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फतेहगढ़ कोतवाली में आईजी को बीट व्यवस्था चौपट मिली
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फतेहगढ़ कोतवाली में अपराधियों की बोर्ड पर लिखी सूची देखते आईजी, साथ में एसपी। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। फतेहगढ़ कोतवाली के पुलिसकर्मी सक्रिय अपराधियों, शराब व खनन माफिया के बारे में जानते ही नहीं। निरीक्षण के दौरान आईजी मोहित अग्रवाल ने गुरुवार को कोतवाली के बीट सिपाही जितेंद्र, धर्मेंद्र, राजवीर, ओपी सिंह से अपराधियों के बारे में पूछताछ शुरू की तो वे एक दूसरे का मुंह ताककर चुप्पी साध गए। चारों को चुप्पी साधे देख आईजी ने सख्त नजरों से उनको देखकर अपनी बीटों पर ध्यान देने के निर्देश दिए। कोतवाली से पूर्व आईजी ने पुलिस लाइन के स्टोर का निरीक्षण किया।
पुलिस लाइन के स्टोर का निरीक्षण करने के दौरान बुलेटप्रूफ जैकेट के थानों में असमान वितरण पर बराबर वितरण के आदेश दिए। स्टोर में शासन से भेजे गए तीन सीसीटीवी कैमरे धूल फांकते देख चौराहों पर लगाने के आदेश दिए। इसके बाद परिवहन शाखा का निरीक्षण कर प्रभारी प्रेमचंद्र से जवाब सवाल किए। यहां से आईजी सीधे फतेहगढ़ कोतवाली पहुंचे। कोतवाली परिसर में बिना नंबर पुलिस लिखी हुई दीवान व मुंशी की बाइक दिखाई दी। एक बाइक में पेन से नंबर लिखे थे। पूछने पर पता चला कि एक बाइक दीवान रामसिंह व दूसरी मुंशी उदयवीर की है। आईजी ने कोतवाल से दोनों बाइकें सीज कर संबंधित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के आदेश दिए। उन्होंने फतेहगढ़ कोतवाल जय प्रकाश पाल से पूछा कि कोतवाली का निर्माण कब हुआ था। कोतवाल ने बताया कि 1905 में कोतवाली बनी थी। टॉप टेन अपराधियों की सूची में पुराने लोगों के नाम देख सक्रिय व शातिर अपराधियों के फोटो सहित नाम लिखवाकर चौराहों पर लगाने के आदेश दिए। आईजी ने बीमार, उम्रदराज और अपराध करने में लाचार का नाम सूची से हटाने को कहा।
खनन माफिया की करतूत से अंजान थे आईजी
नवाबगंज में खनन माफियाओं की पुलिस से मारपीट व राजेपुर में एसओ की गाड़ी में टक्कर मारने के बाद खनन माफिया व उसके वाहनों को छोड़ने की घटना से आईजी अंजान थे। पत्रकारों के इन सवालों पर आईजी ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। पूरे मामले में जांच करवाकर कार्रवाई की जाएगी। तभी एसपी डॉ. अनिल मिश्र ने कहा कि राजेपुर की घटना गलत है। इस तरह की कोई बात नहीं है। एएसपी अजय प्रताप मौजूद रहे। बुधवार रात आईजी ने सीओ व एएसपी, एसपी के साथ गेस्ट हाउस में अपराध समीक्षा बैठक की थी।
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पुलिस लाइन के स्टोर का निरीक्षण करने के दौरान बुलेटप्रूफ जैकेट के थानों में असमान वितरण पर बराबर वितरण के आदेश दिए। स्टोर में शासन से भेजे गए तीन सीसीटीवी कैमरे धूल फांकते देख चौराहों पर लगाने के आदेश दिए। इसके बाद परिवहन शाखा का निरीक्षण कर प्रभारी प्रेमचंद्र से जवाब सवाल किए। यहां से आईजी सीधे फतेहगढ़ कोतवाली पहुंचे। कोतवाली परिसर में बिना नंबर पुलिस लिखी हुई दीवान व मुंशी की बाइक दिखाई दी। एक बाइक में पेन से नंबर लिखे थे। पूछने पर पता चला कि एक बाइक दीवान रामसिंह व दूसरी मुंशी उदयवीर की है। आईजी ने कोतवाल से दोनों बाइकें सीज कर संबंधित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के आदेश दिए। उन्होंने फतेहगढ़ कोतवाल जय प्रकाश पाल से पूछा कि कोतवाली का निर्माण कब हुआ था। कोतवाल ने बताया कि 1905 में कोतवाली बनी थी। टॉप टेन अपराधियों की सूची में पुराने लोगों के नाम देख सक्रिय व शातिर अपराधियों के फोटो सहित नाम लिखवाकर चौराहों पर लगाने के आदेश दिए। आईजी ने बीमार, उम्रदराज और अपराध करने में लाचार का नाम सूची से हटाने को कहा।
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खनन माफिया की करतूत से अंजान थे आईजी
नवाबगंज में खनन माफियाओं की पुलिस से मारपीट व राजेपुर में एसओ की गाड़ी में टक्कर मारने के बाद खनन माफिया व उसके वाहनों को छोड़ने की घटना से आईजी अंजान थे। पत्रकारों के इन सवालों पर आईजी ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। पूरे मामले में जांच करवाकर कार्रवाई की जाएगी। तभी एसपी डॉ. अनिल मिश्र ने कहा कि राजेपुर की घटना गलत है। इस तरह की कोई बात नहीं है। एएसपी अजय प्रताप मौजूद रहे। बुधवार रात आईजी ने सीओ व एएसपी, एसपी के साथ गेस्ट हाउस में अपराध समीक्षा बैठक की थी।
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