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बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र के चल रहे सरकारी वाहन, नोटिस जारी
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फर्रुखाबाद। बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र के चल रहे सरकारी वाहनों के खिलाफ एआरटीओ कार्यालय सख्त हुआ है। विभिन्न विभागों के प्रमुखों को नोटिस जारी करके वाहनों का प्रदूषण प्रमाणपत्र बनवाने के आदेश दिए गए हैं।
सरकारी विभागों में लगे वाहन अपनी मियाद पूरी होने के बाद भी सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। सरकारी वाहनों की प्रदूषण की जांच भी नहीं कराई जाती है। शासन से प्रदूषण की रोकथाम को लेकर सरकारी वाहनों की चेकिंग करने के आदेश दिए गए हैं।
एआरटीओ कार्यालय से सभी विभागों में नोटिस भेजे जा रहे हैं। नोटिस में सरकारी वाहनों की जांच कराने के बाद प्रदूषण प्रमाणपत्र लेने के निर्देश दिए गए हैं। बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र के सरकारी वाहन सड़क पर चलते हुए पकड़ा गया तो 10 हजार रुपये का जुर्माना वसूल किया जाएगा।
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एआरटीओ बृजेंद्र चौधरी ने बताया कि सभी विभागों में नोटिस भेजे जा रहे हैं। इसके बाद भी सरकारी वाहन बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र के चलते मिले तो जुर्माना वसूला जाएगा। सरकारी वाहनों का बीमा नहीं कराया जाता है तो संबंधित विभाग ही जिम्मेदार होगा।
सरकारी वाहनों का नहीं कराया जाता बीमा
पुलिस व प्रशासन के पास मौजूद किसी भी वाहन का बीमा नहीं है। बिना बीमा के ही सरकारी वाहन चलते हैं, जबकि आम नागरिक वाहन खरीदता है तो एजेंसी से वाहन का पांच वर्ष तक का बीमा करके दिया जाता है।
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सरकारी विभागों में लगे वाहन अपनी मियाद पूरी होने के बाद भी सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। सरकारी वाहनों की प्रदूषण की जांच भी नहीं कराई जाती है। शासन से प्रदूषण की रोकथाम को लेकर सरकारी वाहनों की चेकिंग करने के आदेश दिए गए हैं।
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एआरटीओ कार्यालय से सभी विभागों में नोटिस भेजे जा रहे हैं। नोटिस में सरकारी वाहनों की जांच कराने के बाद प्रदूषण प्रमाणपत्र लेने के निर्देश दिए गए हैं। बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र के सरकारी वाहन सड़क पर चलते हुए पकड़ा गया तो 10 हजार रुपये का जुर्माना वसूल किया जाएगा।
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एआरटीओ बृजेंद्र चौधरी ने बताया कि सभी विभागों में नोटिस भेजे जा रहे हैं। इसके बाद भी सरकारी वाहन बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र के चलते मिले तो जुर्माना वसूला जाएगा। सरकारी वाहनों का बीमा नहीं कराया जाता है तो संबंधित विभाग ही जिम्मेदार होगा।
सरकारी वाहनों का नहीं कराया जाता बीमा
पुलिस व प्रशासन के पास मौजूद किसी भी वाहन का बीमा नहीं है। बिना बीमा के ही सरकारी वाहन चलते हैं, जबकि आम नागरिक वाहन खरीदता है तो एजेंसी से वाहन का पांच वर्ष तक का बीमा करके दिया जाता है।