फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Farrukhabad News ›   burn ward... the lock will open only when the surgeon is found

फर्रुखाबादः बर्न वार्ड... ताला तभी खुलेगा, जब सर्जन मिलेगा

Wed, 20 Jul 2022 11:54 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 20 Jul 2022 11:54 PM IST
विज्ञापन
burn ward... the lock will open only when the surgeon is found
लोहिया अस्पताल के बर्न वार्ड में पड़ा ताला। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल की व्यवस्था आग से झुलसे मरीजों और उनके तीमारदारों की पीड़ा और बढ़ा रही है। यहां 14 कमरों में चलने वाली बर्न यूनिट एक कमरे में समेट दी गई है। इस कमरे (वार्ड) का ताला भी करीब डेढ़ महीने से नहीं खुला। यहां लगीं एसी भी हटा दी गईं। जो मरीज आते हैं उन्हें भर्ती करने की बजाय रेफर किया जा रहा है।
विज्ञापन

वर्ष 1995 में लोहिया अस्पताल बनने के साथ ही आग से झुलसे मरीजों के अच्छे उपचार के लिए बर्न यूनिट की स्थापना की गई थी। इसके 10 कमरों में 20 बेड और एसी लगे थे। चार कमरों में डॉक्टर, दवाई व अन्य स्टाफ की व्यवस्था थी। यूनिट शुरू होने से आसपास के जनपदों के मरीज भी यहां आने लगे। कुछ साल मरीजों को भर्ती कर उनका उपचार किया गया लेकिन धीरे-धीरे व्यवस्था बिगड़ी चली गई।
विज्ञापन

कोरोना की पहली लहर में यहां आइसोलेशन वार्ड बना और अब पीकू वार्ड संचालित हो रहा है। यहां लगे एसी भी दूसरी जगह शिफ्ट कर दिए गए। अस्पताल प्रशासन ने दूसरी मंजिल पर टीबी वार्ड के पास के कमरे में छह बेड डालकर बाहर बर्न वार्ड लिखकर अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

आग से झुलसे मरीजों के लिए सबसे जरूरी एसी और मच्छरदानी तक वार्ड में नहीं हैं। करीब डेढ़ माह से इस वार्ड का ताला तक नहीं खोला गया। हालात यह हैं कि अस्पताल में आग से झुलसे जो भी मरीज आते है, उन्हें कुछ लोशन लगाने के बाद सर्जन न होने की बात कहकर रेफर कर दिया जाता है।
तीन माह में इमरजेंसी में आए 26 मरीज
लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी ओपीडी में 21 अप्रैल से 20 मई तक नौ, 21 मई से 20 जून तक 10 और 21 जून से 20 जुलाई तक सात मरीज आए। इन इन 26 मरीजों में सिर्फ दो को रजिस्टर पर भर्ती होना दिखाया गया है, शेष सभी मरीजों को रेफर किया गया।

एक साल से सर्जन बिना चल रहा अस्पताल
लोहिया अस्पताल में डॉ. गौरव मिश्रा नियमित और डॉ. इमरान अली संविदा पर सर्जन के रूप में तैनात थे। करीब डेढ़ साल पहले डॉ. गौरव मिश्रा का स्थानांतरण हो गया और एक साल पहले डॉ. इमरान अली की संविदा समाप्त हो गई। इसके बाद अस्पताल में कोई भी सर्जन नहीं आया। लिहाजा न तो ऑपरेेशन हो रहे और न ही झुलसे लोगों का इलाज मिल रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed