फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Farrukhabad News ›   Beat Incharge does not even know the name of active criminals

फतेहगढ़ कोतवाली में आईजी को बीट व्यवस्था चौपट मिली

Thu, 17 Sep 2020 11:18 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 17 Sep 2020 11:18 PM IST
विज्ञापन
Beat Incharge does not even know the name of active criminals
फतेहगढ़ कोतवाली में अपराधियों की बोर्ड पर लिखी सूची देखते आईजी, साथ में एसपी। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। फतेहगढ़ कोतवाली के पुलिसकर्मी सक्रिय अपराधियों, शराब व खनन माफिया के बारे में जानते ही नहीं। निरीक्षण के दौरान आईजी मोहित अग्रवाल ने गुरुवार को कोतवाली के बीट सिपाही जितेंद्र, धर्मेंद्र, राजवीर, ओपी सिंह से अपराधियों के बारे में पूछताछ शुरू की तो वे एक दूसरे का मुंह ताककर चुप्पी साध गए। चारों को चुप्पी साधे देख आईजी ने सख्त नजरों से उनको देखकर अपनी बीटों पर ध्यान देने के निर्देश दिए। कोतवाली से पूर्व आईजी ने पुलिस लाइन के स्टोर का निरीक्षण किया।
विज्ञापन

पुलिस लाइन के स्टोर का निरीक्षण करने के दौरान बुलेटप्रूफ जैकेट के थानों में असमान वितरण पर बराबर वितरण के आदेश दिए। स्टोर में शासन से भेजे गए तीन सीसीटीवी कैमरे धूल फांकते देख चौराहों पर लगाने के आदेश दिए। इसके बाद परिवहन शाखा का निरीक्षण कर प्रभारी प्रेमचंद्र से जवाब सवाल किए। यहां से आईजी सीधे फतेहगढ़ कोतवाली पहुंचे। कोतवाली परिसर में बिना नंबर पुलिस लिखी हुई दीवान व मुंशी की बाइक दिखाई दी। एक बाइक में पेन से नंबर लिखे थे। पूछने पर पता चला कि एक बाइक दीवान रामसिंह व दूसरी मुंशी उदयवीर की है। आईजी ने कोतवाल से दोनों बाइकें सीज कर संबंधित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के आदेश दिए। उन्होंने फतेहगढ़ कोतवाल जय प्रकाश पाल से पूछा कि कोतवाली का निर्माण कब हुआ था। कोतवाल ने बताया कि 1905 में कोतवाली बनी थी। टॉप टेन अपराधियों की सूची में पुराने लोगों के नाम देख सक्रिय व शातिर अपराधियों के फोटो सहित नाम लिखवाकर चौराहों पर लगाने के आदेश दिए। आईजी ने बीमार, उम्रदराज और अपराध करने में लाचार का नाम सूची से हटाने को कहा।
विज्ञापन

खनन माफिया की करतूत से अंजान थे आईजी
नवाबगंज में खनन माफियाओं की पुलिस से मारपीट व राजेपुर में एसओ की गाड़ी में टक्कर मारने के बाद खनन माफिया व उसके वाहनों को छोड़ने की घटना से आईजी अंजान थे। पत्रकारों के इन सवालों पर आईजी ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। पूरे मामले में जांच करवाकर कार्रवाई की जाएगी। तभी एसपी डॉ. अनिल मिश्र ने कहा कि राजेपुर की घटना गलत है। इस तरह की कोई बात नहीं है। एएसपी अजय प्रताप मौजूद रहे। बुधवार रात आईजी ने सीओ व एएसपी, एसपी के साथ गेस्ट हाउस में अपराध समीक्षा बैठक की थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed