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एमएमयूटी के एंट्रेंस में अर्चिसा ने लहराया परचम
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मदन मोहन मालवीय टेक्नीकल यूनिवर्सिटी गोरखपुर के बीटेक एंट्रेंस में जिले की छात्रा अर्चिशा सिंह ने परचम फराया है। उन्होंने छात्राओं में जहां पहली रैंक हासिल की है, वहीं सामान्य रैंकिंग में वह नौवें स्थान पर काबिज हैं। उनकी इस सफलता से परिवार के लोग गदगद हैं।
फर्रुखाबाद नगर से सटे गांव नगला खैरबंद निवासी वकील सचेश्वर सिंह की बेटी अर्चिशा शुरू से ही पढ़ाई में अच्छी थीं। उन्होंने फर्रुखाबाद के भोपत पट्टी स्थित सरस्वती विद्या मंदिर से हाईस्कूल की परीक्षा 2015 में 89 प्रतिशत अंक के साथ पास की थी।
शुरू से ही वह इंजीनियरिंग करना चाहती थीं। इसी के चलते इसी साल उन्होंने पॉलिटेक्निक की प्रवेश परीक्षा दी थी। पहली बार में ही उन्होंने इसे पास कर लिया। इसके बाद उन्होंने राजकीय पॉलिटेक्निक शाहजहांपुर से 2018 में सिविल इंजीनियरिंग 85 प्रतिशत अंकों के साथ पास की।
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इसके बाद वह बीई में प्रवेश की तैयारी में जुट गईं। एक साल तैयारी के बाद ही उन्होंने एमएमएमटीयू की प्रवेश परीक्षा (लैटरली एंट्री) में लड़कियों की रैंक में पहला व जनरल रैंक में नौवां स्थान हासिल किया। उन्होंने बताया कि वह सिविल इंजीनियरिंग कर देश के विकास में अपना हाथ बटना चाहती हैं। वह देश को इन्फ्राइस्ट्रक्चर के मामले में अमेरिका, ब्रिटेन व फ्रांस जैसे विकसित देशों जैसा देखने की इच्छा रखती हैं।
लैटरल एंट्री प्रवेश परीक्षा पॉलिटेक्निक या इसके समकक्ष कोर्स को करने वाले छात्रों के लिए ही होती है। इस परीक्षा को पास करने के बाद बैचलर डिग्री के लिए सीधे दूसरे वर्ष में एंट्री मिलती है।
एमएमयूटी के एंट्रेंस में अर्चिशा ने लहराया परचम
फर्रुखाबाद की बेटी ने बीई में गर्ल्स में हासिल की पहली रैंक
सामान्य रैंकिंग में नौवें स्थान पर हैं अर्चिसा
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फर्रुखाबाद नगर से सटे गांव नगला खैरबंद निवासी वकील सचेश्वर सिंह की बेटी अर्चिशा शुरू से ही पढ़ाई में अच्छी थीं। उन्होंने फर्रुखाबाद के भोपत पट्टी स्थित सरस्वती विद्या मंदिर से हाईस्कूल की परीक्षा 2015 में 89 प्रतिशत अंक के साथ पास की थी।
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शुरू से ही वह इंजीनियरिंग करना चाहती थीं। इसी के चलते इसी साल उन्होंने पॉलिटेक्निक की प्रवेश परीक्षा दी थी। पहली बार में ही उन्होंने इसे पास कर लिया। इसके बाद उन्होंने राजकीय पॉलिटेक्निक शाहजहांपुर से 2018 में सिविल इंजीनियरिंग 85 प्रतिशत अंकों के साथ पास की।
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इसके बाद वह बीई में प्रवेश की तैयारी में जुट गईं। एक साल तैयारी के बाद ही उन्होंने एमएमएमटीयू की प्रवेश परीक्षा (लैटरली एंट्री) में लड़कियों की रैंक में पहला व जनरल रैंक में नौवां स्थान हासिल किया। उन्होंने बताया कि वह सिविल इंजीनियरिंग कर देश के विकास में अपना हाथ बटना चाहती हैं। वह देश को इन्फ्राइस्ट्रक्चर के मामले में अमेरिका, ब्रिटेन व फ्रांस जैसे विकसित देशों जैसा देखने की इच्छा रखती हैं।
लैटरल एंट्री प्रवेश परीक्षा पॉलिटेक्निक या इसके समकक्ष कोर्स को करने वाले छात्रों के लिए ही होती है। इस परीक्षा को पास करने के बाद बैचलर डिग्री के लिए सीधे दूसरे वर्ष में एंट्री मिलती है।
एमएमयूटी के एंट्रेंस में अर्चिशा ने लहराया परचम
फर्रुखाबाद की बेटी ने बीई में गर्ल्स में हासिल की पहली रैंक
सामान्य रैंकिंग में नौवें स्थान पर हैं अर्चिसा