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Farrukhabad News: सरकारी व निजी अस्पतालों से गायब हो चुके आयुष्मान वार्ड

Sat, 28 Sep 2024 01:37 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 28 Sep 2024 01:37 AM IST
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Ayushman wards missing from government and private hospitals
फर्रुखाबाद। आयुष्मान कार्डधारकों के लिए जिले के 11 सरकारी और 16 निजी अस्पतालों को आरक्षित किया गया है, लेकिन किसी भी अस्पताल में आयुष्मान वार्ड नहीं हैं। वहीं निजी अस्पताल संचालक भुगतान व अनुमति में देरी की वजह से मरीजों को भर्ती करने से कतराते हैं। इससे कार्ड बनवाने के बावजूद मरीजों को योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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आयुष्मान योजना शुरू हुए छह वर्ष पूरे हो चुके हैं। योजना से जिले के एक लाख 71 हजार 829 परिवारों को जोड़ा गया है। कुल सात लाख 64 हजार 125 गोल्डन कार्ड बनाने का लक्ष्य है। इसके सापेक्ष चार लाख 93 हजार 43 कार्ड बने हैं। आयुष्मान कार्ड पर पांच लाख रुपये तक स्वास्थ्य सेवाएं निशुल्क दी जाती हैं।
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योजना शुरू होने के दौरान सूचीबद्ध निजी व सरकारी अस्पतालों में एक-एक आयुष्मान वार्ड आरक्षित किया गया था। हालात यह हैं कि निजी अस्पताल तो दूर, सूचीबद्ध सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान वार्ड आरक्षित नहीं हैं।
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रिकार्ड के अनुसार योजना शुरू होने से अब तक जिले के कुल 28980 मरीजों ने आयुष्मान योजना का लाभ लिया है। इनमें 20559 मरीजों ने निजी अस्पतालों में व 8421 मरीजों का सरकारी अस्पतालों में इलाज हुआ। इस हिसाब से 11 सरकारी अस्पतालों में एक वर्ष में औसतन 1400 मरीजों का ही इलाज किया गया। एक अस्पताल पूरे वर्ष में 127 मरीजों को ही योजना का लाभ दे सका।


भुगतान व अनुमति में देरी का पेच
आईएम के पूर्व अध्यक्ष डाॅ.केएम द्विवेदी ने बताया कि आयुष्मान मरीजों को जनरल वार्ड में ही भर्ती किया जा रहा है। मरीज भर्ती करने के लिए पहले ऑनलाइन अनुमति लेनी होती है। कभी-कभी अनुमति मिलने में एक से दो दिन तक लग जाते हैं। जिस मरीज को तत्काल इलाज की जरूरत है और अनुमति में देरी होती है तो उनके इलाज में दिक्कत आती है। उन्होंने बताया उनका करीब 55 लाख रुपये भुगतान बकाया है। इसी तरह कई अन्य डॉक्टरों का भी भुगतान लटका है। आईएमए के अध्यक्ष डॉ. विपुल अग्रवाल ने बताया कि आयुष्मान योजना के नियमों को सरल किया जाना चाहिए।

क्या कहते हैं जिम्मेदार
मरीज भर्ती करने की ऑनलाइन अनुमति व भुगतान सीधे निदेशालय स्तर से होता है। अन्य समस्याओं की जानकारी कर निस्तारण कराने का प्रयास किया जाएगा।
डॉ.अवनींद्र कुमार, सीएमओ
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