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जरूरत हो तो 15 दिन बढ़ा ली जाए गेहूं ख़रीद की समय सीमा: सूर्य प्रताप शाही
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अयोध्या। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने जनपद के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि गेहूं खरीद गेहूं का उठान तथा रखने की व्यवस्था पूरी तरह से दुरुस्त होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता पड़े तो गेहूं खरीद की समय सीमा 15 दिन तक और बढ़ा ली जाए।
इस अवधि में कोई भी अधिकारी बिना सूचना या अवकाश के मुख्यालय छोड़कर बाहर न जाए। साथ ही उन्होंने प्रत्येक खाद की दुकानों पर खाद का मूल्य मोटे अक्षरों में अंकित किया जाए ,जिससे खाद की कालाबाजारी न हो सके, जिसका निरंतर निरीक्षण भी किया जाए।
कृषि मंत्री रविवार को आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय परिसर में नव विकसित जैविक खेती हेतु प्रक्षेत्र का लोकार्पण करने आये थे। लोकार्पण के बाद उन्होंने जिले के अधिकारियों के साथ बैठक की।
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बैठक में उन्होंने सर्वप्रथम बैठक में जनपद के अधिकारियों से गेहूं खरीद की जानकारी प्राप्त की एवं गेहूं खरीद, गेहूं का उठान तथा रखने की व्यवस्था हेतु निर्देशित करते हुए कहा कि यदि आवश्यकता पड़े तो गेहूं खरीद की समय सीमा 15 दिन तक और बढ़ा ली जाए।
इससे पूर्व कृषि, कृषि मंत्री ने प्रक्षेप का लोकार्पण करते हुए कहा कि क्षेत्र किसानों को जैविक खेती के प्रति रुझान एवं प्रशिक्षित किए जाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
लोकार्पण के उपरांत विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह के साथ क्रीड़ा उद्यान, डेरी, शोध प्रक्षेत्र एवं प्रसार निदेशालय के प्रक्षेत्र पर निष्प्रयोज्य भूमि को विकसित किए जा रहे प्रक्षेत्रों का भ्रमण किया।
अपने अनुभव से और सुधार लाने के लिए बहुमूल्य सुझाव दिए। इसके उपरांत विश्वविद्यालय के समस्त वरिष्ठ अधिकारियों एवं जनपद के एडीएम, डिप्टी आरएम, सहायक निबंधक, तथा गेहूं खरीद से संबंधित सभी एजेंसियों के जनपद स्तरीय अधिकारियों के साथ विश्वविद्यालय की प्रगति एवं गेहूं खरीद के संबंध में समीक्षा बैठक की।
इसके उपरांत विवि की प्रगति समीक्षा बैठक हुई। बैठक में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने स्वागत एवं विश्वविद्यालय की गतिविधियों तथा भविष्य की रणनीति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी समय से परीक्षा करा ली जाएगी।
इस वर्ष धान की चार, गेहूं, चना, मटर, मूंग, आंवला एवं बेल की प्रजातियां विकसित की गई हैं। इस वर्ष 10 हजार क्विंटल धान पैदा करने का लक्ष्य है। अभी तक 70 एकड़ अप्रयोज्य भूमि को सुधार कर कृषि योग्य बना ली गई है।
कुलपति ने विशेष रूप से कृषि मंत्री से दैनिक श्रमिकों को भुगतान किए जा रहे दैनिक भत्ता को बढ़ाए जाने एवं कॉलेज ऑफ वेटरनरी में बजट बढ़ाए जाने हेतु आग्रह किया। जिस पर मंत्री द्वारा प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए।
विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. अखिलेश कुमार सिंह ने बताया कि कृषि मंत्री ने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों से तिलहन, दलहन एवं दूध के उत्पादन को दोगुना बढ़ाने के लिए आह्वान किया।
समीक्षा बैठक में रुधौली विधानसभा क्षेत्र के विधायक रामचंद्र यादव भी उपस्थित थे। बैठक के बाद कृषि मंत्री ने लखनऊ के लिए प्रस्थान किया।
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इस अवधि में कोई भी अधिकारी बिना सूचना या अवकाश के मुख्यालय छोड़कर बाहर न जाए। साथ ही उन्होंने प्रत्येक खाद की दुकानों पर खाद का मूल्य मोटे अक्षरों में अंकित किया जाए ,जिससे खाद की कालाबाजारी न हो सके, जिसका निरंतर निरीक्षण भी किया जाए।
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कृषि मंत्री रविवार को आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय परिसर में नव विकसित जैविक खेती हेतु प्रक्षेत्र का लोकार्पण करने आये थे। लोकार्पण के बाद उन्होंने जिले के अधिकारियों के साथ बैठक की।
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बैठक में उन्होंने सर्वप्रथम बैठक में जनपद के अधिकारियों से गेहूं खरीद की जानकारी प्राप्त की एवं गेहूं खरीद, गेहूं का उठान तथा रखने की व्यवस्था हेतु निर्देशित करते हुए कहा कि यदि आवश्यकता पड़े तो गेहूं खरीद की समय सीमा 15 दिन तक और बढ़ा ली जाए।
इससे पूर्व कृषि, कृषि मंत्री ने प्रक्षेप का लोकार्पण करते हुए कहा कि क्षेत्र किसानों को जैविक खेती के प्रति रुझान एवं प्रशिक्षित किए जाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
लोकार्पण के उपरांत विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह के साथ क्रीड़ा उद्यान, डेरी, शोध प्रक्षेत्र एवं प्रसार निदेशालय के प्रक्षेत्र पर निष्प्रयोज्य भूमि को विकसित किए जा रहे प्रक्षेत्रों का भ्रमण किया।
अपने अनुभव से और सुधार लाने के लिए बहुमूल्य सुझाव दिए। इसके उपरांत विश्वविद्यालय के समस्त वरिष्ठ अधिकारियों एवं जनपद के एडीएम, डिप्टी आरएम, सहायक निबंधक, तथा गेहूं खरीद से संबंधित सभी एजेंसियों के जनपद स्तरीय अधिकारियों के साथ विश्वविद्यालय की प्रगति एवं गेहूं खरीद के संबंध में समीक्षा बैठक की।
इसके उपरांत विवि की प्रगति समीक्षा बैठक हुई। बैठक में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने स्वागत एवं विश्वविद्यालय की गतिविधियों तथा भविष्य की रणनीति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी समय से परीक्षा करा ली जाएगी।
इस वर्ष धान की चार, गेहूं, चना, मटर, मूंग, आंवला एवं बेल की प्रजातियां विकसित की गई हैं। इस वर्ष 10 हजार क्विंटल धान पैदा करने का लक्ष्य है। अभी तक 70 एकड़ अप्रयोज्य भूमि को सुधार कर कृषि योग्य बना ली गई है।
कुलपति ने विशेष रूप से कृषि मंत्री से दैनिक श्रमिकों को भुगतान किए जा रहे दैनिक भत्ता को बढ़ाए जाने एवं कॉलेज ऑफ वेटरनरी में बजट बढ़ाए जाने हेतु आग्रह किया। जिस पर मंत्री द्वारा प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए।
विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. अखिलेश कुमार सिंह ने बताया कि कृषि मंत्री ने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों से तिलहन, दलहन एवं दूध के उत्पादन को दोगुना बढ़ाने के लिए आह्वान किया।
समीक्षा बैठक में रुधौली विधानसभा क्षेत्र के विधायक रामचंद्र यादव भी उपस्थित थे। बैठक के बाद कृषि मंत्री ने लखनऊ के लिए प्रस्थान किया।