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बुद्ध पूर्णिमा पर निकली धम्म यात्रा में झूमे अनुयायी
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बुद्ध पूर्णिमा पर शनिवार सुबह धम्म यात्रा निकाली गई। इसमें सजी भगवान बुद्ध की झांकियों के साथ बौद्ध अनुयायी भक्ति गीतों का झूमते चल रहे थे। भ्रमण के बाद धार्मिक स्थल पर बुद्ध वंदना व अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
बौद्ध तीर्थ स्थल संकिसा में शनिवार सुबह 7.30 बजे धम्मा लोको बुद्ध विहार से धम्म यात्रा का शुभारंभ हुआ। इसमें तीन झांकियां शामिल थीं। भगवान बुद्ध के भक्ति गीतों की धुन पर बौद्ध अनुयायी थिरकते चल रहे थे। इस दौरान जब तक सूरज चांद रहेगा बौद्ध धर्म का नाम रहेगा, घर-घर दीप जलाएंगे बौद्ध धर्म अपनाएंगे, बौद्ध धर्म की क्या पहचान मानव-मानव एक समान आदि नारे लगाए गए।
इसके बाद अनुयायी धार्मिक स्थल (टीले) पर पहुंचे। वहां परिक्रमा के बाद मोमबत्ती, अगरबत्ती लगाकर बुद्ध वंदना, धम्म वंदना व चेत्र वंदना की गई। डा. धम्मपाल थैरो ने धम्म पाठ पढ़ाया। उन्होंने बताया कि संकिसा में पुस्तकों का भंडार है।
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बुद्ध ने यहां पर पैर रखा, उसी पैर पर अशोक ने अशोक चक्र बनाया। गज स्तंभ अशोक ने दिया। बुद्ध वंशावली में यह प्रमाण मिलता है कि स्तूप के ऊपर कोई भी नहीं जाए। क्योंकि स्तूप में भगवान बुद्ध की अस्थियां रखी हैं।
यदि हम लोग स्तूप पर जाएंगे तो इसमें भगवान बुद्ध का अपमान होगा। स्तूप की परिक्रमा करनी चाहिए। विश्व में 84000 स्तूप हैं। उन पर कोई नहीं चढ़ता है। सभी को पंचशील सिद्धांत मानते हुए शराब, धूम्रपान आदि व्यसनों को छोड़ देना चाहिए।
विश्व में हर जगह बुद्ध पूर्णिमा मनाई जाती है। त्रिपिटक में संकिसा का प्रथम स्थान है। धम्म यात्रा में पूर्व कैबिनेट मंत्री टी प्रसाद सिंह की पत्नी मैत्रीय शाक्य, नंदरतन थैरो, डा. देवेश भंते, गुणसागर भंते अश्वघोष भंते, आनंद मित्र भंते, संघ कीर्ति के अलावा कायमगंज तहसीलदार भोपाल सिंह, सीओ अखिलेश राय व थानाध्यक्ष महेंद्र कुमार त्रिपाठी आदि मौजूद रहे। उधर, शमसाबाद के मोहल्ला मुरली नगर में भी धम्म यात्रा निकाली गई।
बुद्ध पूर्णिमा पर निकली धम्म यात्रा, झूमे अनुयायी
परिक्रमा के बाद मोमबत्ती लगाकर की बुद्ध, धम्म व चेत्र वंदना
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बौद्ध तीर्थ स्थल संकिसा में शनिवार सुबह 7.30 बजे धम्मा लोको बुद्ध विहार से धम्म यात्रा का शुभारंभ हुआ। इसमें तीन झांकियां शामिल थीं। भगवान बुद्ध के भक्ति गीतों की धुन पर बौद्ध अनुयायी थिरकते चल रहे थे। इस दौरान जब तक सूरज चांद रहेगा बौद्ध धर्म का नाम रहेगा, घर-घर दीप जलाएंगे बौद्ध धर्म अपनाएंगे, बौद्ध धर्म की क्या पहचान मानव-मानव एक समान आदि नारे लगाए गए।
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इसके बाद अनुयायी धार्मिक स्थल (टीले) पर पहुंचे। वहां परिक्रमा के बाद मोमबत्ती, अगरबत्ती लगाकर बुद्ध वंदना, धम्म वंदना व चेत्र वंदना की गई। डा. धम्मपाल थैरो ने धम्म पाठ पढ़ाया। उन्होंने बताया कि संकिसा में पुस्तकों का भंडार है।
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बुद्ध ने यहां पर पैर रखा, उसी पैर पर अशोक ने अशोक चक्र बनाया। गज स्तंभ अशोक ने दिया। बुद्ध वंशावली में यह प्रमाण मिलता है कि स्तूप के ऊपर कोई भी नहीं जाए। क्योंकि स्तूप में भगवान बुद्ध की अस्थियां रखी हैं।
यदि हम लोग स्तूप पर जाएंगे तो इसमें भगवान बुद्ध का अपमान होगा। स्तूप की परिक्रमा करनी चाहिए। विश्व में 84000 स्तूप हैं। उन पर कोई नहीं चढ़ता है। सभी को पंचशील सिद्धांत मानते हुए शराब, धूम्रपान आदि व्यसनों को छोड़ देना चाहिए।
विश्व में हर जगह बुद्ध पूर्णिमा मनाई जाती है। त्रिपिटक में संकिसा का प्रथम स्थान है। धम्म यात्रा में पूर्व कैबिनेट मंत्री टी प्रसाद सिंह की पत्नी मैत्रीय शाक्य, नंदरतन थैरो, डा. देवेश भंते, गुणसागर भंते अश्वघोष भंते, आनंद मित्र भंते, संघ कीर्ति के अलावा कायमगंज तहसीलदार भोपाल सिंह, सीओ अखिलेश राय व थानाध्यक्ष महेंद्र कुमार त्रिपाठी आदि मौजूद रहे। उधर, शमसाबाद के मोहल्ला मुरली नगर में भी धम्म यात्रा निकाली गई।
बुद्ध पूर्णिमा पर निकली धम्म यात्रा, झूमे अनुयायी
परिक्रमा के बाद मोमबत्ती लगाकर की बुद्ध, धम्म व चेत्र वंदना