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यादवों का गढ़ बन गई मोहम्मदाबाद नगर पंचायत
Updated Mon, 16 Oct 2017 11:51 PM IST
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मोहम्मदाबाद। करीब 22 साल पहले गठित नगर पंचायत मोहम्मदाबाद यादवों के गढ़ में तब्दील हुई है। यहां अब तक के सभी चुनावों में यादव बिरादरी का प्रत्याशी ही अध्यक्ष चुना गया है। लगातार दो बार से ऊषा यादव अध्यक्ष हैं, इसके पहले उनके पति भी इस पद पर रह चुके हैं। ग्राम पंचायत के कार्यकाल में भी केवल एक बार ठाकुर बिरादरी के गंगा सिंह चंदेल प्रधान बने थे।
मोहम्मदाबाद ग्राम पंचायत को 1995 में नगर पंचायत का दर्जा दे दिया गया था। मोहम्मदाबाद और उसके मजरे रोहिला को बनाकर ये नगर पंचायत बनी है। रोहिला में 90 फीसदी आबादी यादव जाति की है। यादव बाहुल्य इस नगर पंचायत में पहला चुनाव 1996 में हुआ था। इसमें सपा समर्थित उम्मीदवार सेवानिवृत्त आईजी भारत सिंह यादव और भाजपा प्रत्याशी ओम प्रकाश बाथम पत्रकार के बीच कड़ा मुकाबला हुआ था। इसमें 4375 हासिल कर भारत ने ओम प्रकाश को 175 वोट से शिकस्त दी थी।
ओम प्रकाश को 4200 वोट मिले थे। वर्ष 2001 में हुए दूसरे चुनाव में अशोक यादव उर्फ ललुआ ने जेल से पर्चा दाखिल किया। उनके लिए पत्नी ऊषा यादव और परिजनों ने वोट मांगे। ललुआ का मुकाबला बसपा और भाजपा के संयुक्त प्रत्याशी शिक्षक अमर सिंह वर्मा से हुआ। लोधी बिरादरी के अमर ने ललुआ को कड़ी टक्कर दी, लेकिन 81 वोट से मात खा गए। वर्ष 2007 में अध्यक्ष की सीट सामान्य हो गई। हत्या में सजा होने के कारण ललुआ यादव चुनाव लड़ने से अयोग्य हो गए।
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इस पर उन्होंने पत्नी ऊषा यादव को मैरान में उतार दिया। सपा समर्थित ऊषा का मुकाबाला फिर बसपा के अमर सिंह वर्मा से हुआ। ऊषा ने 3800 वोट हासिल कर अमर को 2522 वोटों से करारी शिकस्त दी। अमर को 1278 और भाजपा प्रत्याशी रवि राठौर को 1178 वोट मिले थे। वर्ष 2012 में सीट पिछड़ा वर्ग महिला के आरक्षित हो गई। अपने काम की बदौलत ऊषा फिर मैदान में उतरीं और 1300 वोटों से जीत दर्ज की। उनका मुकाबला भाजपा की भारती देवी पत्नी सत्यनारायण से हुआ। भारती को 1950 और निर्दलीय बबलेश यादव को 1850 वोट मिले थे।
इस बार सीट फिर सामान्य (अनारक्षित) हो गई है। इससे ऊषा ने फिर मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है। पिछली हार का बदला चुकाने के लिए सत्यनारायण भाजपा से टिकट मांग रहे हैं। इसके अलावा भाजपा से बृजेश दुबे, राजेश वर्मा स्वर्णकार, प्रदीप कौशल ने दावा पेश कर दिया है। सपा से ऊषा के अलावा पुलिस से सेवानिवृत्त हरीश यादव और गोपाल यादव भी टिकट मांग रहे हैं।
नवाबगंज में पंचायत चुनाव न होने से निराशा
नवाबगंज (ब्यूरो)। अखिलेश सरकार ने विधानसभा चुनाव के ठीक पहले नवाबगंज को नगर पंचायत का दर्जा दे दिया है। कैबिनेट ने भी इस प्रस्ताव पर मोहर लगा दी थी। अभी नवाबगंज ग्राम पंचायत गनीपुर जोगपुर का मजरा है। किंतु ब्लॉक मुख्यालय होने के कारण इस नगर पंचायत मुख्यालय का नाम दे दिया गया था। इस नगर पंचायत में सिरमोहरा बांगर, रायपुर, वर्तन, ईमानदपुर चंदनी, सिकंदरपुर नैरोता ग्राम पंचायतों को भी जोड़ा गया था। इससे प्रस्तावित नगर पंचायत की आबादी लगभग 25000 हो गई थी। केबिनेट में नवाबगंज को नगर पंचायत बनाने का प्रस्ताव पास होने के बाद लोगों में खुशी की लहर थी। निकाय चुनाव की उम्मीद में कई नेताओं ने होर्डिंग बैनर भी लगा दिए थे। किंतु सूबे में सरकार बनने और निकाय चुनाव का मामला कोर्ट तक पहुंचने के कारण भाजपा सरकार ने नवाबगंज नगर पंचायत के मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। इससे लोगों के चेहरों पर निराशा है।
आप भी लड़ाएगी सिंबल पर चुनाव
फर्रुखाबाद (ब्यूरो)। निकाय चुनाव लड़ने के लिए आम आदमी पार्टी ने भी कमर कस ली है। संगठन प्रभारी राकेश शुक्ला ने बताया कि पार्टी पूरी दमदारी से जिले में निकाय चुनाव लड़ेगी। दावेदार अपना आवेदन जिला कार्यालय में दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि टिकट उसी को दिया जाएगा, जिसकी छवि समाज में स्वच्छ होगी। मीडिया प्रभारी राजगौरव पांडेय ने कहा कि निकाय चुनाव दिल्ली में पार्टी द्वारा कराए गए विकास कार्यों के आधार पर लड़ा जाएगा।
-गठन के बाद से इसी बिरादरी का प्रत्याशी बन रहा अध्यक्ष
-लगातार तीन बार से सीट पर अशोक के परिवार का कब्जा
अमर उजाला ब्यूरो
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मोहम्मदाबाद ग्राम पंचायत को 1995 में नगर पंचायत का दर्जा दे दिया गया था। मोहम्मदाबाद और उसके मजरे रोहिला को बनाकर ये नगर पंचायत बनी है। रोहिला में 90 फीसदी आबादी यादव जाति की है। यादव बाहुल्य इस नगर पंचायत में पहला चुनाव 1996 में हुआ था। इसमें सपा समर्थित उम्मीदवार सेवानिवृत्त आईजी भारत सिंह यादव और भाजपा प्रत्याशी ओम प्रकाश बाथम पत्रकार के बीच कड़ा मुकाबला हुआ था। इसमें 4375 हासिल कर भारत ने ओम प्रकाश को 175 वोट से शिकस्त दी थी।
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ओम प्रकाश को 4200 वोट मिले थे। वर्ष 2001 में हुए दूसरे चुनाव में अशोक यादव उर्फ ललुआ ने जेल से पर्चा दाखिल किया। उनके लिए पत्नी ऊषा यादव और परिजनों ने वोट मांगे। ललुआ का मुकाबला बसपा और भाजपा के संयुक्त प्रत्याशी शिक्षक अमर सिंह वर्मा से हुआ। लोधी बिरादरी के अमर ने ललुआ को कड़ी टक्कर दी, लेकिन 81 वोट से मात खा गए। वर्ष 2007 में अध्यक्ष की सीट सामान्य हो गई। हत्या में सजा होने के कारण ललुआ यादव चुनाव लड़ने से अयोग्य हो गए।
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इस पर उन्होंने पत्नी ऊषा यादव को मैरान में उतार दिया। सपा समर्थित ऊषा का मुकाबाला फिर बसपा के अमर सिंह वर्मा से हुआ। ऊषा ने 3800 वोट हासिल कर अमर को 2522 वोटों से करारी शिकस्त दी। अमर को 1278 और भाजपा प्रत्याशी रवि राठौर को 1178 वोट मिले थे। वर्ष 2012 में सीट पिछड़ा वर्ग महिला के आरक्षित हो गई। अपने काम की बदौलत ऊषा फिर मैदान में उतरीं और 1300 वोटों से जीत दर्ज की। उनका मुकाबला भाजपा की भारती देवी पत्नी सत्यनारायण से हुआ। भारती को 1950 और निर्दलीय बबलेश यादव को 1850 वोट मिले थे।
इस बार सीट फिर सामान्य (अनारक्षित) हो गई है। इससे ऊषा ने फिर मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है। पिछली हार का बदला चुकाने के लिए सत्यनारायण भाजपा से टिकट मांग रहे हैं। इसके अलावा भाजपा से बृजेश दुबे, राजेश वर्मा स्वर्णकार, प्रदीप कौशल ने दावा पेश कर दिया है। सपा से ऊषा के अलावा पुलिस से सेवानिवृत्त हरीश यादव और गोपाल यादव भी टिकट मांग रहे हैं।
नवाबगंज में पंचायत चुनाव न होने से निराशा
नवाबगंज (ब्यूरो)। अखिलेश सरकार ने विधानसभा चुनाव के ठीक पहले नवाबगंज को नगर पंचायत का दर्जा दे दिया है। कैबिनेट ने भी इस प्रस्ताव पर मोहर लगा दी थी। अभी नवाबगंज ग्राम पंचायत गनीपुर जोगपुर का मजरा है। किंतु ब्लॉक मुख्यालय होने के कारण इस नगर पंचायत मुख्यालय का नाम दे दिया गया था। इस नगर पंचायत में सिरमोहरा बांगर, रायपुर, वर्तन, ईमानदपुर चंदनी, सिकंदरपुर नैरोता ग्राम पंचायतों को भी जोड़ा गया था। इससे प्रस्तावित नगर पंचायत की आबादी लगभग 25000 हो गई थी। केबिनेट में नवाबगंज को नगर पंचायत बनाने का प्रस्ताव पास होने के बाद लोगों में खुशी की लहर थी। निकाय चुनाव की उम्मीद में कई नेताओं ने होर्डिंग बैनर भी लगा दिए थे। किंतु सूबे में सरकार बनने और निकाय चुनाव का मामला कोर्ट तक पहुंचने के कारण भाजपा सरकार ने नवाबगंज नगर पंचायत के मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। इससे लोगों के चेहरों पर निराशा है।
आप भी लड़ाएगी सिंबल पर चुनाव
फर्रुखाबाद (ब्यूरो)। निकाय चुनाव लड़ने के लिए आम आदमी पार्टी ने भी कमर कस ली है। संगठन प्रभारी राकेश शुक्ला ने बताया कि पार्टी पूरी दमदारी से जिले में निकाय चुनाव लड़ेगी। दावेदार अपना आवेदन जिला कार्यालय में दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि टिकट उसी को दिया जाएगा, जिसकी छवि समाज में स्वच्छ होगी। मीडिया प्रभारी राजगौरव पांडेय ने कहा कि निकाय चुनाव दिल्ली में पार्टी द्वारा कराए गए विकास कार्यों के आधार पर लड़ा जाएगा।
-गठन के बाद से इसी बिरादरी का प्रत्याशी बन रहा अध्यक्ष
-लगातार तीन बार से सीट पर अशोक के परिवार का कब्जा
अमर उजाला ब्यूरो