{"_id":"5c30a87dbdec22569a51bdf1","slug":"181546692733-farrukhabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पट्टा वाले नहीं कर सकेंगे बालू का भंडारण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पट्टा वाले नहीं कर सकेंगे बालू का भंडारण
विज्ञापन
फर्रुखाबाद। बालू व मौरंग की बढ़ती कीमतों और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए शासन ने बड़ा कदम उठाया है। अब खदान से 10 किलोमीटर की परिधि में उप खनिजों के भंडारण का लाइसेंस नहीं देने का फैसला किया गया है। इसके अलावा खनन करने वाले पट्टा धारकों को भंडारण का लाइसेंस नहीं दिया जाएगा।
अवैध खनन रोकने के लिए लगातार प्रयास किए जाते रहे हैं। इसी के चलते अब यह नई व्यवस्था लागू की गई है कि खदान के पट्टा धारकों को भंडारण का लाइसेंस नहीं दिया जाएगा। हालांकि पट्टा धारक निजी उपयोग के लिए खनिज का भंडारण कर सकेंगे। साथ ही बालू मौरंग के भंडारण का लाइसेंस अब सिर्फ तीन वर्ष के लिए ही दिया जाएगा। भंडारण लाइसेंस का नवीनीकरण भी अधिकतम दो वर्ष के लिए होगा।
फुटकर विक्रेताओं को भी लाइसेंस से मुक्त कर दिया गया है। सौ घन मीटर तक की क्षमता में बालू, मौरंग का भंडारण करने पर डीएम को सूचना देनी होगी। साथ ही इससे अधिक की बिक्री के लिए अनुमति लेना जरूरी है। भंडारण का लाइसेंस शहरी और विकसित क्षेत्र में नहीं दिया जाएगा।
विज्ञापन
अवैध भंडारण पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना और खनिज मूल्य की वसूली की जाएगी। भंडारण लाइसेंस के खिलाफ शर्तों का उल्लंघन करने की शिकायत मिलने पर लाइसेंस धारक को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। लाइसेंस धारक के पक्ष में संतुष्ट नहीं होने पर डीएम भंडारण का लाइसेंस निरस्त कर सकेंगे।
इनसेट
भंडारण का आवेदन शुल्क भी बढ़ा
खनन सामग्री के भंडारण के लिए आवेदन शुल्क बढ़ा दिया गया है। अब तक आवेदक को दो हजार रुपये के साथ फार्म जमा करना होता था। लेकिन अब इसमें बढ़ोत्तरी कर दस हजार कर दिया गया है। इसके अलावा आवेदक को एनओसी, चरित्र प्रमाण पत्र, अदेयता प्रमाण पत्र आदि लगाने होंगे।
खनिज बहुल इलाके से दूर करना होगा भंडारण
बालू का भंडारण खनिज बहुल इलाके से दूर करना होगा। इसके लिए कम से कम दस किलोमीटर की दूरी तय की गई है। खनिज बहुल इलाके के दस किलोमीटर की परिधि में बालू का भंडारण नहीं किया जा सकता है।
- 30 जनवरी तक खत्म करना है पुरानी बालू का भंडारण
नई खनन नीति के तहत पिछले साल से किया गया बालू भंडारण अब 30 जनवरी तक खत्म किया जाना है। इसके बाद नई नीति के तहत ही बालू भंडारण के लाइसेंस मिलेंगे। अभी जिले में चार ही स्थानों पर बालू का भंडारण बचा है। अन्य तीन जगह बालू खत्म हो गई है।
कोट
बालू भंडारण की नई नीति एक जनवरी से लागू हो गई है। इसमें कई नियमों में बदलाव किया गया है। साथ ही पिछले साल के भंडारण लाइसेंस 30 जनवरी के बाद समाप्त कर दिए जाएंगे। - डॉ. सुशील कुमार, जिला खनन निरीक्षक
विज्ञापन
अवैध खनन रोकने के लिए लगातार प्रयास किए जाते रहे हैं। इसी के चलते अब यह नई व्यवस्था लागू की गई है कि खदान के पट्टा धारकों को भंडारण का लाइसेंस नहीं दिया जाएगा। हालांकि पट्टा धारक निजी उपयोग के लिए खनिज का भंडारण कर सकेंगे। साथ ही बालू मौरंग के भंडारण का लाइसेंस अब सिर्फ तीन वर्ष के लिए ही दिया जाएगा। भंडारण लाइसेंस का नवीनीकरण भी अधिकतम दो वर्ष के लिए होगा।
विज्ञापन
फुटकर विक्रेताओं को भी लाइसेंस से मुक्त कर दिया गया है। सौ घन मीटर तक की क्षमता में बालू, मौरंग का भंडारण करने पर डीएम को सूचना देनी होगी। साथ ही इससे अधिक की बिक्री के लिए अनुमति लेना जरूरी है। भंडारण का लाइसेंस शहरी और विकसित क्षेत्र में नहीं दिया जाएगा।
विज्ञापन
अवैध भंडारण पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना और खनिज मूल्य की वसूली की जाएगी। भंडारण लाइसेंस के खिलाफ शर्तों का उल्लंघन करने की शिकायत मिलने पर लाइसेंस धारक को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। लाइसेंस धारक के पक्ष में संतुष्ट नहीं होने पर डीएम भंडारण का लाइसेंस निरस्त कर सकेंगे।
इनसेट
भंडारण का आवेदन शुल्क भी बढ़ा
खनन सामग्री के भंडारण के लिए आवेदन शुल्क बढ़ा दिया गया है। अब तक आवेदक को दो हजार रुपये के साथ फार्म जमा करना होता था। लेकिन अब इसमें बढ़ोत्तरी कर दस हजार कर दिया गया है। इसके अलावा आवेदक को एनओसी, चरित्र प्रमाण पत्र, अदेयता प्रमाण पत्र आदि लगाने होंगे।
खनिज बहुल इलाके से दूर करना होगा भंडारण
बालू का भंडारण खनिज बहुल इलाके से दूर करना होगा। इसके लिए कम से कम दस किलोमीटर की दूरी तय की गई है। खनिज बहुल इलाके के दस किलोमीटर की परिधि में बालू का भंडारण नहीं किया जा सकता है।
- 30 जनवरी तक खत्म करना है पुरानी बालू का भंडारण
नई खनन नीति के तहत पिछले साल से किया गया बालू भंडारण अब 30 जनवरी तक खत्म किया जाना है। इसके बाद नई नीति के तहत ही बालू भंडारण के लाइसेंस मिलेंगे। अभी जिले में चार ही स्थानों पर बालू का भंडारण बचा है। अन्य तीन जगह बालू खत्म हो गई है।
कोट
बालू भंडारण की नई नीति एक जनवरी से लागू हो गई है। इसमें कई नियमों में बदलाव किया गया है। साथ ही पिछले साल के भंडारण लाइसेंस 30 जनवरी के बाद समाप्त कर दिए जाएंगे। - डॉ. सुशील कुमार, जिला खनन निरीक्षक