवत गीता पढ़ युद्ध निरंतर जारी रख...। प्रियांशु गजेंद्र ने फूलों के दिन शूलों के दिन, गुड़हल और बबूलों के दिन सबके आते हैं, दिन से क्या घबराना दिन तो आते जाते हैं सुनाया। कानपुर की शबीना अदीब ने सैनिकों की शान में सुनाया- मैंने दीपक जलाए हैं घर में, मेरे घर में उजाले हुए हैं। वो अंधेरे में हैं सरहदों पर जो तिरंगा संभाले हुए हैं।
शृंगार से सुस्त और वीर रस की कविताओं से गुस्से में आए लोगों को दिल्ली के कवि प्रताप फौजदार ने खूब हंसाया। गीता पढ़ा- वफा ईमान की बातें किताबों में ही मिलती हैं, भरोसा रोज मिलता है भरोसा रोज डसता है। जमीं वो अन्न पैदा कर वफा जो खून में बोले, भगत सिंह जैसे बेटों को वतन अब भी तरसता है। वैभव सोमवंशी ने सुनाया- राम हमारी सुबह हमारी शाम हैं, राम रात-दिन राम ही आठों धाम हैं। रमे हुए जो रक्त धमनियों में मेरी, मेरे राघव तुमको कोटि प्रणाम है। उत्कर्ष अग्निहोत्री ने पढ़ा- पीड़ाओं की क्यारी है सब पर छुरी कटारी है, साजिश प्यारी-प्यारी है, फिर भी हम आभारी हैं। कवि सम्मेलन में जिले के कई वरिष्ठ कवियों को भी सम्मानित किया गया। इसमें ईओ विनोद कुमार समेत शहर के तमाम लोग मौजूद रहे।
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पालिकाध्यक्ष वत्सला अग्रवाल, पूर्व एमएलसी मनोज अग्रवाल की देखरेख में शुक्रवार रात भारतीय पाठशाला में कवि सम्मेलन शुरू हुआ। अध्यक्षता और संचालन कर रहे राष्ट्रीय कवि डॉ. शिवओम अंबर ने सुनाया- लफ्जों में टंकार बिठा लहजे में खुद्दारी रख, जीने की ख्वाहिश है तो मरने की तैयारी रख, श्रीमद्भगवत गीता पढ़ युद्ध निरंतर जारी रख...। प्रियांशु गजेंद्र ने फूलों के दिन शूलों के दिन, गुड़हल और बबूलों के दिन सबके आते हैं, दिन से क्या घबराना दिन तो आते जाते हैं सुनाया। कानपुर की शबीना अदीब ने सैनिकों की शान में सुनाया- मैंने दीपक जलाए हैं घर में, मेरे घर में उजाले हुए हैं। वो अंधेरे में हैं सरहदों पर जो तिरंगा संभाले हुए हैं।
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शृंगार से सुस्त और वीर रस की कविताओं से गुस्से में आए लोगों को दिल्ली के कवि प्रताप फौजदार ने खूब हंसाया। गीता पढ़ा- वफा ईमान की बातें किताबों में ही मिलती हैं, भरोसा रोज मिलता है भरोसा रोज डसता है। जमीं वो अन्न पैदा कर वफा जो खून में बोले, भगत सिंह जैसे बेटों को वतन अब भी तरसता है। वैभव सोमवंशी ने सुनाया- राम हमारी सुबह हमारी शाम हैं, राम रात-दिन राम ही आठों धाम हैं। रमे हुए जो रक्त धमनियों में मेरी, मेरे राघव तुमको कोटि प्रणाम है। उत्कर्ष अग्निहोत्री ने पढ़ा- पीड़ाओं की क्यारी है सब पर छुरी कटारी है, साजिश प्यारी-प्यारी है, फिर भी हम आभारी हैं। कवि सम्मेलन में जिले के कई वरिष्ठ कवियों को भी सम्मानित किया गया। इसमें ईओ विनोद कुमार समेत शहर के तमाम लोग मौजूद रहे।

फोटो-37 भारतीय पाठशाला में कविता पाठ करते अजय अंजाम। संवाद

फोटो-37 भारतीय पाठशाला में कविता पाठ करते अजय अंजाम। संवाद
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