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टाइप-2 व टाइप-4 के आवासों का होगा सत्यापन
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अयोध्या। जिला पुरुष व महिला अस्पताल के बने टाइप-2 व टाइप-4 के सरकारी आवासों का सत्यापन किया जाएगा। इसके लिए जिला अस्पताल के सीएमएस ने एक जांच कमेटी का गठन किया है।
इस आदेश से इन आवासों में वर्षों से अवैध ढंग से निवास कर रहे लोगों में हड़कंप मच गया है। जिला अस्पताल व महिला अस्पताल के बगल सरकारी कॉलोनी में टाइप-2 के करीब 50 व टाइप-4 के चार आवास बने हैं।
टाइप-4 के आवास चिकित्सकों को आवंटित किए गए हैं तो टाइप-2 के आवासों में आवश्यक सेवाओं से जुड़े स्टाफ नर्स, वार्ड ब्वॉय, लिपिक व अन्य कर्मचारियों को आवंटित किया गया था।
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विभागीय सूत्रों के अनुसार इन आवासों में लंबे समय से नवीन आवंटन नहीं हुआ है। ऐसी आशंका जताई गई है कि इनमें निवास करने वाले कुछ कर्मचारी स्थानांतरित हो चुके हैं, जबकि कुछ सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं।
इसके बावजूद उन्होंने अपना कब्जा जमा रखा है। यह स्थिति वर्षों से चली आ रही है। इसके कारण नए कर्मचारियों को बाहर मकान लेकर निवास करना पड़ रहा है।
अब सीएमएस ने इसे लेकर सख्ती दिखाई है। उन्होंने इन सभी आवासों का सत्यापन करने के लिए एक जांच कमेटी गठित किया है। जिसमें अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आरबी वर्मा के अलावा मैट्रन, स्टाफ नर्स, वार्ड ब्वॉय आदि भी शामिल हैं।
शीघ्र ही इन आवासों का सत्यापन करके रिपोर्ट मांगी गई हैं। जिला अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता/अनुरक्षण समिति के अध्यक्ष डॉ. सीबीएन त्रिपाठी ने बताया कि आवासों की वर्तमान स्थिति को जानने के लिए सत्यापन कराने के लिए आदेश जारी किया गया है। शीघ्र ही रिपोर्ट भी मांगी गई है। गलत ढंग से निवास करता यदि कोई भी पाया गया तो कार्रवाई भी होगी।
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इस आदेश से इन आवासों में वर्षों से अवैध ढंग से निवास कर रहे लोगों में हड़कंप मच गया है। जिला अस्पताल व महिला अस्पताल के बगल सरकारी कॉलोनी में टाइप-2 के करीब 50 व टाइप-4 के चार आवास बने हैं।
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टाइप-4 के आवास चिकित्सकों को आवंटित किए गए हैं तो टाइप-2 के आवासों में आवश्यक सेवाओं से जुड़े स्टाफ नर्स, वार्ड ब्वॉय, लिपिक व अन्य कर्मचारियों को आवंटित किया गया था।
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विभागीय सूत्रों के अनुसार इन आवासों में लंबे समय से नवीन आवंटन नहीं हुआ है। ऐसी आशंका जताई गई है कि इनमें निवास करने वाले कुछ कर्मचारी स्थानांतरित हो चुके हैं, जबकि कुछ सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं।
इसके बावजूद उन्होंने अपना कब्जा जमा रखा है। यह स्थिति वर्षों से चली आ रही है। इसके कारण नए कर्मचारियों को बाहर मकान लेकर निवास करना पड़ रहा है।
अब सीएमएस ने इसे लेकर सख्ती दिखाई है। उन्होंने इन सभी आवासों का सत्यापन करने के लिए एक जांच कमेटी गठित किया है। जिसमें अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आरबी वर्मा के अलावा मैट्रन, स्टाफ नर्स, वार्ड ब्वॉय आदि भी शामिल हैं।
शीघ्र ही इन आवासों का सत्यापन करके रिपोर्ट मांगी गई हैं। जिला अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता/अनुरक्षण समिति के अध्यक्ष डॉ. सीबीएन त्रिपाठी ने बताया कि आवासों की वर्तमान स्थिति को जानने के लिए सत्यापन कराने के लिए आदेश जारी किया गया है। शीघ्र ही रिपोर्ट भी मांगी गई है। गलत ढंग से निवास करता यदि कोई भी पाया गया तो कार्रवाई भी होगी।