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किताबों को जलाने के प्रकरण में जिम्मेदारों ने साधी चुप्पी
Updated Tue, 18 Sep 2018 11:35 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फर्रुखाबाद। नौनिहालों को बांटी जाने वाले नि:शुल्क किताबों को जलाने के प्रकरण में विभागीय कोई अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है। जिम्मेदारों ने चुप्पी साध ली है। नगर शिक्षा अधिकारी बोले बीएसए सेमीनार में लखनऊ गए हैं। उनके लौटने के बाद ही मामले में कार्रवाई होगी।
नरेंद्र सरीन स्कूल में एक प्राथमिक और एक जूनियर विद्यालय के अलावा वैकल्पिक शिक्षा के तहत नि:शक्तों का आवासीय कैंप चल रहा है। इस कैंप में वार्डन बच्चों के साथ रहती हैं। विद्यालय के कमरों में भरी वर्ष 2017-18 की पुरानी किताबों को सोमवार सुबह जलते हुए विभागीय अधिकारियों ने पकड़ा था। अब इस प्रकरण को अधिकारी दबाने की जुगत में लग गए हैं। नगर शिक्षा अधिकारी सोमवीर को प्रकरण की जांच दी गई। उन्होंने स्कूल में पहुंचने के बाद पूछताछ की, लेकिन बताने से मना कर दिया। उनका कहना है कि बीएसए के आने के बाद ही प्रकरण में कौन दोषी है, इसकी स्थिति स्पष्ट होगी।
शिक्षक गंगेश शुक्ला को किताबों का भंडार प्रभारी बनाया गया था। सेवानिवृत्त शिक्षक अपने परिवार की फर्म पर किताबों को एनपीआरसी पर पहुंचाने का ठेका लिए है। इसके अलावा डीसी बालिका शिक्षा किताबों के वितरण का हिसाब रखती है। नि:शक्तों के चल रहे कैंप प्रभारी राजेश वर्मा भी स्कूल में कैंप की देखरेख को आते जाते है। किताबों के जलने के बाद अब कोई भी जिम्मेदार बोलने को तैयार नहीं है। सभी ने चुप्पी साध ली है। सीडीओ अपूर्वा दुबे ने बताया कि किताबों को जलाने के प्रकरण की जांच रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। रिपोर्ट को तलब किया गया है। वह डीएम के पास भेजी जाएगी।
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फर्रुखाबाद। नौनिहालों को बांटी जाने वाले नि:शुल्क किताबों को जलाने के प्रकरण में विभागीय कोई अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है। जिम्मेदारों ने चुप्पी साध ली है। नगर शिक्षा अधिकारी बोले बीएसए सेमीनार में लखनऊ गए हैं। उनके लौटने के बाद ही मामले में कार्रवाई होगी।
नरेंद्र सरीन स्कूल में एक प्राथमिक और एक जूनियर विद्यालय के अलावा वैकल्पिक शिक्षा के तहत नि:शक्तों का आवासीय कैंप चल रहा है। इस कैंप में वार्डन बच्चों के साथ रहती हैं। विद्यालय के कमरों में भरी वर्ष 2017-18 की पुरानी किताबों को सोमवार सुबह जलते हुए विभागीय अधिकारियों ने पकड़ा था। अब इस प्रकरण को अधिकारी दबाने की जुगत में लग गए हैं। नगर शिक्षा अधिकारी सोमवीर को प्रकरण की जांच दी गई। उन्होंने स्कूल में पहुंचने के बाद पूछताछ की, लेकिन बताने से मना कर दिया। उनका कहना है कि बीएसए के आने के बाद ही प्रकरण में कौन दोषी है, इसकी स्थिति स्पष्ट होगी।
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शिक्षक गंगेश शुक्ला को किताबों का भंडार प्रभारी बनाया गया था। सेवानिवृत्त शिक्षक अपने परिवार की फर्म पर किताबों को एनपीआरसी पर पहुंचाने का ठेका लिए है। इसके अलावा डीसी बालिका शिक्षा किताबों के वितरण का हिसाब रखती है। नि:शक्तों के चल रहे कैंप प्रभारी राजेश वर्मा भी स्कूल में कैंप की देखरेख को आते जाते है। किताबों के जलने के बाद अब कोई भी जिम्मेदार बोलने को तैयार नहीं है। सभी ने चुप्पी साध ली है। सीडीओ अपूर्वा दुबे ने बताया कि किताबों को जलाने के प्रकरण की जांच रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। रिपोर्ट को तलब किया गया है। वह डीएम के पास भेजी जाएगी।
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