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Ayodhya News: राम मंदिर के 30 बैंक लॉकरों का फोरेंसिक सत्यापन तेज
Wed, 26 Aug 2026 12:08 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Wed, 26 Aug 2026 12:08 AM IST
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राम मंदिर।
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अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी के प्रकरण की जांच अब दस्तावेजों से आगे बढ़कर भौतिक संपत्तियों और बैंक लॉकरों के फोरेंसिक सत्यापन तक पहुंच गई है। एसआईटी की फोरेंसिक ऑडिट टीम राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े सभी 30 बैंक लॉकरों में रखे सामान का सत्यापन कर रही है। जांच का फोकस यह मिलान करने पर है कि लॉकरों में दर्ज रिकॉर्ड के मुताबिक जो वस्तुएं होनी चाहिए, वे मौजूद हैं या नहीं।
जांच टीम ने मंगलवार को भी जांच प्रक्रिया पूरी की। जांच टीम लॉकर खोलने की प्रक्रिया से लेकर उसमें रखे प्रत्येक सामान का वीडियो रिकॉर्ड तैयार कर रही है। वस्तु की पहचान, उसकी संख्या, उपलब्धता और संबंधित अभिलेखों से मिलान की प्रक्रिया को जांच का हिस्सा बनाया गया है। इस पूरी कवायद का उद्देश्य भौतिक रूप से उपलब्ध सामग्री और ट्रस्ट के रिकॉर्ड के बीच किसी भी तरह के अंतर को चिह्नित करना है। फोरेंसिक सत्यापन के बाद तैयार होने वाली रिपोर्ट को डिजिटल माध्यम में सुरक्षित किया जाएगा।
जांच से जुड़े दस्तावेजों और वीडियोग्राफिक साक्ष्यों को पेन ड्राइव में संकलित कर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश किए जाने की तैयारी है। इससे जांच में जुटाए जा रहे भौतिक साक्ष्यों का डिजिटल रिकॉर्ड भी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बनेगा। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एसआईटी की जांच अंतिम चरण में है। सितंबर के पहले सप्ताह में जांच टीम सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है। दो सितंबर को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक भी होनी है। जानकारी के अनुसार इस बैठक के बीच अंतिम रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत की जाएगी।
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एक-एक वस्तु का डिजिटल साक्ष्य तैयार
फोरेंसिक ऑडिट में केवल सामान की गिनती तक प्रक्रिया सीमित नहीं है। प्रत्येक वस्तु के सत्यापन के साथ उसका ऑडियो-वीडियो साक्ष्य, विवरण और रिकॉर्ड से मिलान दर्ज किया जा रहा है। जांच से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित माध्यम में संरक्षित किया जा रहा है, ताकि आगे की न्यायिक प्रक्रिया में इसकी प्रमाणिकता बनी रहे। सूत्रों के मुताबिक सत्यापन के दौरान लॉकर में मौजूद वस्तुओं का रिकॉर्ड तैयार करने के साथ यह भी देखा जा रहा है कि संबंधित वस्तु किस अभिलेख में दर्ज है और मौके पर उसकी स्थिति क्या है।
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जांच टीम ने मंगलवार को भी जांच प्रक्रिया पूरी की। जांच टीम लॉकर खोलने की प्रक्रिया से लेकर उसमें रखे प्रत्येक सामान का वीडियो रिकॉर्ड तैयार कर रही है। वस्तु की पहचान, उसकी संख्या, उपलब्धता और संबंधित अभिलेखों से मिलान की प्रक्रिया को जांच का हिस्सा बनाया गया है। इस पूरी कवायद का उद्देश्य भौतिक रूप से उपलब्ध सामग्री और ट्रस्ट के रिकॉर्ड के बीच किसी भी तरह के अंतर को चिह्नित करना है। फोरेंसिक सत्यापन के बाद तैयार होने वाली रिपोर्ट को डिजिटल माध्यम में सुरक्षित किया जाएगा।
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जांच से जुड़े दस्तावेजों और वीडियोग्राफिक साक्ष्यों को पेन ड्राइव में संकलित कर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश किए जाने की तैयारी है। इससे जांच में जुटाए जा रहे भौतिक साक्ष्यों का डिजिटल रिकॉर्ड भी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बनेगा। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एसआईटी की जांच अंतिम चरण में है। सितंबर के पहले सप्ताह में जांच टीम सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है। दो सितंबर को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक भी होनी है। जानकारी के अनुसार इस बैठक के बीच अंतिम रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत की जाएगी।
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एक-एक वस्तु का डिजिटल साक्ष्य तैयार
फोरेंसिक ऑडिट में केवल सामान की गिनती तक प्रक्रिया सीमित नहीं है। प्रत्येक वस्तु के सत्यापन के साथ उसका ऑडियो-वीडियो साक्ष्य, विवरण और रिकॉर्ड से मिलान दर्ज किया जा रहा है। जांच से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित माध्यम में संरक्षित किया जा रहा है, ताकि आगे की न्यायिक प्रक्रिया में इसकी प्रमाणिकता बनी रहे। सूत्रों के मुताबिक सत्यापन के दौरान लॉकर में मौजूद वस्तुओं का रिकॉर्ड तैयार करने के साथ यह भी देखा जा रहा है कि संबंधित वस्तु किस अभिलेख में दर्ज है और मौके पर उसकी स्थिति क्या है।