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Farrukhabad News: बैनामे के नाम पर फर्जीवाड़ा करने के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज
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हरदोई। बैनामा कराने के नाम पर रुपये हड़पने वाले की जमानत अर्जी जिला जज रीता कौशिक ने खारिज कर दी है।
हरपालपुर कोतवाली क्षेत्र के पुरनपुर मजरा तिथिगांव निवासी राधेश्याम सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया कि हरपालपुर कोतवाली क्षेत्र के मिश्रनपुरवा निवासी मौजीलाल, अरहुली निवासी गोविंद, पूरनपुरवा निवासी मुनेंद्र सिंह उसके घर आए थे। मौजीलाल ने बताया था कि उसकी सौतेली बुआ का खेत तिथिगांव में है, यह खेत बिकाऊ है। खेत का सौदा 2.75 लाख रुपये में तय हुआ था। तीनों आरोपियों ने 23 हजार रुपये गोविंद के खाते में ट्रांसफर करा लिए थे। तीन जून को तीनों आरोपी एक औरत को साथ लेकर बैनामा करने आए थे।
दावा है कि 2.50 लाख रुपये देकर बैनामा करा दिया था। राधेश्याम बैनामे के तीसरे दिन अपनी जमीन पर काबिज होने गए तो फर्जीवाड़े का पता चला। पुलिस ने मौजीराम, गोविंद और मुनेंद्र के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। विवेचना में बर्रा निवासी शशिकला का नाम सामने आया था। चारों को जेल भेजा जा चुका है। गोविंद के अधिवक्ता ने न्यायालय में उपस्थित होकर उसे निर्दाेश बताते हुए जमानत पर रिहा किए जाने की मांग की। जिला शासकीय अधिवक्ता ने जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों के तर्काें को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूत के आधार पर जिला जज ने आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
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हरपालपुर कोतवाली क्षेत्र के पुरनपुर मजरा तिथिगांव निवासी राधेश्याम सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया कि हरपालपुर कोतवाली क्षेत्र के मिश्रनपुरवा निवासी मौजीलाल, अरहुली निवासी गोविंद, पूरनपुरवा निवासी मुनेंद्र सिंह उसके घर आए थे। मौजीलाल ने बताया था कि उसकी सौतेली बुआ का खेत तिथिगांव में है, यह खेत बिकाऊ है। खेत का सौदा 2.75 लाख रुपये में तय हुआ था। तीनों आरोपियों ने 23 हजार रुपये गोविंद के खाते में ट्रांसफर करा लिए थे। तीन जून को तीनों आरोपी एक औरत को साथ लेकर बैनामा करने आए थे।
दावा है कि 2.50 लाख रुपये देकर बैनामा करा दिया था। राधेश्याम बैनामे के तीसरे दिन अपनी जमीन पर काबिज होने गए तो फर्जीवाड़े का पता चला। पुलिस ने मौजीराम, गोविंद और मुनेंद्र के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। विवेचना में बर्रा निवासी शशिकला का नाम सामने आया था। चारों को जेल भेजा जा चुका है। गोविंद के अधिवक्ता ने न्यायालय में उपस्थित होकर उसे निर्दाेश बताते हुए जमानत पर रिहा किए जाने की मांग की। जिला शासकीय अधिवक्ता ने जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों के तर्काें को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूत के आधार पर जिला जज ने आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
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