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होटल निर्माण की होगी मजिस्ट्रेटी जांच
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 30 Sep 2015 11:07 PM IST
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समाजवाद के पुरोधा आचार्य नरेंद्रदेव की ऐतिहासिक कोठी को होटल में तब्दील करने के लिए पुरातत्व कानूनों की अवहेलना कर हो रहे निर्माण में शामिल पूरे रैकेट का सच अब सामने आएगा।
डीएम ने बुधवार को मामले की मजिस्ट्रेटी जांच का आदेश देते हुए कहा है कि एडीएम सिटी न सिर्फ अवैध निर्माण का जांच करेंगे, बल्कि प्रकरण के हर पहलू की पड़ताल करने के साथ संलिप्त अधिकारियों-कर्मचारियों के बारे में आख्या अपनी रिपोर्ट में देंगे।
डीएम ने एसएसपी व प्रभारी निरीक्षक को अलग से निर्माण कार्य रुकवाने को पत्र भेजा है। एडीएम सिटी द्वारा इसकी भी जांच की जाएगी कि जो अवैध निर्माण कराया जा रहा है वह गुलाबबाड़ी की भूमि पर तो नहीं है।
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‘अमर उजाला’ ने आचार्य नरेंद्रदेव की कोठी व उसकी पुरातात्विक गुलाबबाड़ी से सन्निकटता के बावजूद अवैध रूप से होटल बनाने का मुद्दा 19 सितंबर से लगातार उठाया।
भारतीय पुरातत्व विभाग की ओर से मामले में पहले ही रिपोर्ट दर्ज करने की तहरीर देने के साथ डीएम, एसएसपी, प्राधिकरण व एएसआई के शीर्ष अधिकारियों को पत्र लिखे गए थे।
मगर प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले में चुप्पी साधे रखी। कमिश्नर की सक्रियता के बाद मंगलवार को अयोध्या-फैजाबाद विकास प्राधिकरण की नींद टूटी और अवैध तरीके से बने रेस्टोरेंट व ऑडीटोरियम की सीलिंग कार्रवाई की।
मगर अभी कई सवाल अनुत्तरित हैं, जिसके जवाब में ही प्राधिकरण, प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों की संलिप्तता उजागर होनी है।
फरवरी में ही एएसआई के सहायक संरक्षा अधिकारी ने जब उच्चाधिकारियों समेत पुलिस को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा, तो इसे संज्ञान में क्यों नहीं लिया गया।
निर्माण कार्य जारी रहने के पीछे कौन-कौन जिम्मेदार रहा। कोठी खरीदने वालों का साथ देने के पीछे लग रहे लाखों के लेन-देन के आरोप का सच क्या है।
मौके पर समाजवाद का ढोल पीटने वाले क्यों निर्माण कराने के दौरान उपस्थित रहते थे।
अब तक चुप्पी साधे डीएम अनिल ढींगरा ने मामले में अचानक यू टर्न लेते हुए बुधवार को जारी आदेश में कहा है कि स्थानीय समाचार पत्रों में नरेंद्रदेव की कोठी के संदर्भ में प्रकाशित खबरों को संज्ञान में लेते हुए विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष राजेश कुमार को पूरी टीम के साथ भेजकर अवैध निर्माण को सील कराया था।
भारतीय पुरातत्व विभाग के स्थानीय अधिकारी ने अब तक की गई कृत कार्यवाही की आख्या तलब की है।
डीएम ने कहा कि प्रकरण की पूरी जांच के लिए एडीएम सिटी रामनिवास शर्मा को जांच अधिकारी नामित करते हुए मजिस्ट्रेटी जांच कराने के आदेश जारी कर दिये हैं जो उक्त प्रकरण के हर पहलू की जांच करने के साथ संलिप्त अधिकारी के बारे में सुस्पष्ट आख्या अपनी जांच रिपोर्ट में देंगे।
इस संदर्भ में डीएम ने एसएसपी मोहित गुप्ता व प्रभारी निरीक्षक को अलग से निर्माण कार्य रुकवाने के लिए पत्र भेजा है।
डीएम ने कहा कि एडीएम सिटी द्वारा इसकी भी जांच की जाएगी कि जो अवैध निर्माण कराया जा रहा है वह गुलाबबाड़ी की भूमि पर तो नहीं है। इसके लिए राजस्व टीम सर्वे करेगी।
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डीएम ने बुधवार को मामले की मजिस्ट्रेटी जांच का आदेश देते हुए कहा है कि एडीएम सिटी न सिर्फ अवैध निर्माण का जांच करेंगे, बल्कि प्रकरण के हर पहलू की पड़ताल करने के साथ संलिप्त अधिकारियों-कर्मचारियों के बारे में आख्या अपनी रिपोर्ट में देंगे।
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डीएम ने एसएसपी व प्रभारी निरीक्षक को अलग से निर्माण कार्य रुकवाने को पत्र भेजा है। एडीएम सिटी द्वारा इसकी भी जांच की जाएगी कि जो अवैध निर्माण कराया जा रहा है वह गुलाबबाड़ी की भूमि पर तो नहीं है।
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‘अमर उजाला’ ने आचार्य नरेंद्रदेव की कोठी व उसकी पुरातात्विक गुलाबबाड़ी से सन्निकटता के बावजूद अवैध रूप से होटल बनाने का मुद्दा 19 सितंबर से लगातार उठाया।
भारतीय पुरातत्व विभाग की ओर से मामले में पहले ही रिपोर्ट दर्ज करने की तहरीर देने के साथ डीएम, एसएसपी, प्राधिकरण व एएसआई के शीर्ष अधिकारियों को पत्र लिखे गए थे।
मगर प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले में चुप्पी साधे रखी। कमिश्नर की सक्रियता के बाद मंगलवार को अयोध्या-फैजाबाद विकास प्राधिकरण की नींद टूटी और अवैध तरीके से बने रेस्टोरेंट व ऑडीटोरियम की सीलिंग कार्रवाई की।
मगर अभी कई सवाल अनुत्तरित हैं, जिसके जवाब में ही प्राधिकरण, प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों की संलिप्तता उजागर होनी है।
फरवरी में ही एएसआई के सहायक संरक्षा अधिकारी ने जब उच्चाधिकारियों समेत पुलिस को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा, तो इसे संज्ञान में क्यों नहीं लिया गया।
निर्माण कार्य जारी रहने के पीछे कौन-कौन जिम्मेदार रहा। कोठी खरीदने वालों का साथ देने के पीछे लग रहे लाखों के लेन-देन के आरोप का सच क्या है।
मौके पर समाजवाद का ढोल पीटने वाले क्यों निर्माण कराने के दौरान उपस्थित रहते थे।
अब तक चुप्पी साधे डीएम अनिल ढींगरा ने मामले में अचानक यू टर्न लेते हुए बुधवार को जारी आदेश में कहा है कि स्थानीय समाचार पत्रों में नरेंद्रदेव की कोठी के संदर्भ में प्रकाशित खबरों को संज्ञान में लेते हुए विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष राजेश कुमार को पूरी टीम के साथ भेजकर अवैध निर्माण को सील कराया था।
भारतीय पुरातत्व विभाग के स्थानीय अधिकारी ने अब तक की गई कृत कार्यवाही की आख्या तलब की है।
डीएम ने कहा कि प्रकरण की पूरी जांच के लिए एडीएम सिटी रामनिवास शर्मा को जांच अधिकारी नामित करते हुए मजिस्ट्रेटी जांच कराने के आदेश जारी कर दिये हैं जो उक्त प्रकरण के हर पहलू की जांच करने के साथ संलिप्त अधिकारी के बारे में सुस्पष्ट आख्या अपनी जांच रिपोर्ट में देंगे।
इस संदर्भ में डीएम ने एसएसपी मोहित गुप्ता व प्रभारी निरीक्षक को अलग से निर्माण कार्य रुकवाने के लिए पत्र भेजा है।
डीएम ने कहा कि एडीएम सिटी द्वारा इसकी भी जांच की जाएगी कि जो अवैध निर्माण कराया जा रहा है वह गुलाबबाड़ी की भूमि पर तो नहीं है। इसके लिए राजस्व टीम सर्वे करेगी।