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विद्युतीकरण के लाखों रुपये वायरिंग मरम्मत पर खर्च
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फर्रुखाबाद। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विद्युतीकरण के लिए आए धन को वायरिंग की मरम्मत पर खर्च किया जा रहा है। इसमें शहर के आठ स्कूलों के लिए दो लाख एक हजार 504 रुपये का भुगतान ठेकेदार को कर दिया गया, जिसमें पहले से ही विद्युतीकरण था।
जिन स्कूलों में कभी बिजली पहुंची न हो, उनमें विद्युतीकरण के लिए शासन ने सूची मांगी थी। जिले से भेजी गई 347 स्कूलों की सूची में शहर के सभी 11 उच्च प्राथमिक स्कूल शामिल हैं, जबकि इनमें आठ विद्यालयों में पहले ही विद्युतीकरण है। शासन से अप्रैल 2018 में 29388 रुपये प्रति स्कूल के हिसाब से मिली धनराशि एसएमसी खातों में डाल दी गई। इसमें 17688 रुपये से वायरिंग, 7500 रुपये से पांच पंखे व ट्यूब लाइट खरीद के लिए व 4200 रुपये एक वर्ष का बिजली बिल शामिल है। इस धन से पहले से विद्युतीकृत स्कूलों में वायरिंग की मरम्मत कर दी गई। शहर के जिन आठ स्कूलों में पहले से बिजली कनेक्शन हैं वह सभी बिजली बिल के बकायेदार भी हैं।
तत्कालीन नगर शिक्षा अधिकारी सोमवीर सिंह का कहना है कि उनसे स्कूलों की सूची मांगी गई थी, उस दौरान उन्हें विद्युतीकरण के बारे में बताया भी नहीं गया। विद्युतीकरण की धनराशि भी सीधे एसएमसी खाते में डाली गई। डीसी व बीएसए के अनुमोदन पर प्रधानाध्यापक ठेकेदारों को भुगतान कर रहे हैं। उनसे कोई लेना देना नहीं है।
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जिला समन्वयक दिलीप राजपूत ने बताया कि नगर व खंड शिक्षा अधिकारियों की सूची के आधार पर जिलाधिकारी के अनुमोदन से जर्जर वायरिंग होने से नई वायरिंग कराई गई। अब तक आठ स्कूलों का 25188 रुपये प्रति विद्यालय के हिसाब से ठेकेदारों का भुगतान किया गया है।
आठ स्कूलों के पंखे गायब
आठ स्कूलों में पहले से बिजली कनेक्शन था। वहां पंखे व ट्यूब लाइटें लगाई गईं थी। अब नई वायरिंग कराने के साथ नए पंखे व ट्यूब लाइटें लगाने का भुगतान ठेकेदार को कर दिया गया है। सवाल उठता कि जो पंखे व ट्यूब लाइटें वहां पहले से लगी थीं वे कहां गईं। जिला समन्वयक दिलीप राजपूत से जब पुराने पंखों के बारे में पूछा गया तो वह चुप्पी साध गए। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में भी कई स्कूलों की जर्जर वायरिंग ठीक कराई गई है।
हाल देखिए स्कूलों की वायरिंग का
कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय बढ़पुर में मई में वायरिंग की गई। इसमें चार नए पंखे लगाए जाने की बात प्रधानाध्यपिका रेशमा बानो बता रही हैं। पर, एक कक्षा कक्ष में पंखे को चालू करने के लिए तार ही नहीं डाले गए हैं। केवल पंखा लटका दिया गया है। जो चार पंखे लटके हैं, उनकी स्थिति से वह भी नए नहीं लग रहे हैं। जबकि पांच पंखों व पांच ट्यूब लाइट का भुगतान किया गया। स्कूल में ट्यूब लाइट तो एक भी नहीं लगी है। तीन एलईडी बल्ब ही लगे हैं। इसके अलावा शांति पूर्व माध्यमिक विद्यालय भोलेपुर की प्रधानाध्यापिका कमलेश चौधरी का कहना है कि उनके स्कूल में चार नए पंखे व तीन एलईडी बल्ब लगाए गए हैं। कुछ वायरिंग ठीक होने से उखाड़ा नहीं गया। जो वायरिंग उखड़ गई थी, उसे सही करा दिया गया है। दो पुराने पंखे भी स्कूल में लगे हैं। नगर शिक्षा अधिकारी के आदेश पर उन्होंने ठेकेदार को 25 हजार 188 रुपये का चेक देकर भुगतान कर दिया।
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जिन स्कूलों में कभी बिजली पहुंची न हो, उनमें विद्युतीकरण के लिए शासन ने सूची मांगी थी। जिले से भेजी गई 347 स्कूलों की सूची में शहर के सभी 11 उच्च प्राथमिक स्कूल शामिल हैं, जबकि इनमें आठ विद्यालयों में पहले ही विद्युतीकरण है। शासन से अप्रैल 2018 में 29388 रुपये प्रति स्कूल के हिसाब से मिली धनराशि एसएमसी खातों में डाल दी गई। इसमें 17688 रुपये से वायरिंग, 7500 रुपये से पांच पंखे व ट्यूब लाइट खरीद के लिए व 4200 रुपये एक वर्ष का बिजली बिल शामिल है। इस धन से पहले से विद्युतीकृत स्कूलों में वायरिंग की मरम्मत कर दी गई। शहर के जिन आठ स्कूलों में पहले से बिजली कनेक्शन हैं वह सभी बिजली बिल के बकायेदार भी हैं।
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तत्कालीन नगर शिक्षा अधिकारी सोमवीर सिंह का कहना है कि उनसे स्कूलों की सूची मांगी गई थी, उस दौरान उन्हें विद्युतीकरण के बारे में बताया भी नहीं गया। विद्युतीकरण की धनराशि भी सीधे एसएमसी खाते में डाली गई। डीसी व बीएसए के अनुमोदन पर प्रधानाध्यापक ठेकेदारों को भुगतान कर रहे हैं। उनसे कोई लेना देना नहीं है।
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जिला समन्वयक दिलीप राजपूत ने बताया कि नगर व खंड शिक्षा अधिकारियों की सूची के आधार पर जिलाधिकारी के अनुमोदन से जर्जर वायरिंग होने से नई वायरिंग कराई गई। अब तक आठ स्कूलों का 25188 रुपये प्रति विद्यालय के हिसाब से ठेकेदारों का भुगतान किया गया है।
आठ स्कूलों के पंखे गायब
आठ स्कूलों में पहले से बिजली कनेक्शन था। वहां पंखे व ट्यूब लाइटें लगाई गईं थी। अब नई वायरिंग कराने के साथ नए पंखे व ट्यूब लाइटें लगाने का भुगतान ठेकेदार को कर दिया गया है। सवाल उठता कि जो पंखे व ट्यूब लाइटें वहां पहले से लगी थीं वे कहां गईं। जिला समन्वयक दिलीप राजपूत से जब पुराने पंखों के बारे में पूछा गया तो वह चुप्पी साध गए। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में भी कई स्कूलों की जर्जर वायरिंग ठीक कराई गई है।
हाल देखिए स्कूलों की वायरिंग का
कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय बढ़पुर में मई में वायरिंग की गई। इसमें चार नए पंखे लगाए जाने की बात प्रधानाध्यपिका रेशमा बानो बता रही हैं। पर, एक कक्षा कक्ष में पंखे को चालू करने के लिए तार ही नहीं डाले गए हैं। केवल पंखा लटका दिया गया है। जो चार पंखे लटके हैं, उनकी स्थिति से वह भी नए नहीं लग रहे हैं। जबकि पांच पंखों व पांच ट्यूब लाइट का भुगतान किया गया। स्कूल में ट्यूब लाइट तो एक भी नहीं लगी है। तीन एलईडी बल्ब ही लगे हैं। इसके अलावा शांति पूर्व माध्यमिक विद्यालय भोलेपुर की प्रधानाध्यापिका कमलेश चौधरी का कहना है कि उनके स्कूल में चार नए पंखे व तीन एलईडी बल्ब लगाए गए हैं। कुछ वायरिंग ठीक होने से उखाड़ा नहीं गया। जो वायरिंग उखड़ गई थी, उसे सही करा दिया गया है। दो पुराने पंखे भी स्कूल में लगे हैं। नगर शिक्षा अधिकारी के आदेश पर उन्होंने ठेकेदार को 25 हजार 188 रुपये का चेक देकर भुगतान कर दिया।