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अब प्रतियोगी परीक्षाओं की तर्ज पर होगी मुख्य परीक्षा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 13 Nov 2017 10:35 PM IST
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डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तर्ज पर मुख्य परीक्षाएं कराने को लेकर बदलाव को हरी झंडी दे दी है। प्रदेश में ऐसा ऐतिहासिक निर्णय लेने वाला यह पहला विश्वविद्यालय बन गया है।
कुलपति ने परीक्षा सुधार समिति की सिफारिशों पर सोमवार को यह फैसला सार्वजनिक किया। अब 2018 से स्नातक प्रथम वर्ष के सभी पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं वस्तुनिष्ठ प्रश्नपत्रों के आधार पर होंगी। परीक्षार्थियों को ओएमआर सीट पर 100 प्रश्नों के उत्तर दो घंटे में देने होंगे। स्नातक द्वितीय व तृृतीय वर्ष समेत परास्नातक की परीक्षाएं पहले जैसी ही होंगी।
डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने सोमवार को बताया कि 2018 से परीक्षा सुधार संबंधी प्रमुख बिंदुओं पर सभी विषय संयोजकों की राय ली गई।
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परीक्षा सुधार समिति के विभिन्न निर्णयों पर चर्चा व आम सहमति के बाद तय हुआ कि 2018 की मुख्य परीक्षाओं में स्नातक प्रथम वर्ष के सभी पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं वस्तुनिष्ठ आधारित प्रश्नपत्रों के माध्यम से संपन्न कराई जाएंगी।
विद्यार्थियों को प्रश्नों के उत्तर ओएमआर शीट पर देने होंगे। स्नातक द्वितीय व तृृतीय वर्ष और परास्नातक स्तर के पाठ्यक्रमों से संबंधित प्रश्नपत्रों की व्यवस्था पूर्व वर्षों की तरह ही होगी।
स्नातक प्रथम वर्ष के समस्त पाठयक्रमों से संबंधित प्रश्न पुस्तिकाओं में 100 वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनका उत्तर छात्रों को 120 मिनट में ओएमआर शीट पर अंकित करना होगा। यह भी निर्णय लिया गया कि स्नातक द्वितीय व तृृतीय वर्ष और स्नातकोत्तर के पाठयक्रमों की परीक्षाएं ढाई घंटे के समय अंतराल में कराने पर गंभीरता से विचार किया जाए।
अवध विवि के परीक्षा नियंत्रक एसएल पाल ने बताया कि 2018 की मुख्य परीक्षाओं में सेंटर स्वेपिंग की व्यवस्था लागू किए जाने की दृृष्टि से महाविद्यालयों से प्राचार्यों व शिक्षकों की नियुक्ति सहित संसाधनों से संबंधित कई बिंदुओं पर सूचनाएं मांगी जा चुकी है।
परीक्षा सुधार समिति के निर्णय के अनुसार उन महाविद्यालयों को सेंटर बनाने पर विचार नहीं किया जाएगा, जहां से सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।
स्नातक द्वितीय, तृृतीय व परास्नातक की उत्तर पुस्तिकाओं का बदलेगा स्वरूप
परीक्षा सुधार समिति के निर्णय के अनुसार 2018 की परीक्षा में स्नातक द्वितीय व तृृतीय वर्ष और स्नातकोत्तर के पाठ्यक्रमों के छात्रों को उत्तर लिखने के लिए दी जाने वाली उत्तर पुस्तिकाओं के स्वरूप में भी परिवर्तन किया जा रहा है।
उत्तर पुस्तिकाओं के प्रथम दो पृृष्ठ ओएमआर आधारित होंगे, जिसमें परीक्षार्थी परीक्षा का नाम, अनुक्रमांक व अन्य विवरण ओएमआर पर दिए गोलों को भरकर अंकित करेंगे। उत्तर पुस्तिका के प्रत्येक पृृष्ठ पर पृृष्ठ क्रमांक के साथ एक बार कोड होगा, जिसके आधार पर मूल्यांकन पूर्व परीक्षार्थी की उत्तर पुस्तिकाओं की कंप्यूटर द्वारा डबल कोडिंग की जाएगी। उत्तर लिखने के लिए दी जाने वाली प्रथम उत्तर पुस्तिका के अतिरिक्त छात्र को बी या सी उत्तर पुस्तिका नहीं दी जाएगी।
टेंपर प्रूफ लिफाफों में होंगे प्रश्नपत्र
वर्ष 2018 में होने वाली परीक्षाओं के लिए प्रश्नपत्र टेंपर प्रूफ लिफाफों में भेजे जाएंगे। पॉलीथीन के इन लिफाफों की विशेषता यह होगी कि इन्हें एक बार सील किए जाने के बाद दोबारा खोलना संभव नहीं होगा। ऐसे लिफाफे सिर्फ काटकर ही खोले जा सकेंगे।
मुख्य परीक्षा से पहले होगी प्रायोगिक परीक्षाएं
परीक्षा सुधार समिति ने तय किया है कि प्रायोगिक परीक्षाओं को मुख्य परीक्षाओं के शुरू होने के पूर्व ही संपन्न करा लिया जाएगा। इसके लिए हर महाविद्यालय को प्रत्येक प्रायोगिक विषय की परीक्षा के लिए परीक्षकों का एक पैनल उपलब्ध कराया जाएगा।
नए बदलाव पर होगी कार्यशाला : कुलपति
अवध विवि के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने बताया कि अगले पखवारे से परीक्षा सुधार समिति के निर्णयों से परिवर्तित व्यवस्थाओं के संदर्भ में जिलावार महाविद्यालय के प्रधानाचार्यों, प्रबंधकों व शिक्षकों के साथ कार्यशालाएं होंगी। इसमें उन्हें परिवर्तित व्यवस्था की जानकारी दी जाएगी। समय रहते वे अपने यहां विद्यार्थियों को परिवर्तनों से अवगत करा सकेंगे।
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कुलपति ने परीक्षा सुधार समिति की सिफारिशों पर सोमवार को यह फैसला सार्वजनिक किया। अब 2018 से स्नातक प्रथम वर्ष के सभी पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं वस्तुनिष्ठ प्रश्नपत्रों के आधार पर होंगी। परीक्षार्थियों को ओएमआर सीट पर 100 प्रश्नों के उत्तर दो घंटे में देने होंगे। स्नातक द्वितीय व तृृतीय वर्ष समेत परास्नातक की परीक्षाएं पहले जैसी ही होंगी।
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डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने सोमवार को बताया कि 2018 से परीक्षा सुधार संबंधी प्रमुख बिंदुओं पर सभी विषय संयोजकों की राय ली गई।
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परीक्षा सुधार समिति के विभिन्न निर्णयों पर चर्चा व आम सहमति के बाद तय हुआ कि 2018 की मुख्य परीक्षाओं में स्नातक प्रथम वर्ष के सभी पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं वस्तुनिष्ठ आधारित प्रश्नपत्रों के माध्यम से संपन्न कराई जाएंगी।
विद्यार्थियों को प्रश्नों के उत्तर ओएमआर शीट पर देने होंगे। स्नातक द्वितीय व तृृतीय वर्ष और परास्नातक स्तर के पाठ्यक्रमों से संबंधित प्रश्नपत्रों की व्यवस्था पूर्व वर्षों की तरह ही होगी।
स्नातक प्रथम वर्ष के समस्त पाठयक्रमों से संबंधित प्रश्न पुस्तिकाओं में 100 वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनका उत्तर छात्रों को 120 मिनट में ओएमआर शीट पर अंकित करना होगा। यह भी निर्णय लिया गया कि स्नातक द्वितीय व तृृतीय वर्ष और स्नातकोत्तर के पाठयक्रमों की परीक्षाएं ढाई घंटे के समय अंतराल में कराने पर गंभीरता से विचार किया जाए।
अवध विवि के परीक्षा नियंत्रक एसएल पाल ने बताया कि 2018 की मुख्य परीक्षाओं में सेंटर स्वेपिंग की व्यवस्था लागू किए जाने की दृृष्टि से महाविद्यालयों से प्राचार्यों व शिक्षकों की नियुक्ति सहित संसाधनों से संबंधित कई बिंदुओं पर सूचनाएं मांगी जा चुकी है।
परीक्षा सुधार समिति के निर्णय के अनुसार उन महाविद्यालयों को सेंटर बनाने पर विचार नहीं किया जाएगा, जहां से सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।
स्नातक द्वितीय, तृृतीय व परास्नातक की उत्तर पुस्तिकाओं का बदलेगा स्वरूप
परीक्षा सुधार समिति के निर्णय के अनुसार 2018 की परीक्षा में स्नातक द्वितीय व तृृतीय वर्ष और स्नातकोत्तर के पाठ्यक्रमों के छात्रों को उत्तर लिखने के लिए दी जाने वाली उत्तर पुस्तिकाओं के स्वरूप में भी परिवर्तन किया जा रहा है।
उत्तर पुस्तिकाओं के प्रथम दो पृृष्ठ ओएमआर आधारित होंगे, जिसमें परीक्षार्थी परीक्षा का नाम, अनुक्रमांक व अन्य विवरण ओएमआर पर दिए गोलों को भरकर अंकित करेंगे। उत्तर पुस्तिका के प्रत्येक पृृष्ठ पर पृृष्ठ क्रमांक के साथ एक बार कोड होगा, जिसके आधार पर मूल्यांकन पूर्व परीक्षार्थी की उत्तर पुस्तिकाओं की कंप्यूटर द्वारा डबल कोडिंग की जाएगी। उत्तर लिखने के लिए दी जाने वाली प्रथम उत्तर पुस्तिका के अतिरिक्त छात्र को बी या सी उत्तर पुस्तिका नहीं दी जाएगी।
टेंपर प्रूफ लिफाफों में होंगे प्रश्नपत्र
वर्ष 2018 में होने वाली परीक्षाओं के लिए प्रश्नपत्र टेंपर प्रूफ लिफाफों में भेजे जाएंगे। पॉलीथीन के इन लिफाफों की विशेषता यह होगी कि इन्हें एक बार सील किए जाने के बाद दोबारा खोलना संभव नहीं होगा। ऐसे लिफाफे सिर्फ काटकर ही खोले जा सकेंगे।
मुख्य परीक्षा से पहले होगी प्रायोगिक परीक्षाएं
परीक्षा सुधार समिति ने तय किया है कि प्रायोगिक परीक्षाओं को मुख्य परीक्षाओं के शुरू होने के पूर्व ही संपन्न करा लिया जाएगा। इसके लिए हर महाविद्यालय को प्रत्येक प्रायोगिक विषय की परीक्षा के लिए परीक्षकों का एक पैनल उपलब्ध कराया जाएगा।
नए बदलाव पर होगी कार्यशाला : कुलपति
अवध विवि के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने बताया कि अगले पखवारे से परीक्षा सुधार समिति के निर्णयों से परिवर्तित व्यवस्थाओं के संदर्भ में जिलावार महाविद्यालय के प्रधानाचार्यों, प्रबंधकों व शिक्षकों के साथ कार्यशालाएं होंगी। इसमें उन्हें परिवर्तित व्यवस्था की जानकारी दी जाएगी। समय रहते वे अपने यहां विद्यार्थियों को परिवर्तनों से अवगत करा सकेंगे।