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कोरोना से जान बचाने का वैक्सीन ही कारगर हथियार
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अयोध्या। कोरोना महामारी से खुद को बचाने के लिए टीकाकरण ही सबसे कारगर व उपयोगी हथियार है। यह बातें हवा-हवाई नहीं हैं, बल्कि आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। जिले में वैक्सीन की दोनों खुराक लगवा चुके लोग संक्रमित तो हुए हैं, लेकिन किसी को भी जान नहीं गंवानी पड़ी और लोगों ने कोरोना से जंग जीत ली।
बस, वैक्सीन लगवाने से पहले सतर्कता बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोरोना संक्रमण को लेकर किसी तरह का संदेह हो या लक्षण हों तो बिना जांच कराए टीका लगवाना नुकसानदायक भी हो सकता है। कोरोना वायरस की दूसरी लहर से स्वास्थ्य सेवाएं डगमगा सी गई हैं। वायरस के सीधे फेफड़ों पर हमला करने की वजह से पहली लहर की अपेक्षा कई गुना अधिक लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। अब तक इस महामारी से बचाव के लिए कोई दवा भी नहीं तैयार हो सकी है।
ऐसे में टीकाकरण ही इससे बचने का एकमात्र उपाय है, जिसे सबसे कारगर भी माना जा रहा है। जिले में 16 जनवरी से टीकाकरण शुरू किया गया है। स्वास्थ्य कर्मी, फ्रंटलाइन वर्कर्स के बाद से 60 वर्ष से अधिक, 45 वर्ष से अधिक के लोगों को टीके की खुराक लगवाने के बाद अब 18 वर्ष से अधिक लोगों के लिए टीकाकरण अभियान जिले में चल रहा है।
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अब तक जिले में 1,13,230 लोगों ने टीका लगवाया है। इनमें 36,703 लोगों की दूसरी डोज पूरी हो चुकी है। टीका लगवा चुके अब तक सिर्फ 87 लोगों के ही कोरोना संक्रमित होने की खबर स्वास्थ्य विभाग को है। इनमें कोई मरीज गंभीर स्थिति तक नहीं पहुंचा है। सभी लोग कोरोना के मामूली उपचार के बाद स्वस्थ हो गए हैं। इस तरह कोरोना से बचने में वैक्सीन तो सबसे मजबूत अस्त्र जरूर है, लेकिन इसके लिए सावधानी भी बहुत जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टीका लगवाने के समय व्यक्ति संक्रमित रहा या उसी दौरान संक्रमित हो गया तो उसकी जान को खतरा भी हो सकता है। हलियापुर निवासी नरेंद्र कुमार (45) ने 26 अप्रैल को वैक्सीन लगवाई। दो दिन बाद बुखार आने लगा। यह शुगर के मरीज भी हैं। बाद में एचआर सीटी कराई तो कोरोना की पुष्टि हुई। हालात बिगड़ने पर निजी चिकित्सकों से उपचार कराया। कठिन संघर्ष के बाद जान बच सकी। शहर के रामनगर कॉलोनी निवासी 45 वर्षीय एक अन्य व्यक्ति भी इसी तरह की लापरवाही से संक्रमण की चपेट में आकर गंभीर स्थिति तक पहुंच गए।
वैक्सीन इनएक्टिव वायरस है। जो शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाता है। यह आपके शरीर को इससे लड़ने के लिए प्रतिरोधक क्षमता विकसित करता है। यदि किसी व्यक्ति को संक्रमण है, उसे पता नहीं चला या जांच नहीं कराई तो वैक्सीन लगवाने पर उस दौरान उसे नुकसान पहुंचता है। आपकी इम्युनिटी वैक्सीन से लड़ती है, ऊपर से संक्रमण से भी इम्युनिटी को लड़ना पड़ता है। ऐसे में जान का खतरा अधिक होता है। इस तरह यदि किसी भी व्यक्ति को सर्दी, जुकाम, बुखार, खांसी अथवा कोरोना जैसे कोई भी लक्षण हों या किसी भी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हों तो सीधे वैक्सीन न लगवाएं। पहले जांच कराएं और कोरोना निगेटिव रिपोर्ट के बाद ही टीका लगवाएं। प्रतिदिन ऐसे तमाम मरीज संपर्क में आ रहे हैं, जिनका उपचार किया जा रहा है।-डॉ. शिवेंद्र सिन्हा, वरिष्ठ फिजीशियन/मधुमेह रोग विशेषज्ञ
कोरोना से बचने के लिए टीकाकरण सबसे जरूरी है। मौका मिलते ही लोग इसके लिए आगे आएं। इसके पहले थोड़ा ध्यान रखना जरूरी है। किसी तरह के कोरोना लक्षण हों तो पहले उसका जांच व उपचार के बाद ही टीका लगवाएं। टीका लगवाने वाले करीब 87 लोग संक्रमित तो आए हैं, लेकिन किसी की मौत नहीं हुई है। -डॉ. घनश्याम सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी, अयोध्या
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बस, वैक्सीन लगवाने से पहले सतर्कता बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोरोना संक्रमण को लेकर किसी तरह का संदेह हो या लक्षण हों तो बिना जांच कराए टीका लगवाना नुकसानदायक भी हो सकता है। कोरोना वायरस की दूसरी लहर से स्वास्थ्य सेवाएं डगमगा सी गई हैं। वायरस के सीधे फेफड़ों पर हमला करने की वजह से पहली लहर की अपेक्षा कई गुना अधिक लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। अब तक इस महामारी से बचाव के लिए कोई दवा भी नहीं तैयार हो सकी है।
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ऐसे में टीकाकरण ही इससे बचने का एकमात्र उपाय है, जिसे सबसे कारगर भी माना जा रहा है। जिले में 16 जनवरी से टीकाकरण शुरू किया गया है। स्वास्थ्य कर्मी, फ्रंटलाइन वर्कर्स के बाद से 60 वर्ष से अधिक, 45 वर्ष से अधिक के लोगों को टीके की खुराक लगवाने के बाद अब 18 वर्ष से अधिक लोगों के लिए टीकाकरण अभियान जिले में चल रहा है।
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अब तक जिले में 1,13,230 लोगों ने टीका लगवाया है। इनमें 36,703 लोगों की दूसरी डोज पूरी हो चुकी है। टीका लगवा चुके अब तक सिर्फ 87 लोगों के ही कोरोना संक्रमित होने की खबर स्वास्थ्य विभाग को है। इनमें कोई मरीज गंभीर स्थिति तक नहीं पहुंचा है। सभी लोग कोरोना के मामूली उपचार के बाद स्वस्थ हो गए हैं। इस तरह कोरोना से बचने में वैक्सीन तो सबसे मजबूत अस्त्र जरूर है, लेकिन इसके लिए सावधानी भी बहुत जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टीका लगवाने के समय व्यक्ति संक्रमित रहा या उसी दौरान संक्रमित हो गया तो उसकी जान को खतरा भी हो सकता है। हलियापुर निवासी नरेंद्र कुमार (45) ने 26 अप्रैल को वैक्सीन लगवाई। दो दिन बाद बुखार आने लगा। यह शुगर के मरीज भी हैं। बाद में एचआर सीटी कराई तो कोरोना की पुष्टि हुई। हालात बिगड़ने पर निजी चिकित्सकों से उपचार कराया। कठिन संघर्ष के बाद जान बच सकी। शहर के रामनगर कॉलोनी निवासी 45 वर्षीय एक अन्य व्यक्ति भी इसी तरह की लापरवाही से संक्रमण की चपेट में आकर गंभीर स्थिति तक पहुंच गए।
वैक्सीन इनएक्टिव वायरस है। जो शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाता है। यह आपके शरीर को इससे लड़ने के लिए प्रतिरोधक क्षमता विकसित करता है। यदि किसी व्यक्ति को संक्रमण है, उसे पता नहीं चला या जांच नहीं कराई तो वैक्सीन लगवाने पर उस दौरान उसे नुकसान पहुंचता है। आपकी इम्युनिटी वैक्सीन से लड़ती है, ऊपर से संक्रमण से भी इम्युनिटी को लड़ना पड़ता है। ऐसे में जान का खतरा अधिक होता है। इस तरह यदि किसी भी व्यक्ति को सर्दी, जुकाम, बुखार, खांसी अथवा कोरोना जैसे कोई भी लक्षण हों या किसी भी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हों तो सीधे वैक्सीन न लगवाएं। पहले जांच कराएं और कोरोना निगेटिव रिपोर्ट के बाद ही टीका लगवाएं। प्रतिदिन ऐसे तमाम मरीज संपर्क में आ रहे हैं, जिनका उपचार किया जा रहा है।-डॉ. शिवेंद्र सिन्हा, वरिष्ठ फिजीशियन/मधुमेह रोग विशेषज्ञ
कोरोना से बचने के लिए टीकाकरण सबसे जरूरी है। मौका मिलते ही लोग इसके लिए आगे आएं। इसके पहले थोड़ा ध्यान रखना जरूरी है। किसी तरह के कोरोना लक्षण हों तो पहले उसका जांच व उपचार के बाद ही टीका लगवाएं। टीका लगवाने वाले करीब 87 लोग संक्रमित तो आए हैं, लेकिन किसी की मौत नहीं हुई है। -डॉ. घनश्याम सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी, अयोध्या