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आतंकी घुसपैठ के अलर्ट के बाद सख्त रही सुरक्षा व्यवस्था
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अयोध्या। राम मंदिर पर फैसले के बाद अयोध्या में आतंकियों की घुसपैठ को लेकर बार-बार आ रहे खुफिया इनपुट से पुलिस, पीएसी, पैरा मिलिट्री समेत खुफिया एजेंसियां पूरी तरह सजग हो गई हैं। पश्चिम बंगाल के रास्ते अयोध्या के पड़ोसी जनपद बस्ती तक दो आतंकियों के पहुंचने के इनपुट के बाद अयोध्या पुलिस हाई अलर्ट पर है। सोमवार को भी अयोध्या के बैरियरों, मठ मंदिरों व श्रीराम जन्मभूमि परिसर के आसपास तैनात पुलिस व अर्धसैनिक बल के जवान सतर्क दिखे।
रामनगरी में प्रवेश के रास्ते नयाघाट बंधा तिराहा, बूथ नंबर-4, मोहबरा मोड़, उदया चौराहा, टेढ़ी बाजार, रामघाट चौराहा आदि जगह लगे बैरियरों पर लोगों की तलाशी व आवश्यक होने पर पहचान पत्र देखकर ही प्रवेश दिया जा रहा है। वहीं, श्रीराम जन्मभूमि जाने वाले सभी रास्तों पर भी सतर्कता बरती जा रही है। यहां आने-जाने वाले सभी लोगों पर निगाह रखी जा रही है।
वहीं, खुफिया एजेंसियों व स्थानीय पुलिस के साथ ही स्वाट टीम शहर के होटल, धर्मशालाओं समेत मठ-मंदिरों में ठहरे लोगों की पहचान की तस्दीक कर रही हैं। एसपी सिटी विजयपाल सिंह ने बताया कि पुलिस समेत अर्द्धसैनिक बलों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं। अयोध्या के सभी बैरियरों व प्रवेश मार्गों पर पहले से सुरक्षा बल तैनात हैं, वो लोगों की पहचान व तलाशी लेने के बाद ही अयोध्या में प्रवेश दे रहे हैं।
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वर्ष 1990 में श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के बाद से अयोध्या हमेशा से आतंकियों के निशाने पर रही है। पांच जुलाई 2005 में लश्कर-ए-तोएबा के पांच आतंकियों ने विवादित परिसर पर हमला कर दिया था।
हालांकि एक घंटे से भी कम समय तक चले ऑपरेशन में सुरक्षा बलों ने सभी पांच आतंकियों को ढेर कर दिया था। इस हमले में पांचों आतंकी मारे गए थे, जबकि दो नागरिकों की भी मौत हुई थी। ये आतंकी नेपाल के रास्ते भारत में घुसे थे।
वहीं, 23 नवंबर 2007 को लखनऊ व वाराणसी के साथ ही फैजाबाद कचहरी में भी सीरियल ब्लास्ट हुआ था। इसमें यहां एक अधिवक्ता समेत चार लोगों की मौत हुई थी जबकि 26 लोग घायल हो गए थे।
इसके बाद से कचहरी परिसर को सुरक्षा के कड़े घेरे में कर दिया गया था। वहीं, इसके अलावा वर्ष 1998 में आतंकियों ने हनुमानगढ़ी मंदिर के सामने कुकर बम रखा था, जो आरडीएक्स से बना था। हालांकि फटने से पूर्व ही इसका पता चल गया था, जिससे कोई घटना नहीं घट सकी थी।
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रामनगरी में प्रवेश के रास्ते नयाघाट बंधा तिराहा, बूथ नंबर-4, मोहबरा मोड़, उदया चौराहा, टेढ़ी बाजार, रामघाट चौराहा आदि जगह लगे बैरियरों पर लोगों की तलाशी व आवश्यक होने पर पहचान पत्र देखकर ही प्रवेश दिया जा रहा है। वहीं, श्रीराम जन्मभूमि जाने वाले सभी रास्तों पर भी सतर्कता बरती जा रही है। यहां आने-जाने वाले सभी लोगों पर निगाह रखी जा रही है।
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वहीं, खुफिया एजेंसियों व स्थानीय पुलिस के साथ ही स्वाट टीम शहर के होटल, धर्मशालाओं समेत मठ-मंदिरों में ठहरे लोगों की पहचान की तस्दीक कर रही हैं। एसपी सिटी विजयपाल सिंह ने बताया कि पुलिस समेत अर्द्धसैनिक बलों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं। अयोध्या के सभी बैरियरों व प्रवेश मार्गों पर पहले से सुरक्षा बल तैनात हैं, वो लोगों की पहचान व तलाशी लेने के बाद ही अयोध्या में प्रवेश दे रहे हैं।
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वर्ष 1990 में श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के बाद से अयोध्या हमेशा से आतंकियों के निशाने पर रही है। पांच जुलाई 2005 में लश्कर-ए-तोएबा के पांच आतंकियों ने विवादित परिसर पर हमला कर दिया था।
हालांकि एक घंटे से भी कम समय तक चले ऑपरेशन में सुरक्षा बलों ने सभी पांच आतंकियों को ढेर कर दिया था। इस हमले में पांचों आतंकी मारे गए थे, जबकि दो नागरिकों की भी मौत हुई थी। ये आतंकी नेपाल के रास्ते भारत में घुसे थे।
वहीं, 23 नवंबर 2007 को लखनऊ व वाराणसी के साथ ही फैजाबाद कचहरी में भी सीरियल ब्लास्ट हुआ था। इसमें यहां एक अधिवक्ता समेत चार लोगों की मौत हुई थी जबकि 26 लोग घायल हो गए थे।
इसके बाद से कचहरी परिसर को सुरक्षा के कड़े घेरे में कर दिया गया था। वहीं, इसके अलावा वर्ष 1998 में आतंकियों ने हनुमानगढ़ी मंदिर के सामने कुकर बम रखा था, जो आरडीएक्स से बना था। हालांकि फटने से पूर्व ही इसका पता चल गया था, जिससे कोई घटना नहीं घट सकी थी।