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बाढ़ पीड़ित जूझ रहे आर्थिक संकट से, पशुओं के चारे की भी दिक्कत
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गांव उदयमपुर में बाढ़ से गुजरकर सब्जी बेचने जाता दुकानदार। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
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अमृतपुर। गंगा का जलस्तर घटने के बाद भी गांव में समस्याएं बनी हुईं हैं। खाने-पीने के साथ पशुओं के चारे की समस्या है। मनरेगा का काम भी शुरू नहीं हो पा रहा है। मजदूर काम की तलाश में शहर जाने को मजबूर हो रहे हैं।
पांच माह से बाढ़ से जूझ रहे गंगा के किनारे बसे गांव हरसिंहपुर कायस्थ, तीसराम की मड़ैया, ऊगरपुर, सुंदरपुर, कंचनपुर सबलपुर, लायकपुर, जोगराजपुर, रामपुर, करनपुर घाट, कुड़री सांगपुर, अंबरपुर, चित्रकूट, खानपुर, गाजीपुर में जून से कई बार बाढ़ आने से खाने-पीने के साथ पशुओं के चारे की समस्या बनी हुई है। इन गांव के ग्रामीणों के सामने रोजी रोटी का संकट है। गांव में कई लोगों के जॉब कार्ड बने हैं लेकिन पानी भरे होने से मनरेगा के तहत काम नहीं मिल रहा है। ग्रामीण मजदूरी के लिए फर्रुखाबाद काम के लिए जा रहे हैं। कई गांवों में अभी भी घरों में पानी भरा है।
अंबरपुर के कृपाल चंद्र का कहना है कि जून से गांव में पानी भरा है। मनरेगा में भी काम नहीं मिल रहा है। आशा की मड़ैया के गुड्डू कहते हैं कि गांव में पानी भरे पांच माह हो गए। काम न मिलने से खाने के लाले हैं। पशु के चारे का भी संकट है। तुलाराम का कहना है कि मनरेगा जॉब कार्ड भी अब काम नहीं आ रहा है। अंबरपुर के मेवाराम ने बताया है कि कई बार बाढ़ आने से गन्ना व धान की फसल खराब हो गई है।
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रामगंगा व गंगा का जलस्तर घटने के बाद हरसिंहपुर कायस्थ, ऊगरपुर, तीसराम की मड़ैया, सुंदरपुर, करनपुर घाट व कोलासोता, अलादपुर भटौली में कटान जारी है। गांव से पानी तो निकलने लगा है, लेकिन घरों में कीचड़ भरा होने से लोग सड़कों व छतों पर डेरा जमाए हैं। स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के चलते गांवों में टीमें नहीं जा रहीं हैं। गांव भूड़रा के दुर्गेश, आदित्य, शंकर लाल, अर्जुन, सुमन, आदि बुखार से पीड़ित हैं।
शुक्रवार को गंगा का जलस्तर 136.75 से घट कर 136.50 मीटर पहुंच गया है। गंगा में नरौरा बांध से 51 हजार 8 सौ 91 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। रामगंगा का जलस्तर 137.10 से घटकर 136.85 मीटर पर आ गया है।
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पांच माह से बाढ़ से जूझ रहे गंगा के किनारे बसे गांव हरसिंहपुर कायस्थ, तीसराम की मड़ैया, ऊगरपुर, सुंदरपुर, कंचनपुर सबलपुर, लायकपुर, जोगराजपुर, रामपुर, करनपुर घाट, कुड़री सांगपुर, अंबरपुर, चित्रकूट, खानपुर, गाजीपुर में जून से कई बार बाढ़ आने से खाने-पीने के साथ पशुओं के चारे की समस्या बनी हुई है। इन गांव के ग्रामीणों के सामने रोजी रोटी का संकट है। गांव में कई लोगों के जॉब कार्ड बने हैं लेकिन पानी भरे होने से मनरेगा के तहत काम नहीं मिल रहा है। ग्रामीण मजदूरी के लिए फर्रुखाबाद काम के लिए जा रहे हैं। कई गांवों में अभी भी घरों में पानी भरा है।
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अंबरपुर के कृपाल चंद्र का कहना है कि जून से गांव में पानी भरा है। मनरेगा में भी काम नहीं मिल रहा है। आशा की मड़ैया के गुड्डू कहते हैं कि गांव में पानी भरे पांच माह हो गए। काम न मिलने से खाने के लाले हैं। पशु के चारे का भी संकट है। तुलाराम का कहना है कि मनरेगा जॉब कार्ड भी अब काम नहीं आ रहा है। अंबरपुर के मेवाराम ने बताया है कि कई बार बाढ़ आने से गन्ना व धान की फसल खराब हो गई है।
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रामगंगा व गंगा का जलस्तर घटने के बाद हरसिंहपुर कायस्थ, ऊगरपुर, तीसराम की मड़ैया, सुंदरपुर, करनपुर घाट व कोलासोता, अलादपुर भटौली में कटान जारी है। गांव से पानी तो निकलने लगा है, लेकिन घरों में कीचड़ भरा होने से लोग सड़कों व छतों पर डेरा जमाए हैं। स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के चलते गांवों में टीमें नहीं जा रहीं हैं। गांव भूड़रा के दुर्गेश, आदित्य, शंकर लाल, अर्जुन, सुमन, आदि बुखार से पीड़ित हैं।
शुक्रवार को गंगा का जलस्तर 136.75 से घट कर 136.50 मीटर पहुंच गया है। गंगा में नरौरा बांध से 51 हजार 8 सौ 91 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। रामगंगा का जलस्तर 137.10 से घटकर 136.85 मीटर पर आ गया है।