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रामजन्मभूमि परिसर स्थित पौराणिक स्थलों का लौटेगा गौरव
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अयोध्या। राममंदिर निर्माण के साथ ही साथ रामजन्मभूमि परिसर स्थित प्राचीन/पौराणिक स्थलों का भी प्राचीन गौरव लौटेगा। इसे लेकर ट्रस्ट ने मंदिर निर्माण शुरू करने से पहले ही पूरे परिसर का सर्वे कराकर 11 पौराणिक स्थलों को चिह्नित किया था। इन स्थलों का मूल स्वरूप बचाते हुए इनके सुंदरीकरण व संरक्षण की योजना श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने तैयार की है। अयोध्या की पौराणिकता को सहेजने की ट्रस्ट की इस योजना की शुक्रवार को अयोध्या आए उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भी सराहना की है।
उपराष्ट्रपति अयोध्या में दर्शन-पूजन कर निहाल दिखे। उन्होंने अपनी अयोध्या यात्रा के प्रत्येक पहलू का अपने फेसबुक पेज पर जिक्र किया है। इसी क्रम में उपराष्ट्रपति ने मंदिर निर्माण का जिक्र करते हुए राममंदिर ट्रस्ट की सराहना करते हुए अपने फेसबुक पेज पर लिखा कि सीता कूप और कुबेर टीला जैसे प्राचीन इमारतों का मूल स्वरूप बनाए रखने को विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विशेष सराहनीय है कि 70 एकड़ के इस परिसर में श्रद्धालुओं की सुगमता और सहायता के लिए केंद्र बनाया जा रहा है। संग्रहालय शोध संस्थान, गोशाला व योगकेंद्र का भी प्रावधान है।
गौरतलब है कि मंदिर निर्माण से पूर्व ट्रस्ट की ओर से पूरे 70 एकड़ के परिसर का भौगोलिक सर्वे कराया गया था। इस सर्वे में ट्रस्ट ने अति ऐतिहासिक और प्राचीन संदर्भ को प्रदर्शित करने वाले 11 स्थान चिह्नित कर उसका ब्लूप्रिंट बनाकर मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र को सौंपा था। रिपोर्ट में भगवान राम के युग के साक्ष्य होने की बात भी कही गई है। परिसर की ऐतिहासिक चीजों में बदलाव न हो, इसलिए पूरे परिसर की खोदाई ट्रस्ट ने नहीं कराई थी। कुबेर टीला, सीता कूप, सीता रसोई, नल, नील, अंगद टीला व सुग्रीव टीला सहित 11 प्राचीन स्थलों के संरक्षण की योजना ट्रस्ट ने बनाई है।
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कुबेर टीला को लेकर पौराणिक मान्यताएं भी हैं। अयोध्या का इतिहास विवेचित करने वाले ग्रंथ रुदयामल के अनुसार युगों पूर्व यहां धन के देवता कुबेर का आगमन हुआ था। उन्होंने रामजन्मभूमि के निकट ऊंचे टीले पर शिवलिंग की स्थापना की थी। कालांतर में यहां मां पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, नंदी व कुबेर सहित कुल नौ देवी-देवताओं की प्रतिमा स्थापित की गई और श्रद्धालुओं के बीच यह स्थल नौरत्न के नाम से पूजित-प्रतिष्ठित हुआ। कुबेर टीला हिंदू-मुस्लिम एकता का स्मारक भी है। इसी टीले पर बाबा रामशरण दास व अमीर अली को अंग्रेजों ने फांसी दी थी। इस कुबेर टीला को भव्यता प्रदान करने की तैयारी है।
सीता कूप में समाहित है सभी तीर्थों का जल
इसी तरह परिसर स्थित सीता कूप को लेकर मान्यता है कि देश के सभी तीर्थस्थलों का जल इसमें समाहित है। अयोध्या नगर में होने वाले धार्मिक व मांगलिक कार्यक्रमों में इस स्थल के जल का प्रयोग आज भी किया जाता है। ट्रस्ट ने अभी कुछ माह पूर्व ही सीता कूप की साफ-सफाई कराई थी। इसे भव्यता प्रदान करने का काम शीघ्र किया जाएगा।
रामजन्मभूमि परिसर स्थित प्राचीन स्थलों का मूल स्वरूप सुरक्षित रखते हुए उनका पुरातन गौरव लौटे, ऐसा ट्रस्ट का प्रयास है। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने मंदिर निर्माण की भव्यता व तकनीक की प्रशंसा की है साथ ही ट्रस्ट की योजनाओं को भी सराहा है। यह हमारे लिए उत्साहवर्धक है। रामजन्मभूमि परिसर पहुंचते ही त्रेतायुग का अहसास होता है, इस तरह पूरे परिसर को सजाने की योजना है।
-चंपत राय, महासचिव, श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट
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उपराष्ट्रपति अयोध्या में दर्शन-पूजन कर निहाल दिखे। उन्होंने अपनी अयोध्या यात्रा के प्रत्येक पहलू का अपने फेसबुक पेज पर जिक्र किया है। इसी क्रम में उपराष्ट्रपति ने मंदिर निर्माण का जिक्र करते हुए राममंदिर ट्रस्ट की सराहना करते हुए अपने फेसबुक पेज पर लिखा कि सीता कूप और कुबेर टीला जैसे प्राचीन इमारतों का मूल स्वरूप बनाए रखने को विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विशेष सराहनीय है कि 70 एकड़ के इस परिसर में श्रद्धालुओं की सुगमता और सहायता के लिए केंद्र बनाया जा रहा है। संग्रहालय शोध संस्थान, गोशाला व योगकेंद्र का भी प्रावधान है।
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गौरतलब है कि मंदिर निर्माण से पूर्व ट्रस्ट की ओर से पूरे 70 एकड़ के परिसर का भौगोलिक सर्वे कराया गया था। इस सर्वे में ट्रस्ट ने अति ऐतिहासिक और प्राचीन संदर्भ को प्रदर्शित करने वाले 11 स्थान चिह्नित कर उसका ब्लूप्रिंट बनाकर मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र को सौंपा था। रिपोर्ट में भगवान राम के युग के साक्ष्य होने की बात भी कही गई है। परिसर की ऐतिहासिक चीजों में बदलाव न हो, इसलिए पूरे परिसर की खोदाई ट्रस्ट ने नहीं कराई थी। कुबेर टीला, सीता कूप, सीता रसोई, नल, नील, अंगद टीला व सुग्रीव टीला सहित 11 प्राचीन स्थलों के संरक्षण की योजना ट्रस्ट ने बनाई है।
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कुबेर टीला को लेकर पौराणिक मान्यताएं भी हैं। अयोध्या का इतिहास विवेचित करने वाले ग्रंथ रुदयामल के अनुसार युगों पूर्व यहां धन के देवता कुबेर का आगमन हुआ था। उन्होंने रामजन्मभूमि के निकट ऊंचे टीले पर शिवलिंग की स्थापना की थी। कालांतर में यहां मां पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, नंदी व कुबेर सहित कुल नौ देवी-देवताओं की प्रतिमा स्थापित की गई और श्रद्धालुओं के बीच यह स्थल नौरत्न के नाम से पूजित-प्रतिष्ठित हुआ। कुबेर टीला हिंदू-मुस्लिम एकता का स्मारक भी है। इसी टीले पर बाबा रामशरण दास व अमीर अली को अंग्रेजों ने फांसी दी थी। इस कुबेर टीला को भव्यता प्रदान करने की तैयारी है।
सीता कूप में समाहित है सभी तीर्थों का जल
इसी तरह परिसर स्थित सीता कूप को लेकर मान्यता है कि देश के सभी तीर्थस्थलों का जल इसमें समाहित है। अयोध्या नगर में होने वाले धार्मिक व मांगलिक कार्यक्रमों में इस स्थल के जल का प्रयोग आज भी किया जाता है। ट्रस्ट ने अभी कुछ माह पूर्व ही सीता कूप की साफ-सफाई कराई थी। इसे भव्यता प्रदान करने का काम शीघ्र किया जाएगा।
रामजन्मभूमि परिसर स्थित प्राचीन स्थलों का मूल स्वरूप सुरक्षित रखते हुए उनका पुरातन गौरव लौटे, ऐसा ट्रस्ट का प्रयास है। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने मंदिर निर्माण की भव्यता व तकनीक की प्रशंसा की है साथ ही ट्रस्ट की योजनाओं को भी सराहा है। यह हमारे लिए उत्साहवर्धक है। रामजन्मभूमि परिसर पहुंचते ही त्रेतायुग का अहसास होता है, इस तरह पूरे परिसर को सजाने की योजना है।
-चंपत राय, महासचिव, श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट