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बरसेगा विदेशी पैसा, सपने होंगे पूरे
Farrukhabad
Updated Thu, 11 Sep 2014 05:31 AM IST
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फर्रुखाबाद। टेक्सटाइल पार्क के लिए वर्ष 2007 से चल रही मुहिम को मुकाम मिलना तय हो गया है। मंगलवार को कें द्रीय कपड़ा राज्यमंत्री संतोष गंगवार ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से लखनऊ में भेंट की। मुख्यमंत्री ने उन्हें फर्रुखाबाद में टेक्सटाइल पार्क के निर्माण में हर संभव मदद का भरोसा दिया है। इसी के साथ पार्क के लिए 41 एकड़ जमीन मुहैया कराने की कार्रवाई भी जिला प्रशासन ने तेज कर दी है। शहर में 139 साल पुराने कारोबार को ज्योग्राफिकल आइडेंटिटी मिली हुई है। सहूलियताें के अभाव में कारोबार सिमट रहा था। कारोबारी केंद्र सरकार को 125 करोड़ रुपये की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट भेज चुके हैं।
पार्क में अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मुहैया हाेंगी। इससे पांच सालों में कारोबार 5000 करोड़ रुपये पहुंचने क ी उम्मीद है। अभी घरेलू बाजार और निर्यात से 500 करोड़ रुपये सालाना की कमाई होती है। वस्त्र छपाई के आइटम 15 मुल्कों में निर्यात होते हैं। पार्क के बाद निर्यात कारोबार से विदेशी मुद्रा में भी करीब 10 गुना इजाफा होगा। सात साल से चल रही टेक्सटाइल पार्क की मुहिम परवान चढ़ने की नौबत अब बनी है। फर्रुखाबाद टेक्सटाइल पार्क प्राइवेट लिमिटेड संस्था पार्क की मांग कर रही है। कारोबारी 125 करोड़ रुपये की डिटेल प्रोजेक्ट रिपार्ट भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय को भेज चुके हैं। इस प्रोजेक्ट में 40 करोड़ रु पये का निवेश केंद्र सरकार करेगी। 250 करोड़ निवेश का मसौदा फर्रुखाबाद टेक्सटाइल पार्क प्राइवेट लिमिटेड ने बनाया है। इसमें फिलहाल 100 इकाइयां मेंबर हैं। करीब इतनी ही इकाइयां यहां से गैर प्रांतों में पलायन कर चुकी हैं। यह भी वापस आने को तैयार हैं।
शहर में 12 इकाइयां सीधे निर्यात का कारोबार करती हैं। आइटम बनाने वाली इकाइयों की तादाद 225 है। 500 करोड़ रुपये के सालाना कारोबार में 350 करोड़ रुपये की कमाई जर्मनी, बेल्जियम, ब्रिटेन, अमेरिका, इटली, पाकिस्तान, ईराक, दुबई, पाकिस्तान, अफ्रीका, इजरायल, हंगरी, टर्की, रूस को निर्यात से होती है। 150 करोड़ रुपये का घरेूल बाजार है। कारोबारी सहूलियताें के अभाव में रोज एक लाख मीटर कपड़े पर ही छपाई कर पाते हैं। इसका मूल्य डेढ़ करोड़ के आसपास बैठता है। संसाधनों की कमी होने से कारोबारी निर्यातकाें की डिमांड पूरी नहीं कर पा रहे हैं। इससे कारोबार बढ़ नहीं पा रहा है।
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टेक्सटाइल पार्क अंतर्राष्ट्रीय स्तर का होगा। कारोबारियों का आंकलन है कि पांच साल में कारोबार 10 गुना हो जाएगा। निर्यात कारोबार भी इसी गणित से बढ़ेगा। इसके 3500 करोड़ होने की उम्मीद है। कारोबारी हैंडमेड छापे के परदे, हैंड कुल्टिड बेड कवर कम रजाई, स्टोल, स्कार्फ, शाल व साड़ियां निर्यात करते हैं। सबसे ज्यादा कारोबार स्कार्फ व स्टोल से हो रहा है। इनका सालाना निर्यात 250 करोड़ का है। रजाई का विदेशी कारोबार 40 से 50 करोड़ का है। साड़ियां, शाल, इंब्रायडरी, ड्रेस मैटेरियल की हिस्सेदारी 50 करोड़ की है।
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यह है अच्छे दिनाें की शुरुआत
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के चेप्टर चेयरमैन रोहित गोयल का कहना है कि टेक्सटाइल प्रिंट इंडस्ट्रीज के अच्छे दिनाें की शुरुआत होने वाली है। आजादी के बाद से जिले के विकास में यह पार्क मील का पत्थर साबित होगा। तीन साल में पार्क का निर्माण पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद से नतीजे आने लगेंगे।
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यह होगा फायदा
- टेक्सटाइल पार्क में अंतर्राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर रहेगा। आधुनिक मशीनें लगेंगी। इससे उत्पादन बढ़ेगा।
- टेस्टिंग लैब बनेगी। अभी कारोबारी टेस्टिंग के लिए दिल्ली और मुंबई जाते हैं। इससे समय और पैसे की बर्बादी होती है।
- कॉमन ट्रीटमेंट प्लांट लगने से गंगा प्रदूषण की समस्या से निजात मिलेगी।
- अलग बिजली फीडर। इससे बिजली की समस्या हल होगी। अभी घरेलू शेड्यूल से आपूर्ति मिलती है।
- 10 से 15 हजार नए बेरोजगारों को काम मिलेगा।
- वॉयराें को ठहराने के लिए एअरकंडीशंड गेस्ट हाउस।
- कामगराें के लिए क्रेच व दूसरी जरूरी सुविधाएं।
- सभी टेक्सटाइल प्रिंट इकाइयां पार्क में शिफ्ट हाेंगी।
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वस्त्र छपाई उद्योग की विकास यात्रा
- फर्रुखाबाद में 1875 में वस्त्र छपाई का कारोबार शुरू हुआ। तब आलू के ब्लाक पर डिजायन बनाकर कपड़ों पर छपाई होती थी।
- करोबार शुरू होने के 10 साल के भीतर लकड़ी के ब्लाकों से डिजायन छापी जाने लगी।
-1960 के बाद स्क्रीन प्रिंटिंग से काम होने लगा।
-1912 में परदे, साड़ी व बेडशीट का ही निर्यात था। 1980 के बाद निर्यात कारोबार का विस्तार हुआ।
-1990 से 2007 तक निर्यात का कारोबार 100 करोड़ सालाना पहुंचा।
-2012 में सालाना कारोबार 500 करोड़ रुपये पहुंचा।
पार्क में अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मुहैया हाेंगी। इससे पांच सालों में कारोबार 5000 करोड़ रुपये पहुंचने क ी उम्मीद है। अभी घरेलू बाजार और निर्यात से 500 करोड़ रुपये सालाना की कमाई होती है। वस्त्र छपाई के आइटम 15 मुल्कों में निर्यात होते हैं। पार्क के बाद निर्यात कारोबार से विदेशी मुद्रा में भी करीब 10 गुना इजाफा होगा। सात साल से चल रही टेक्सटाइल पार्क की मुहिम परवान चढ़ने की नौबत अब बनी है। फर्रुखाबाद टेक्सटाइल पार्क प्राइवेट लिमिटेड संस्था पार्क की मांग कर रही है। कारोबारी 125 करोड़ रुपये की डिटेल प्रोजेक्ट रिपार्ट भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय को भेज चुके हैं। इस प्रोजेक्ट में 40 करोड़ रु पये का निवेश केंद्र सरकार करेगी। 250 करोड़ निवेश का मसौदा फर्रुखाबाद टेक्सटाइल पार्क प्राइवेट लिमिटेड ने बनाया है। इसमें फिलहाल 100 इकाइयां मेंबर हैं। करीब इतनी ही इकाइयां यहां से गैर प्रांतों में पलायन कर चुकी हैं। यह भी वापस आने को तैयार हैं।
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शहर में 12 इकाइयां सीधे निर्यात का कारोबार करती हैं। आइटम बनाने वाली इकाइयों की तादाद 225 है। 500 करोड़ रुपये के सालाना कारोबार में 350 करोड़ रुपये की कमाई जर्मनी, बेल्जियम, ब्रिटेन, अमेरिका, इटली, पाकिस्तान, ईराक, दुबई, पाकिस्तान, अफ्रीका, इजरायल, हंगरी, टर्की, रूस को निर्यात से होती है। 150 करोड़ रुपये का घरेूल बाजार है। कारोबारी सहूलियताें के अभाव में रोज एक लाख मीटर कपड़े पर ही छपाई कर पाते हैं। इसका मूल्य डेढ़ करोड़ के आसपास बैठता है। संसाधनों की कमी होने से कारोबारी निर्यातकाें की डिमांड पूरी नहीं कर पा रहे हैं। इससे कारोबार बढ़ नहीं पा रहा है।
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टेक्सटाइल पार्क अंतर्राष्ट्रीय स्तर का होगा। कारोबारियों का आंकलन है कि पांच साल में कारोबार 10 गुना हो जाएगा। निर्यात कारोबार भी इसी गणित से बढ़ेगा। इसके 3500 करोड़ होने की उम्मीद है। कारोबारी हैंडमेड छापे के परदे, हैंड कुल्टिड बेड कवर कम रजाई, स्टोल, स्कार्फ, शाल व साड़ियां निर्यात करते हैं। सबसे ज्यादा कारोबार स्कार्फ व स्टोल से हो रहा है। इनका सालाना निर्यात 250 करोड़ का है। रजाई का विदेशी कारोबार 40 से 50 करोड़ का है। साड़ियां, शाल, इंब्रायडरी, ड्रेस मैटेरियल की हिस्सेदारी 50 करोड़ की है।
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यह है अच्छे दिनाें की शुरुआत
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के चेप्टर चेयरमैन रोहित गोयल का कहना है कि टेक्सटाइल प्रिंट इंडस्ट्रीज के अच्छे दिनाें की शुरुआत होने वाली है। आजादी के बाद से जिले के विकास में यह पार्क मील का पत्थर साबित होगा। तीन साल में पार्क का निर्माण पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद से नतीजे आने लगेंगे।
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यह होगा फायदा
- टेक्सटाइल पार्क में अंतर्राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर रहेगा। आधुनिक मशीनें लगेंगी। इससे उत्पादन बढ़ेगा।
- टेस्टिंग लैब बनेगी। अभी कारोबारी टेस्टिंग के लिए दिल्ली और मुंबई जाते हैं। इससे समय और पैसे की बर्बादी होती है।
- कॉमन ट्रीटमेंट प्लांट लगने से गंगा प्रदूषण की समस्या से निजात मिलेगी।
- अलग बिजली फीडर। इससे बिजली की समस्या हल होगी। अभी घरेलू शेड्यूल से आपूर्ति मिलती है।
- 10 से 15 हजार नए बेरोजगारों को काम मिलेगा।
- वॉयराें को ठहराने के लिए एअरकंडीशंड गेस्ट हाउस।
- कामगराें के लिए क्रेच व दूसरी जरूरी सुविधाएं।
- सभी टेक्सटाइल प्रिंट इकाइयां पार्क में शिफ्ट हाेंगी।
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वस्त्र छपाई उद्योग की विकास यात्रा
- फर्रुखाबाद में 1875 में वस्त्र छपाई का कारोबार शुरू हुआ। तब आलू के ब्लाक पर डिजायन बनाकर कपड़ों पर छपाई होती थी।
- करोबार शुरू होने के 10 साल के भीतर लकड़ी के ब्लाकों से डिजायन छापी जाने लगी।
-1960 के बाद स्क्रीन प्रिंटिंग से काम होने लगा।
-1912 में परदे, साड़ी व बेडशीट का ही निर्यात था। 1980 के बाद निर्यात कारोबार का विस्तार हुआ।
-1990 से 2007 तक निर्यात का कारोबार 100 करोड़ सालाना पहुंचा।
-2012 में सालाना कारोबार 500 करोड़ रुपये पहुंचा।