{"_id":"9cdd100db2a1a5bde6ae28f20b164910","slug":"sriram-misconceptions-and-myths-on-literature-or-research-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘श्रीराम के साहित्यों में भ्रांतियों और मिथकों पर करें शोध’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘श्रीराम के साहित्यों में भ्रांतियों और मिथकों पर करें शोध’
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 03 Feb 2016 11:42 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जगतगुरु पद्म विभूषण श्रीरामभद्राचार्य ने कहा कि श्रीराम के चरित्र का जो वर्णन विभिन्न ग्रंथों में है उसी को शोध के माध्यम से जनता जनार्दन को बताना ही श्रीराम शोध पीठ का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रीराम के साहित्यों में जो भी भ्रांतियां एवं मिथक हैं, उन्हें पीठ को अपने शोध के माध्यम से दूर करना चाहिए।
जगतगुरु ने राम का विस्तृत अर्थ समझाया और कहा कि इसका अर्थ कोई सांप्रदायिक मिथक नहीं, बल्कि राष्ट्र के मंगल से है। वह बुधवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के श्रीराम शोध पीठ में व्याख्यान दे रहे थे।
मुख्य अतिथि जगतगुरु पद्म विभूषण श्रीराम भद्राचार्य ने सर्वप्रथम सभी को शिक्षा के प्रति जागरूक किया। हमेशा पढ़ते रहने की ताकीद की। श्रीराम पीठ के उद्देश्यों की चर्चा करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम तो सर्वोपरि हैं, शोध से कहीं आगे हैं। हम भगवान श्रीराम के साहित्यों पर ही शोध कर सकते हैं।
विज्ञापन
श्रीराम के चरित्र का जो वर्णन विभिन्न ग्रंथों में वर्णित है उसी को शोध के माध्यम से जनता जनार्दन को बताना ही पीठ का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए। उन्होंने राम नाम के अर्थ को समझाते हुए कहा कि राम का अर्थ कोई सांप्रदायिक मिथक नही बल्कि रा का अर्थ राष्ट्र और म का अर्थ मंगल से है।
इसी संदर्भ में उन्होंने मंगल भवन अमंगल हारी द्रबहु सु दशरथ अजिर बिहारी का गान किया। अध्यक्षता इतिहास विभाग के अध्यक्ष डा. अजय प्रताप सिंह ने की। धन्यवाद ज्ञापन श्रीराम बल्लभा कुंज अयोध्या के अधिकारी श्रीराज कुमार दास ने किया।
कार्यक्रम में नाका हनुमान गढी पीठ के पुजारी श्री राम दास, नगर पालिकाध्यक्ष विजय गुप्ता, विवि के प्रो. एसके गर्ग, प्रो. हनुमान प्रसाद पांडेय, प्रो. आलोक मणि त्रिपाठी, प्रो. एसपी तिवारी, प्रो. आर एल सिंह आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन
जगतगुरु ने राम का विस्तृत अर्थ समझाया और कहा कि इसका अर्थ कोई सांप्रदायिक मिथक नहीं, बल्कि राष्ट्र के मंगल से है। वह बुधवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के श्रीराम शोध पीठ में व्याख्यान दे रहे थे।
विज्ञापन
मुख्य अतिथि जगतगुरु पद्म विभूषण श्रीराम भद्राचार्य ने सर्वप्रथम सभी को शिक्षा के प्रति जागरूक किया। हमेशा पढ़ते रहने की ताकीद की। श्रीराम पीठ के उद्देश्यों की चर्चा करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम तो सर्वोपरि हैं, शोध से कहीं आगे हैं। हम भगवान श्रीराम के साहित्यों पर ही शोध कर सकते हैं।
विज्ञापन
श्रीराम के चरित्र का जो वर्णन विभिन्न ग्रंथों में वर्णित है उसी को शोध के माध्यम से जनता जनार्दन को बताना ही पीठ का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए। उन्होंने राम नाम के अर्थ को समझाते हुए कहा कि राम का अर्थ कोई सांप्रदायिक मिथक नही बल्कि रा का अर्थ राष्ट्र और म का अर्थ मंगल से है।
इसी संदर्भ में उन्होंने मंगल भवन अमंगल हारी द्रबहु सु दशरथ अजिर बिहारी का गान किया। अध्यक्षता इतिहास विभाग के अध्यक्ष डा. अजय प्रताप सिंह ने की। धन्यवाद ज्ञापन श्रीराम बल्लभा कुंज अयोध्या के अधिकारी श्रीराज कुमार दास ने किया।
कार्यक्रम में नाका हनुमान गढी पीठ के पुजारी श्री राम दास, नगर पालिकाध्यक्ष विजय गुप्ता, विवि के प्रो. एसके गर्ग, प्रो. हनुमान प्रसाद पांडेय, प्रो. आलोक मणि त्रिपाठी, प्रो. एसपी तिवारी, प्रो. आर एल सिंह आदि उपस्थित रहे।