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छापेमारी के विरोध में दवा दुकानों की बेमियादी हड़ताल
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
Updated Tue, 25 Oct 2016 11:28 PM IST
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छापेमारी के विरोध में बंद मेडिकल स्टोर्स
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में फर्जी तरीके से ड्रग लाइसेंस हासिल कर मेडिकल स्टोरों के संचालन की शिकायत पर जांच करने पहुंचें ड्रग इंस्पेक्टर को देख एक मेडिकल स्टोर का संचालक दुकान बंद कर भाग खड़ा हुआ। इसके बाद शहर में ऐसी अफवाह फैली कि आधे घंटे के अंदर सभी मेडिकल स्टोर बंद हो गए।
इसे दवा व्यापारियों ने उत्पीड़न की कार्रवाई बताते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिए। व्यापारियों के केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने बेमियादी बंदी पर जाने की घोषणा की है। फार्मासिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने तहसील दिवस पर फर्जी मेडिकल स्टोरों के संचालन की शिकायत की थी।
उनका आरोप था है कि एक ही फार्मासिस्ट की डिग्री पर आठ से दस मेडिकल स्टोर संचालित किए जा रहे हैं। शिकायत पर डीएम ने मामले की जांच के लिए ड्रग इंस्पेक्टर को जिम्मेदारी सौंपी। मंगलवार को अल्का टावर स्थित अरिहंत मेडिकल स्टोर पर ड्रग इंस्पेक्टर केसी रस्तोगी फार्मासिस्ट की जांच के लिए पहुंचे तो मेडिकल स्टोर संचालक भागने लगा।
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अन्य कर्मियों ने शटर गिरा दिए। उसे भागता देख अल्का टावर की अन्य दुकानें भी बंद होने लगी। बाद में नगर के सभी मेडिकल स्टोर बंद कर उनके संचालक एकत्र हुए। संगठन अध्यक्ष अवि आनंद मन्नू ने बताया कि जिले के कुछ फार्मासिस्ट हैं जो 15 से 20 हजार वेतन मांगते हैं और वही ड्रग इंस्पेक्टर को मेडिकल स्टोर पर लाते हैं।
कार्रवाई के लिए दबाव बनाते हैं। उन्होंने कहा कि संगठन के आह्वान पर अनिश्चितकाल के लिए हड़ताल शुरू कर दी गई है। जब तक प्रशासन इस बात का लिखित आश्वासन नहीं देगा कि किसी मेडिकल स्टोर को परेशान नहीं किया जाएगा, तब तक दवा की दुकानें नहीं खुलेगी।
ड्रग इंस्पेक्टर केसी रस्तोगी ने बताया कि शिकायत के बाद जांच करने गए थे। जिस प्रकार से मेडिकल स्टोर संचालक भागे हैं इससे तो इतना तय है कि उनका लाइसेंस फर्जी है।
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इसे दवा व्यापारियों ने उत्पीड़न की कार्रवाई बताते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिए। व्यापारियों के केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने बेमियादी बंदी पर जाने की घोषणा की है। फार्मासिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने तहसील दिवस पर फर्जी मेडिकल स्टोरों के संचालन की शिकायत की थी।
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उनका आरोप था है कि एक ही फार्मासिस्ट की डिग्री पर आठ से दस मेडिकल स्टोर संचालित किए जा रहे हैं। शिकायत पर डीएम ने मामले की जांच के लिए ड्रग इंस्पेक्टर को जिम्मेदारी सौंपी। मंगलवार को अल्का टावर स्थित अरिहंत मेडिकल स्टोर पर ड्रग इंस्पेक्टर केसी रस्तोगी फार्मासिस्ट की जांच के लिए पहुंचे तो मेडिकल स्टोर संचालक भागने लगा।
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अन्य कर्मियों ने शटर गिरा दिए। उसे भागता देख अल्का टावर की अन्य दुकानें भी बंद होने लगी। बाद में नगर के सभी मेडिकल स्टोर बंद कर उनके संचालक एकत्र हुए। संगठन अध्यक्ष अवि आनंद मन्नू ने बताया कि जिले के कुछ फार्मासिस्ट हैं जो 15 से 20 हजार वेतन मांगते हैं और वही ड्रग इंस्पेक्टर को मेडिकल स्टोर पर लाते हैं।
कार्रवाई के लिए दबाव बनाते हैं। उन्होंने कहा कि संगठन के आह्वान पर अनिश्चितकाल के लिए हड़ताल शुरू कर दी गई है। जब तक प्रशासन इस बात का लिखित आश्वासन नहीं देगा कि किसी मेडिकल स्टोर को परेशान नहीं किया जाएगा, तब तक दवा की दुकानें नहीं खुलेगी।
ड्रग इंस्पेक्टर केसी रस्तोगी ने बताया कि शिकायत के बाद जांच करने गए थे। जिस प्रकार से मेडिकल स्टोर संचालक भागे हैं इससे तो इतना तय है कि उनका लाइसेंस फर्जी है।