{"_id":"5d56f1fd8ebc3e89ef2cb7d5","slug":"surplus-teacher-faizabad-news-lko4765297103","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरप्लस शिक्षकों के तबादले की काउंसलिंग में हंगामा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरप्लस शिक्षकों के तबादले की काउंसलिंग में हंगामा
विज्ञापन
अयोध्या। बेसिक विद्यालयों में छात्र संख्या के सापेक्ष शिक्षकों के समायोजन की नई व्यवस्था को लेकर शुक्रवार को जबरदस्त हंगामा हुआ। प्रशासन और आंदोलित शिक्षक आमने-सामने आ गए। हंगामे के बीच प्रशासन ने भारी फोर्स बुलाकर शिक्षकों की काउंसलिंग शुरू कराई।
विरोध में काउंसलिंग स्थल विकास भवन परिसर में ही शिक्षकों ने धरना शुरू कर दिया है, जबकि देर शाम तक काउंसलिंग का कार्य भी चलता रहा।
बेसिक विद्यालयों में शिक्षकों के समायोजन के लिए इस बार नई व्यवस्था लागू की गई है। आरटीई के मानक के अनुरूप जिले के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय में जहां छात्रों की संख्या कम है, वहां के प्रधानाध्यापक/ सहायक अध्यापकों के समायोजन के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया शुक्रवार को कराया जाना था।
व्यवस्था के अनुसार जिन प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या आरटीई के मानक के विपरीत है, उनमें से प्रधानाध्यापकों को हटाकर उच्च प्राथमिक विद्यालयों के सहायक अध्यापक पद पर पदस्थापन किया जाना है।
विज्ञापन
जबकि, उच्च प्राथमिक विद्यालय में भी मानक के अनुसार, अधिसंख्य हुए शिक्षकों का भी अन्यत्र समायोजन किया जाना है। इसके लिए जिले भर में एकल व बंद विद्यालयों को खोला गया है। बीते 14 अगस्त को ही जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा ऐसे करीब 360 प्रधानाध्यापकों को चिह्नित करके काउंसलिंग के लिए आमंत्रित किया था।
बीएसए की ओर से आदेश जारी होते ही शिक्षकों में हड़कंप मच गया। शिक्षक नेताओं ने आपत्ति भी दर्ज कराई तो उसका निराकरण किए बिना शुक्रवार को काउंसलिंग कराने पर जिला प्रशासन अड़ा रहा। इससे नाराज शिक्षकों ने सुबह से ही हंगामा शुरू किया और जिले के विधायकों से मुलाकात कर जिला प्रशासन की इस कार्रवाई को उत्पीड़नात्मक बताया।
लेकिन, प्रशासन ने एक नहीं सुना, फोर्स बुला ली। विकास भवन में अपराह्न 2:30 बजे से काउंसलिंग प्रक्रिया कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रारंभ कराई गई। काउंसलिंग शुरू होते ही शिक्षक नेताओं ने विकास भवन परिसर में ही बहिष्कार करते हुए धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
घंटों काउंसलिंग प्रक्रिया चलने के बाद भी शिक्षकों ने काउंसलिंग में प्रतिभाग नहीं किया। काउंसलिंग के लिए पहले विकलांग, उसके बाद महिला फिर पुरुष शिक्षकों को बुलाया गया था। सूत्रों के अनुसार, छह बजे तक एक दर्जन शिक्षक भी काउंसलिंग नहीं कराए।
इसके बाद काउंसलिंग के लिए सभी को छूट दी गई। फिर भी मंद गति से इक्का-दुक्का शिक्षक ही काउंसलिंग में प्रतिभाग कर सके। देरशाम तक शिक्षकों का हंगामा चलता रहा और काउंसलिंग प्रक्रिया भी होती रही।
वहीं, बेसिक शिक्षा विभाग ने मुद्दे पर किसी प्रकार की बयानबाजी से इंकार किया। बीएसए अमिता सिंह ने बताया कि जब तक प्रक्रिया पूर्ण नहीं होगी, कोई जानकारी दे पाना संभव नहीं है।
मामले को गरमाता देख भाजपा विधायक गोसाईगंज इंद्र प्रताप तिवारी खब्बू, रुदौली विधायक रामचंद्र यादव, मिल्कीपुर विधायक बाबा गोरखनाथ आदि ने जिलाधिकारी से मुलाकात भी किया, लेकिन नतीजा शून्य रहा। अंत में मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक आनंद की अध्यक्षता में विकास भवन परिसर में काउंसलिंग प्रक्रिया प्रारंभ कराने का निर्णय उच्चाधिकारियों ने लिया।
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष नीलमणि त्रिपाठी ने बताया कि आनन-फानन में विभाग ने समायोजन आदेश पारित कर दिया। जारी सूची में तमाम त्रुटियां सामने आ रही हैं। मानकों का ध्यान भी नहीं दिया गया।
फर्जी छात्र संख्या भी दर्शाते हुए उत्पीडनात्मक कार्रवाई विभाग की ओर से की जा रही है। यदि जबरदस्ती काउंसलिंग कराकर पदस्थापन आदेश जारी किया गया तो न्यायालय का सहारा लिया जाएगा।
विज्ञापन
विरोध में काउंसलिंग स्थल विकास भवन परिसर में ही शिक्षकों ने धरना शुरू कर दिया है, जबकि देर शाम तक काउंसलिंग का कार्य भी चलता रहा।
बेसिक विद्यालयों में शिक्षकों के समायोजन के लिए इस बार नई व्यवस्था लागू की गई है। आरटीई के मानक के अनुरूप जिले के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय में जहां छात्रों की संख्या कम है, वहां के प्रधानाध्यापक/ सहायक अध्यापकों के समायोजन के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया शुक्रवार को कराया जाना था।
विज्ञापन
व्यवस्था के अनुसार जिन प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या आरटीई के मानक के विपरीत है, उनमें से प्रधानाध्यापकों को हटाकर उच्च प्राथमिक विद्यालयों के सहायक अध्यापक पद पर पदस्थापन किया जाना है।
विज्ञापन
जबकि, उच्च प्राथमिक विद्यालय में भी मानक के अनुसार, अधिसंख्य हुए शिक्षकों का भी अन्यत्र समायोजन किया जाना है। इसके लिए जिले भर में एकल व बंद विद्यालयों को खोला गया है। बीते 14 अगस्त को ही जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा ऐसे करीब 360 प्रधानाध्यापकों को चिह्नित करके काउंसलिंग के लिए आमंत्रित किया था।
बीएसए की ओर से आदेश जारी होते ही शिक्षकों में हड़कंप मच गया। शिक्षक नेताओं ने आपत्ति भी दर्ज कराई तो उसका निराकरण किए बिना शुक्रवार को काउंसलिंग कराने पर जिला प्रशासन अड़ा रहा। इससे नाराज शिक्षकों ने सुबह से ही हंगामा शुरू किया और जिले के विधायकों से मुलाकात कर जिला प्रशासन की इस कार्रवाई को उत्पीड़नात्मक बताया।
लेकिन, प्रशासन ने एक नहीं सुना, फोर्स बुला ली। विकास भवन में अपराह्न 2:30 बजे से काउंसलिंग प्रक्रिया कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रारंभ कराई गई। काउंसलिंग शुरू होते ही शिक्षक नेताओं ने विकास भवन परिसर में ही बहिष्कार करते हुए धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
घंटों काउंसलिंग प्रक्रिया चलने के बाद भी शिक्षकों ने काउंसलिंग में प्रतिभाग नहीं किया। काउंसलिंग के लिए पहले विकलांग, उसके बाद महिला फिर पुरुष शिक्षकों को बुलाया गया था। सूत्रों के अनुसार, छह बजे तक एक दर्जन शिक्षक भी काउंसलिंग नहीं कराए।
इसके बाद काउंसलिंग के लिए सभी को छूट दी गई। फिर भी मंद गति से इक्का-दुक्का शिक्षक ही काउंसलिंग में प्रतिभाग कर सके। देरशाम तक शिक्षकों का हंगामा चलता रहा और काउंसलिंग प्रक्रिया भी होती रही।
वहीं, बेसिक शिक्षा विभाग ने मुद्दे पर किसी प्रकार की बयानबाजी से इंकार किया। बीएसए अमिता सिंह ने बताया कि जब तक प्रक्रिया पूर्ण नहीं होगी, कोई जानकारी दे पाना संभव नहीं है।
मामले को गरमाता देख भाजपा विधायक गोसाईगंज इंद्र प्रताप तिवारी खब्बू, रुदौली विधायक रामचंद्र यादव, मिल्कीपुर विधायक बाबा गोरखनाथ आदि ने जिलाधिकारी से मुलाकात भी किया, लेकिन नतीजा शून्य रहा। अंत में मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक आनंद की अध्यक्षता में विकास भवन परिसर में काउंसलिंग प्रक्रिया प्रारंभ कराने का निर्णय उच्चाधिकारियों ने लिया।
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष नीलमणि त्रिपाठी ने बताया कि आनन-फानन में विभाग ने समायोजन आदेश पारित कर दिया। जारी सूची में तमाम त्रुटियां सामने आ रही हैं। मानकों का ध्यान भी नहीं दिया गया।
फर्जी छात्र संख्या भी दर्शाते हुए उत्पीडनात्मक कार्रवाई विभाग की ओर से की जा रही है। यदि जबरदस्ती काउंसलिंग कराकर पदस्थापन आदेश जारी किया गया तो न्यायालय का सहारा लिया जाएगा।