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भगवान राम की मूर्ति के लिए ध्वस्त होगा फटिक शिला, बचाने जुटे संत
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अयोध्या के फटिक शीला आश्रम में बैठक करते संतगण।
- फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। रामनगरी में सरयू तट पर प्रस्तावित भगवान श्रीराम की विश्व की सबसे ऊंची 251 मीटर की मूर्ति के लिए जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू हो गई है। गुरुवार को अधिग्रहण के लिए नए सिरे से पुन: अधिसूचना जारी करने के बाद हड़कंप मच गया है। इसमें सरयू किनारे 213 लोगों की 28.2864 हेक्टेयर भूमि ली जानी है।
जिसमें बड़ी संख्या में मकान व पांच मंदिर भी शामिल हैं। इन्हीं मंदिरों में रामनगरी के सिद्ध संतों में शुमार तपस्वी नारायण दास उर्फ बगही बाबा की तपस्थली फटिक शिला भी शामिल है।
देशभर के लाखों भक्तों की श्रद्धा का केंद्र फटिक शिला को बचाने के लिए संत अब लामबंद हो गए हैं। गुरुवार को संतों ने मंदिर में बैठक के बाद मुख्यमंत्री से मिलने का निर्णय लिया गया।
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अयोध्या में सरयू नदी के पास भगवान राम की करीब 251 मीटर ऊंची प्रतिमा लगनी है। इसके लिए 28.2864 हेक्टेयर जमीन अधिकृत करने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है।
डीएम ने नोटिफिकेशन जारी कर 11 जुलाई तक डीएम कार्यालय में अपना पक्ष रखने के लिए भूमि व प्रापर्टी के कागजात के साथ बुलाया है।
इनमें फटिक शिला समेत कुष्ठ आश्रम, बम-बम महाराज का आश्रम, अंतर्यामी व काली मंदिर भी शामिल हैं। गुरुवार को फटिक शिला आश्रम में बैठक कर संतों ने मंदिर को बचाने के लिए मुख्यमंत्री से मिलने का निर्णय लिया।
बैठक में मंदिर के श्रीमहंत रामसुख दास, श्रीमहंत रामाज्ञादास सहित दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास, महंत डॉ. राघवेश दास वेदांती व बड़ी संख्या में अधिग्रहण की जद में आए लोग मौजूद रहे।
महंत सुरेश दास ने बताया कि आश्रम से जुड़े संत फटिक शिला को बचाने के लिए मुख्यमंत्री से मिलना चाहते हैं, शीघ्र ही उनका समय लेकर उनसे मुलाकात कर आश्रम की विरासत को बचाने की मांग की जाएगी।
अधिग्रहण के लिए दो बार जारी करना पड़ा नोटिफिकेशन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल व पर्यटन विभाग द्वारा स्थापित होने वाले श्रीराममूर्ति के लिए जमीन अधिग्रहण को दो बार नोटिफिकेशन जारी करना पड़ा।
इसमें बड़ी तकनीकी चूक सामने आई है। विगत दिनों अधिग्रहण के लिए जो अधिसूचना जारी की गई थी वह क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी के हवाले से हुई थी जबकि नियमानुसार भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई जिला मजिस्ट्रेट करता है। इस चूक में सुधार करते हुए प्रशासन ने गुरुवार को पुन: नए सिरे से अधिग्रहण की सूचना जारी की।
बगही बाबा की तपस्थली रही है फटिक शिला
अयोध्या। तपस्वी नारायण दास उर्फ बगही बाबा की तपस्थली के रूप में फटिक शिला पूरे देश में विख्यात है। फटिकशिला के श्रीमहंत सुखदेव दास जी महाराज बताते हैं कि 1978 में बिहार से आकर तपस्वी बाबा ने रामनगरी में धूनी रमाई और सरयू तट पर फटिक शिला आश्रम की स्थापना की।
आश्रम में 3 जुलाई 1985 से निरंतर अखंड सीताराम नाम का जप हो रहा है। वगही बाबा ने 1978 में 21 दिनों तक रामनाम प्रचार के लिए महज सरयू जल लेकर 27 दिनों तक अनशन किया। रामनगरी के संतों महंत नृत्यगोपाल दास, करतलिया बाबा सहित अन्य संतों के आग्रह पर वगही बाबा ने अपना अनशन समाप्त किया। वह पूरे जीवन काल में मात्र एक गिलास दूध ही लेते रहे।
वर्तमान में सरयू तट पर यह आश्रम करीब पांच एकड़ में स्थापित है। प्रतिदिन करीब 100 से 150 संत यहां साधना करते हैं। गोशाला है। सीताराम नाम जप मंदिर आस्था का केंद्र है।
आश्रम से लाखों शिष्य जुड़े हैं। रामनवमी, सावन व कार्तिक मेले में हजारों भक्त यहां श्रद्धा निवेदित करने पहुंचते हैं। श्रीमहंत सुखदेव दास जी ने कहा कि हम सभी संत रामनाम उपासक हैं।
यह हमारे गुरु तपस्वी बाबा नारायण दास की विरासत है। देश के कोने-कोने से लाखो संतों की आस्था यहां से जुड़ी है। मुख्यमंत्री जी से अनुग्रह है कि रामनगरी के संत परंपरा के मुकुटमणि रहे बगही बाबा की विरासत को ध्वस्त होने से बचाया जाए।
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जिसमें बड़ी संख्या में मकान व पांच मंदिर भी शामिल हैं। इन्हीं मंदिरों में रामनगरी के सिद्ध संतों में शुमार तपस्वी नारायण दास उर्फ बगही बाबा की तपस्थली फटिक शिला भी शामिल है।
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देशभर के लाखों भक्तों की श्रद्धा का केंद्र फटिक शिला को बचाने के लिए संत अब लामबंद हो गए हैं। गुरुवार को संतों ने मंदिर में बैठक के बाद मुख्यमंत्री से मिलने का निर्णय लिया गया।
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अयोध्या में सरयू नदी के पास भगवान राम की करीब 251 मीटर ऊंची प्रतिमा लगनी है। इसके लिए 28.2864 हेक्टेयर जमीन अधिकृत करने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है।
डीएम ने नोटिफिकेशन जारी कर 11 जुलाई तक डीएम कार्यालय में अपना पक्ष रखने के लिए भूमि व प्रापर्टी के कागजात के साथ बुलाया है।
इनमें फटिक शिला समेत कुष्ठ आश्रम, बम-बम महाराज का आश्रम, अंतर्यामी व काली मंदिर भी शामिल हैं। गुरुवार को फटिक शिला आश्रम में बैठक कर संतों ने मंदिर को बचाने के लिए मुख्यमंत्री से मिलने का निर्णय लिया।
बैठक में मंदिर के श्रीमहंत रामसुख दास, श्रीमहंत रामाज्ञादास सहित दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास, महंत डॉ. राघवेश दास वेदांती व बड़ी संख्या में अधिग्रहण की जद में आए लोग मौजूद रहे।
महंत सुरेश दास ने बताया कि आश्रम से जुड़े संत फटिक शिला को बचाने के लिए मुख्यमंत्री से मिलना चाहते हैं, शीघ्र ही उनका समय लेकर उनसे मुलाकात कर आश्रम की विरासत को बचाने की मांग की जाएगी।
अधिग्रहण के लिए दो बार जारी करना पड़ा नोटिफिकेशन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल व पर्यटन विभाग द्वारा स्थापित होने वाले श्रीराममूर्ति के लिए जमीन अधिग्रहण को दो बार नोटिफिकेशन जारी करना पड़ा।
इसमें बड़ी तकनीकी चूक सामने आई है। विगत दिनों अधिग्रहण के लिए जो अधिसूचना जारी की गई थी वह क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी के हवाले से हुई थी जबकि नियमानुसार भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई जिला मजिस्ट्रेट करता है। इस चूक में सुधार करते हुए प्रशासन ने गुरुवार को पुन: नए सिरे से अधिग्रहण की सूचना जारी की।
बगही बाबा की तपस्थली रही है फटिक शिला
अयोध्या। तपस्वी नारायण दास उर्फ बगही बाबा की तपस्थली के रूप में फटिक शिला पूरे देश में विख्यात है। फटिकशिला के श्रीमहंत सुखदेव दास जी महाराज बताते हैं कि 1978 में बिहार से आकर तपस्वी बाबा ने रामनगरी में धूनी रमाई और सरयू तट पर फटिक शिला आश्रम की स्थापना की।
आश्रम में 3 जुलाई 1985 से निरंतर अखंड सीताराम नाम का जप हो रहा है। वगही बाबा ने 1978 में 21 दिनों तक रामनाम प्रचार के लिए महज सरयू जल लेकर 27 दिनों तक अनशन किया। रामनगरी के संतों महंत नृत्यगोपाल दास, करतलिया बाबा सहित अन्य संतों के आग्रह पर वगही बाबा ने अपना अनशन समाप्त किया। वह पूरे जीवन काल में मात्र एक गिलास दूध ही लेते रहे।
वर्तमान में सरयू तट पर यह आश्रम करीब पांच एकड़ में स्थापित है। प्रतिदिन करीब 100 से 150 संत यहां साधना करते हैं। गोशाला है। सीताराम नाम जप मंदिर आस्था का केंद्र है।
आश्रम से लाखों शिष्य जुड़े हैं। रामनवमी, सावन व कार्तिक मेले में हजारों भक्त यहां श्रद्धा निवेदित करने पहुंचते हैं। श्रीमहंत सुखदेव दास जी ने कहा कि हम सभी संत रामनाम उपासक हैं।
यह हमारे गुरु तपस्वी बाबा नारायण दास की विरासत है। देश के कोने-कोने से लाखो संतों की आस्था यहां से जुड़ी है। मुख्यमंत्री जी से अनुग्रह है कि रामनगरी के संत परंपरा के मुकुटमणि रहे बगही बाबा की विरासत को ध्वस्त होने से बचाया जाए।

अयोध्या में सरयू तट स्थित फटिक शीला आश्रम। फोटो : FAIZABAD