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केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के कार्यक्रम में हंगामा
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अयोध्या। विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद प्रेक्षागृह में भाजपा की ओर से अमृत महोत्सव के तहत स्वच्छ भारत अभियान कार्यक्रम में छात्रों ने जमकर हंगामा किया। विवि प्रशासन की ओर से छात्रों को समझा बुझाकर शांत कराया गया। इधर, मंत्री का काफिला पहुंचने तक छात्रों की ओर से नारेबाजी का दौर जारी रहा।
दरअसल, जब आईटी के छात्र व छात्राएं सभागार में बैठे थे तो उस दौरान कुछ लोगों ने पहुंचकर उठा दिया।
छात्रों का आरोप है कि छात्राओं के साथ हूटिंग की गई। इस बात से छात्र नाराज होकर प्रदर्शन करने लगे। छात्र नारेबाजी कर बाहर आ गए और स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर बैठकर प्रदर्शन किया। बाद में विवि प्रशासन के मान-मनोव्वल पर उठे। विवि के छात्रों का आरोप है कि इस तरह के आयोजन अक्सर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आयोजित किए जाते हैं।
विवेकानंद सभागार का विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से किराया वसूला जाता है लेकिन जब कार्यक्रम होता है तो भीड़ जुटाने के लिए विश्वविद्यालय के छात्रों को सभागार में बैठा दिया जाता है। विश्वविद्यालय के शिक्षकों की ओर से छात्रों पर दबाव बनाया जाता है। छात्रों का आरोप है कि शनिवार के दिन निदेशक आईटी की ओर से छात्रों से कहा गया कि उनकी हाजिरी सभागार में ली जाएगी। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कहा कि जब वह लोग सभागार में पहुंचे तो उन्हें स्वच्छता अभियान की टी-शर्ट पहनाई गई और उन्हें पता चला कि वह राजनीतिक कार्यक्रम की भीड़ बनाए गए हैं।
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छात्रों का आरोप है कि कोरोना वायरस महामारी से पढ़ाई पूरी नहीं हो पा रही है। ऊपर से हम छात्रों को पढ़ाई के अधिकतर समय किसी न किसी के कार्यक्रम में बैठा दिया जाता है। छात्रों ने सवाल खड़ा किया कि क्या छात्र किसी मंत्री-संतरी के कार्यक्रम में बैठने के लिए विश्वविद्यालय आता है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के महानगर मंत्री यश अग्रवाल ने कहा कि संगठन का कोई विरोध नहीं है। आईटी के छात्र—छात्राओं को क्यों बुलाकर भीड़ बढ़ाई जा रही है। यहां पढ़ाई होनी चाहिए, लेकिन राजनीतिक कार्यक्रम कराए जा रहे हैं। ऐसे कार्यक्रमों में बाहर के लोगों की भीड़ बुलानी चाहिए।
विद्यार्थियों की पढ़ाई नहीं रोकनी चाहिए। परिषद के विश्वविद्यालय इकाई अध्यक्ष आशुतोष ने कहा कि यहां स्वामी विवेकानंद का चित्र लगा है। हम लोग उनके आदर्शों को लेकर चलते हैं। यहां जो हो रहा है, अच्छा नहीं हो रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन भी हमारी बात नहीं सुन रहा है।
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दरअसल, जब आईटी के छात्र व छात्राएं सभागार में बैठे थे तो उस दौरान कुछ लोगों ने पहुंचकर उठा दिया।
छात्रों का आरोप है कि छात्राओं के साथ हूटिंग की गई। इस बात से छात्र नाराज होकर प्रदर्शन करने लगे। छात्र नारेबाजी कर बाहर आ गए और स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर बैठकर प्रदर्शन किया। बाद में विवि प्रशासन के मान-मनोव्वल पर उठे। विवि के छात्रों का आरोप है कि इस तरह के आयोजन अक्सर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आयोजित किए जाते हैं।
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विवेकानंद सभागार का विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से किराया वसूला जाता है लेकिन जब कार्यक्रम होता है तो भीड़ जुटाने के लिए विश्वविद्यालय के छात्रों को सभागार में बैठा दिया जाता है। विश्वविद्यालय के शिक्षकों की ओर से छात्रों पर दबाव बनाया जाता है। छात्रों का आरोप है कि शनिवार के दिन निदेशक आईटी की ओर से छात्रों से कहा गया कि उनकी हाजिरी सभागार में ली जाएगी। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कहा कि जब वह लोग सभागार में पहुंचे तो उन्हें स्वच्छता अभियान की टी-शर्ट पहनाई गई और उन्हें पता चला कि वह राजनीतिक कार्यक्रम की भीड़ बनाए गए हैं।
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छात्रों का आरोप है कि कोरोना वायरस महामारी से पढ़ाई पूरी नहीं हो पा रही है। ऊपर से हम छात्रों को पढ़ाई के अधिकतर समय किसी न किसी के कार्यक्रम में बैठा दिया जाता है। छात्रों ने सवाल खड़ा किया कि क्या छात्र किसी मंत्री-संतरी के कार्यक्रम में बैठने के लिए विश्वविद्यालय आता है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के महानगर मंत्री यश अग्रवाल ने कहा कि संगठन का कोई विरोध नहीं है। आईटी के छात्र—छात्राओं को क्यों बुलाकर भीड़ बढ़ाई जा रही है। यहां पढ़ाई होनी चाहिए, लेकिन राजनीतिक कार्यक्रम कराए जा रहे हैं। ऐसे कार्यक्रमों में बाहर के लोगों की भीड़ बुलानी चाहिए।
विद्यार्थियों की पढ़ाई नहीं रोकनी चाहिए। परिषद के विश्वविद्यालय इकाई अध्यक्ष आशुतोष ने कहा कि यहां स्वामी विवेकानंद का चित्र लगा है। हम लोग उनके आदर्शों को लेकर चलते हैं। यहां जो हो रहा है, अच्छा नहीं हो रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन भी हमारी बात नहीं सुन रहा है।