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दरोगा पुत्र की ट्रेन की चपेट में आने से मौत, कोहराम

Tue, 17 Dec 2019 06:39 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 17 Dec 2019 06:39 PM IST
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An ear phone started going on the track, the son of a son was cut from the train
लोहिया अस्पताल में रोती बिलखती जमीन पर लेटी मनीष की मां। - फोटो : FARRUKHABAD
जनपद बरेली में तैनात दरोगा के पुत्र की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। वह कान में मोबाइल की लीड(ईयर फोन) लगाकर ट्रैक पर चलता जा रहा था। इसके चलते उसे ट्रेन के हार्न की आवाज भी उसे नहीं सुनाई दी। युवक प्रयागराज में बीएससी प्रथम वर्ष का छात्र था।
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फतेहगढ़ कोतवाली क्षेत्र के भोलेपुर के आंबेडकरनगर में रह रहे रणवीर सिंह दिवाकर मूल रूप से नवाबगंज के बरा सिरोली गांव के निवासी हैं। वह बरेली के हाफिजगंज में दरोगा के पद पर तैनात हैं। कुछ दिनों से उनकी तबीयत ठीक नहीं है। इससे भोलेपुर स्थित एक नर्सिंग होम में भर्ती हैं। रणवीर को देखने उनकी सलहज अस्पताल पहुंचीं थीं।
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सुबह करीब 11 बजे उन्हें घर तक छोड़ने बड़ा बेटा मनीष कुमार (22) बाइक से गया। लौटने का बाद मनीष घर से पैदल निकल आया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मनीष कान में मोबाइल की लीड (ईयर फोन) लगाकर पटरी पर जा रहा था। इसी समय फतेहगढ़ की ओर जा रही ट्रेन काफी देर हार्न देती रही, मगर मनीष ने नहीं सुना।
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कुछ लोगों ने आवाज भी दी। ट्रेन की चपेट में आने से मनीष दूर जा गिरा। वहां पहुंचे तमाम लोग उसे लेकर उसे लोहिया अस्पताल पहुंचे, जहां डाक्टर ने मृत घोषित कर दिया। बेटे की मौत की खबर सुनकर पिता रणवीर भी लोहिया अस्पताल पहुंच गए।
उन्होंने बताया कि मनीष मामी को घर छोड़ने तथा खाना लाने की बात कहकर गया था। मनीष की मां सरिता दिवाकर अस्पताल में ही थीं। छोटा भाई दीपक दिल्ली में पढ़ रहा है। मां और परिजन रो-रो कर बेहाल हो गए। शव का पोस्टमार्टम कराया गया है।

बेहाल मां पल-पल हो रही थी बेहोश
मनीष की मां सरिता का हाल बेहाल था। वह बार-बार जमीन पर गश खाकर गिर रही थी। साथ में मौजूद मनीष की मामी को धक्का देकर वह भाग कर इमरजेंसी में स्ट्रेचर पर रखे मनीष के शव से चिपट जाती थी। बेटा बहुत कष्टों से पाला था हमने। तुम मां को बहुत प्यार करते थे। हमें क्यों छोड़ गए। तमाम बातें कहकर दहाड़ें मारकर बेहोश हो जाती थी। करुण क्रंदन देख हर किसी की आंखें नम हो रही थी।
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