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रेलवे स्टेशन पर ठप हुई जलापूर्ति व बिजली
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
Updated Sat, 11 Jun 2016 12:17 AM IST
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फैजाबाद रेलवे स्टेशन पर सूखे पड़े नल।
- फोटो : अमर उजाला
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आदर्श घोषित रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार सुबह नौ बजे बिजली-पानी गुल होने से हाहाकार मच गया। यात्री बोतल और डिब्बे लेकर टोंटियों के पास दौड़ते व व्यवस्था को कोसते नजर आए। इस दौरान स्टेशन पर पंखे भी खामोश थे।
यह स्थिति घटों रही, लेकिन स्टेशन प्रशासन का कहना है कि बिजली आते ही सब बहाल हो गया। लेकिन जनरेटर से आपूर्ति न करने पर अधिकारी चुप्पी साधते दिखे। उमसभरी गर्मी ने हर किसी को बेचैन कर रख दिया।
शुक्रवार सुबह स्टेशन के नलों में पानी नहीं आने की वजह से यात्रियों को बोतलबंद पानी खरीदने की मजबूरी रही। पंखा नहीं चलने की वजह से यात्री फर्श पर लेट पसीना बहाते नजर आए। बताते हैं कि सुबह नौ बजे स्टेशन पर आने वाले यात्रियों ने बूंद-बूंद पानी के लिए कदम-कदम पर दुश्वारियां झेली।
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इस दौरान जिम्मेदार खामोश रहे। उन्हें पता भी नहीं चला कि स्टेशन पर किसी प्रकार की विसंगति है। रुदौली की रहने वाली पार्वती बनारस से आईं और फैजाबाद जंक्शन पर उतरकर अपना हलक तर करना चाहा तो पता चला कि टोंटी में पानी ही नहीं आ रहा है।
उस समय पौने दस बज रहा था। रेलवे व्यवस्था को कोसती रहीं। मजबूरी में बोतलबंद पानी खरीदा और अपनी प्यास बुझाई। ऐसा ही हाल राहुल कनौजिया का रहा। वह अपने भाई को रिसीव करने के लिए रेलवे स्टेशन पर आए थे।
कनौजिया का भाई कोटा से घर आ रहा था। ट्रेन के आने में देरी हुई तो उन्हें प्यास लगी। वह पानी के लिए टोंटी की ओर लपके। पानी की टाेंटी से पानी नहीं आ रहा था। वह भी परेशान हुए और रेलवे कर्मचारी को खोजना शुरू किया, लेकिन उन्हें कोई बताने वाला नहीं।
वह थक-हार को बैठ गए। ऐसा ही कहना था कुचेरा निवासी राजू पाठक का है। उन्होंने बताया कि स्टेशन की व्यवस्था पूरी तरह से लचर है। जिनके हाथ में पंखा वह तो झल रहे हैं, लेकिन जो पंखा लेकर नहीं आए हैं वह कहां जाएं। अंबेडकरनगर के अरविंद ने कहा कि इतनी लचर व्यवस्था कहीं नहीं देखी। इस गर्मी में कम से कम पानी की व्यवस्था होनी चाहिए।
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यह स्थिति घटों रही, लेकिन स्टेशन प्रशासन का कहना है कि बिजली आते ही सब बहाल हो गया। लेकिन जनरेटर से आपूर्ति न करने पर अधिकारी चुप्पी साधते दिखे। उमसभरी गर्मी ने हर किसी को बेचैन कर रख दिया।
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शुक्रवार सुबह स्टेशन के नलों में पानी नहीं आने की वजह से यात्रियों को बोतलबंद पानी खरीदने की मजबूरी रही। पंखा नहीं चलने की वजह से यात्री फर्श पर लेट पसीना बहाते नजर आए। बताते हैं कि सुबह नौ बजे स्टेशन पर आने वाले यात्रियों ने बूंद-बूंद पानी के लिए कदम-कदम पर दुश्वारियां झेली।
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इस दौरान जिम्मेदार खामोश रहे। उन्हें पता भी नहीं चला कि स्टेशन पर किसी प्रकार की विसंगति है। रुदौली की रहने वाली पार्वती बनारस से आईं और फैजाबाद जंक्शन पर उतरकर अपना हलक तर करना चाहा तो पता चला कि टोंटी में पानी ही नहीं आ रहा है।
उस समय पौने दस बज रहा था। रेलवे व्यवस्था को कोसती रहीं। मजबूरी में बोतलबंद पानी खरीदा और अपनी प्यास बुझाई। ऐसा ही हाल राहुल कनौजिया का रहा। वह अपने भाई को रिसीव करने के लिए रेलवे स्टेशन पर आए थे।
कनौजिया का भाई कोटा से घर आ रहा था। ट्रेन के आने में देरी हुई तो उन्हें प्यास लगी। वह पानी के लिए टोंटी की ओर लपके। पानी की टाेंटी से पानी नहीं आ रहा था। वह भी परेशान हुए और रेलवे कर्मचारी को खोजना शुरू किया, लेकिन उन्हें कोई बताने वाला नहीं।
वह थक-हार को बैठ गए। ऐसा ही कहना था कुचेरा निवासी राजू पाठक का है। उन्होंने बताया कि स्टेशन की व्यवस्था पूरी तरह से लचर है। जिनके हाथ में पंखा वह तो झल रहे हैं, लेकिन जो पंखा लेकर नहीं आए हैं वह कहां जाएं। अंबेडकरनगर के अरविंद ने कहा कि इतनी लचर व्यवस्था कहीं नहीं देखी। इस गर्मी में कम से कम पानी की व्यवस्था होनी चाहिए।